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पीआईसीयू वार्ड फुल, बच्चों पर बुखार का कोप
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पीआईसीयू वार्ड फुल, बच्चों पर बुखार का कोप
बुखार, झटका, उल्टी-दस्त, सांस के मरीजों से भरा है वार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बदले मौसम में बच्चे बुखार की चपेट में आ रहे हैं। हाल यह है कि मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू वार्ड में बेड भर गए हैं। बुखार, झटका, उल्टी-दस्त, सांस से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। एक बेड पर दो बच्चों को लिटाकर इलाज कराना पड़ रहा है। इससे बच्चों और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कुछ दवा न होने से तीमारदारों को खरीद कर लानी पड़ रही है।
मौसम में बदलाव का बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। बारिश के बाद धूप और गर्मी से सभी परेशान हैं। इस समय वायरस का संक्रमण फैल रहा है। कम इम्युनिटी के कारण इसका असर बच्चों पर पड़ रहा है।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जिले के विभिन्न इलाकों के अलावा बिहार प्रांत के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग आते हैं। इस समय अस्पताल में बच्चों को लेकर तीमारदार इलाज कराने पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन बुखार, झटका, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, सांस से पीड़ित बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कुछ बच्चों को तेज बुखार के साथ झटका भी आ रहा है। इनमें एईएस के लक्षण भी दिख रहे हैं।
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रविवार को दोपहर तक पीआईसीयू वार्ड भरा था। मरीज अधिक होने के कारण एक बेड पर दो बच्चे का इलाज किया जा रहा था। आराम होने पर चिल्ड्रेन वार्ड से छुट्टी दी गई तो कुछ को पीआईसीयू से वार्ड में शिफ्ट किया गया।
पंद्रह बेड के पीआईसीयू में सोलह बच्चे भर्ती थे। इसमें एक बेड पर दो बच्चों का इलाज चल रहा था। जबकि बीस बेड के चिल्ड्रेन वार्ड में 18 बच्चे भर्ती थे। यहां तीमारदारों को बैठने के लिए इंतजाम नहीं है। कुछ तीमारदार बेड के पास तो कुछ लोग बाहर हाल में फर्श पर बैठकर समय काट रहे थे। अस्पताल में बुखार के मरीजों को दिए जाने वाले एंटीबॉयोटिक सीरप की कमी है। जरूरत पड़ने पर तीमारदार को बाहर से खरीद कर लाना पड़ता है।
डॉक्टरों का कहना है कि मौसम बदलने से तेजी से वायरस, बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे संक्रमण बढ़ जाता है। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वे बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। खाना-पान, पानी, गंदगी, गंदा पानी जमा होने के कारण का असर बच्चों पर पड़ता है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। इससे मच्छरजनित बीमारी की चपेट में बच्चे आ रहे हैं। ऐसे में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
ये सावधानी बरतें
साफ-सफाई पर ध्यान दें, हाथ अच्छी तरह धुलकर भोजन करें
ताजा भोजन, पीने के लिए शुद्ध पानी का सेवन करें
खुले में सड़क किनारे बिने ढके कटे फल व खाद्य पदार्थ का सेवन न करें
मौसमी फल का सेवन अच्छी तरह धुल करें
शाम को सोते समय पूरी बांह का कपड़ा जरूर पहनाएं
कोट
मौसम में बदलाव व गर्मी के कारण बच्चे बीमार हो रहे हैं। दूषित खाद्य पदार्थ व पानी के सेवन से मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में बुखार, पेट दर्द, झटका, उल्टी, दस्त से ग्रसित बच्चे आ रहे हैं। इस समय सतर्कता के साथ ही बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। दिक्कत होने पर चिकित्सक से संपर्क कर दवा दें।। मच्छर से बचें। मॉस्किटो लिफ्रेंट का प्रयोग करना चाहिए। अस्पताल में मरीजों के लिए सुविधा है। जो दवा नहीं है, उसे मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। अन्य कमियों को दूर कर दिया जाएगा।
- डॉ. एचके मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ
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बुखार, झटका, उल्टी-दस्त, सांस के मरीजों से भरा है वार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बदले मौसम में बच्चे बुखार की चपेट में आ रहे हैं। हाल यह है कि मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू वार्ड में बेड भर गए हैं। बुखार, झटका, उल्टी-दस्त, सांस से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। एक बेड पर दो बच्चों को लिटाकर इलाज कराना पड़ रहा है। इससे बच्चों और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कुछ दवा न होने से तीमारदारों को खरीद कर लानी पड़ रही है।
मौसम में बदलाव का बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। बारिश के बाद धूप और गर्मी से सभी परेशान हैं। इस समय वायरस का संक्रमण फैल रहा है। कम इम्युनिटी के कारण इसका असर बच्चों पर पड़ रहा है।
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महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जिले के विभिन्न इलाकों के अलावा बिहार प्रांत के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग आते हैं। इस समय अस्पताल में बच्चों को लेकर तीमारदार इलाज कराने पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन बुखार, झटका, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, सांस से पीड़ित बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कुछ बच्चों को तेज बुखार के साथ झटका भी आ रहा है। इनमें एईएस के लक्षण भी दिख रहे हैं।
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रविवार को दोपहर तक पीआईसीयू वार्ड भरा था। मरीज अधिक होने के कारण एक बेड पर दो बच्चे का इलाज किया जा रहा था। आराम होने पर चिल्ड्रेन वार्ड से छुट्टी दी गई तो कुछ को पीआईसीयू से वार्ड में शिफ्ट किया गया।
पंद्रह बेड के पीआईसीयू में सोलह बच्चे भर्ती थे। इसमें एक बेड पर दो बच्चों का इलाज चल रहा था। जबकि बीस बेड के चिल्ड्रेन वार्ड में 18 बच्चे भर्ती थे। यहां तीमारदारों को बैठने के लिए इंतजाम नहीं है। कुछ तीमारदार बेड के पास तो कुछ लोग बाहर हाल में फर्श पर बैठकर समय काट रहे थे। अस्पताल में बुखार के मरीजों को दिए जाने वाले एंटीबॉयोटिक सीरप की कमी है। जरूरत पड़ने पर तीमारदार को बाहर से खरीद कर लाना पड़ता है।
डॉक्टरों का कहना है कि मौसम बदलने से तेजी से वायरस, बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे संक्रमण बढ़ जाता है। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वे बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। खाना-पान, पानी, गंदगी, गंदा पानी जमा होने के कारण का असर बच्चों पर पड़ता है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। इससे मच्छरजनित बीमारी की चपेट में बच्चे आ रहे हैं। ऐसे में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
ये सावधानी बरतें
साफ-सफाई पर ध्यान दें, हाथ अच्छी तरह धुलकर भोजन करें
ताजा भोजन, पीने के लिए शुद्ध पानी का सेवन करें
खुले में सड़क किनारे बिने ढके कटे फल व खाद्य पदार्थ का सेवन न करें
मौसमी फल का सेवन अच्छी तरह धुल करें
शाम को सोते समय पूरी बांह का कपड़ा जरूर पहनाएं
कोट
मौसम में बदलाव व गर्मी के कारण बच्चे बीमार हो रहे हैं। दूषित खाद्य पदार्थ व पानी के सेवन से मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में बुखार, पेट दर्द, झटका, उल्टी, दस्त से ग्रसित बच्चे आ रहे हैं। इस समय सतर्कता के साथ ही बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। दिक्कत होने पर चिकित्सक से संपर्क कर दवा दें।। मच्छर से बचें। मॉस्किटो लिफ्रेंट का प्रयोग करना चाहिए। अस्पताल में मरीजों के लिए सुविधा है। जो दवा नहीं है, उसे मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। अन्य कमियों को दूर कर दिया जाएगा।
- डॉ. एचके मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ