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मरीजों को नहीं मिलती दोनों जून रोटी
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जिला अस्पताल में मरीजो के लिए खाना लेते तिमारदार।संवाद
- फोटो : DEORIA
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मरीजों को नहीं मिलती दोनों जून रोटी
मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं को मिलता है पानी वाला दूध, पानी वाली सब्जी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल एवं महिला अस्पताल में शासन से मरीजों को भोजन देने की व्यवस्था है। 110 रुपये प्रतिदिन भोजन पर खर्च होता है। जिस प्रकार का मरीज उस प्रकार का मेन्यू निर्धारित है लेकिन मरीजों को ठीक से भोजन, नाश्ता नहीं मिल पा रहा है। जो भी मिलता है मानक के अनुसार नहीं होता। वहीं, बाहर से मंगाकर नाश्ता करना पड़ता है। महिला अस्पताल में नाश्ता देने का नियम है लेकिन फल व शाम की चाय नहीं मिलती है।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में करीब 330 बेड हैं। इसमें दस प्राइवेट वार्ड को छोड़ कर अन्य वार्डों में मरीज भर्ती हैं। यहां मरीजों का भोजन अस्पताल परिसर में स्थित रसोईघर से तैयार होकर आता है। अस्पताल प्रशासन एक मरीज पर 110 रुपये प्रतिदिन भोजन पर खर्च करता है। इसमें भोजन में दोनों वक्त चार रोटी, चावल, दाल, सब्जी देने का नियम है लेकिन मरीजों को किसी एक वक्त ही रोटी मिल पाती है। इसमें भी किसी को एक से दो ही रोटी दी जाती है। चावल की मात्रा अधिक रहती है। वहीं, दाल में दिन को गनीमत रहती है जबकि रात में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। सब्जी भी दोनों समय तरी वाली होती है। इसमें मौसमी सब्जी नाम मात्र की होती है। जबकि आलू अधिक रहता है। मरीज के साथ एक तीमारदार को भी जरूरत के मुताबिक भोजन दिया जाता है। मरीजों के लिए नाश्ते की व्यवस्था नहीं है। सुबह दवा खाने के लिए तीमारदार को मरीज के लिए बाहर से नाश्ता लाना पड़ता है। जिन मरीजों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती है, वे बिस्कुट खाने के बाद दवा लेते हैं।
बोले मरीजों के अभिभावक
जिला अस्पताल में अपनी पुत्री को लेकर भर्ती हरी का कहना है कि रविवार को खाना समय से मिला, मंगलवार को दो बजे खाना मिला। लेट होने से बाहर का खाना लाया गया। दिन का मिला खाना रात के लिए रख दिया गया कि रात में भोजन मिलने में देर होने पर उसे समय से खा लिया जाएगा। ऐसा खाना है कि केवल पेट भरा जा रहा है। पुत्री को लेकर भर्ती कमरूननिशा का कहना है कि अस्पताल का खाना ठीक न होने के कारण नहीं लेते हैं। बाहर से भोजन मंगाते हैं। पौत्री को लेकर भर्ती रूबी देवी का कहना है कि अस्पताल में भोजन समय से नहीं मिलता है। बच्चे को भूख लग जाती है, जिससे बाहर से लाकर खाना खिलाती हूं। अपने रिश्तेदार को लेकर भर्ती छोटेलाल का कहना है कि खाना मिला लेकिन जो मिल जा रहा है उसे तो ग्रहण करना ही है। अपनी पत्नी को लेकर महिला अस्पताल में भर्ती अर्जुन का कहना है कि सुबह में एक अंडा, दूध व चार ब्रेड मिला। दूूध में पानी अधिक होने के कारण उसी तरह रखा है। ब्रेड का पीस भी काफी छोटा था। मंगलवार को भोजन देर से मिला, जिससे परेेशानी हुई। पत्नी केे लेकर भर्ती पतरू गोंड का कहना है कि रविवार से हैं। सुबह ग्यारह बजे एक नाश्ता, अंडा, ब्रेड, फीका दूध मिला। इससे दूध बाहर से खरीद कर लाना पड़ा। दोपहर में एक रोटी, चावल, दाल, सब्जी मिली, जिसमें दाल काफी पतली थी। सब्जी भी ठीक नहीं थी। इसके अलावा पुत्री को लेकर भर्ती इंदू देवी का कहना है कि मंगलवार को आईं। रात में खाना मिला लेकिन रोटी नहीं थी। दाल पतली थी। आलू व नेनुआ की तरी वाली सब्जी थी, जिसमें आलू अधिक था।
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कोट
अस्पताल में मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था है। हर रोज दिन तथा रात में रोटी, दाल, रोटी, सब्जी दी जाती है। भोजन मानक के अनुसार ही दिए जाते हैं। किसी तरह की कोई समस्या है तो उसे और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
-डॉ. आनंद मोहन वर्मा, सीएमएस
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मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं को मिलता है पानी वाला दूध, पानी वाली सब्जी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल एवं महिला अस्पताल में शासन से मरीजों को भोजन देने की व्यवस्था है। 110 रुपये प्रतिदिन भोजन पर खर्च होता है। जिस प्रकार का मरीज उस प्रकार का मेन्यू निर्धारित है लेकिन मरीजों को ठीक से भोजन, नाश्ता नहीं मिल पा रहा है। जो भी मिलता है मानक के अनुसार नहीं होता। वहीं, बाहर से मंगाकर नाश्ता करना पड़ता है। महिला अस्पताल में नाश्ता देने का नियम है लेकिन फल व शाम की चाय नहीं मिलती है।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में करीब 330 बेड हैं। इसमें दस प्राइवेट वार्ड को छोड़ कर अन्य वार्डों में मरीज भर्ती हैं। यहां मरीजों का भोजन अस्पताल परिसर में स्थित रसोईघर से तैयार होकर आता है। अस्पताल प्रशासन एक मरीज पर 110 रुपये प्रतिदिन भोजन पर खर्च करता है। इसमें भोजन में दोनों वक्त चार रोटी, चावल, दाल, सब्जी देने का नियम है लेकिन मरीजों को किसी एक वक्त ही रोटी मिल पाती है। इसमें भी किसी को एक से दो ही रोटी दी जाती है। चावल की मात्रा अधिक रहती है। वहीं, दाल में दिन को गनीमत रहती है जबकि रात में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। सब्जी भी दोनों समय तरी वाली होती है। इसमें मौसमी सब्जी नाम मात्र की होती है। जबकि आलू अधिक रहता है। मरीज के साथ एक तीमारदार को भी जरूरत के मुताबिक भोजन दिया जाता है। मरीजों के लिए नाश्ते की व्यवस्था नहीं है। सुबह दवा खाने के लिए तीमारदार को मरीज के लिए बाहर से नाश्ता लाना पड़ता है। जिन मरीजों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती है, वे बिस्कुट खाने के बाद दवा लेते हैं।
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बोले मरीजों के अभिभावक
जिला अस्पताल में अपनी पुत्री को लेकर भर्ती हरी का कहना है कि रविवार को खाना समय से मिला, मंगलवार को दो बजे खाना मिला। लेट होने से बाहर का खाना लाया गया। दिन का मिला खाना रात के लिए रख दिया गया कि रात में भोजन मिलने में देर होने पर उसे समय से खा लिया जाएगा। ऐसा खाना है कि केवल पेट भरा जा रहा है। पुत्री को लेकर भर्ती कमरूननिशा का कहना है कि अस्पताल का खाना ठीक न होने के कारण नहीं लेते हैं। बाहर से भोजन मंगाते हैं। पौत्री को लेकर भर्ती रूबी देवी का कहना है कि अस्पताल में भोजन समय से नहीं मिलता है। बच्चे को भूख लग जाती है, जिससे बाहर से लाकर खाना खिलाती हूं। अपने रिश्तेदार को लेकर भर्ती छोटेलाल का कहना है कि खाना मिला लेकिन जो मिल जा रहा है उसे तो ग्रहण करना ही है। अपनी पत्नी को लेकर महिला अस्पताल में भर्ती अर्जुन का कहना है कि सुबह में एक अंडा, दूध व चार ब्रेड मिला। दूूध में पानी अधिक होने के कारण उसी तरह रखा है। ब्रेड का पीस भी काफी छोटा था। मंगलवार को भोजन देर से मिला, जिससे परेेशानी हुई। पत्नी केे लेकर भर्ती पतरू गोंड का कहना है कि रविवार से हैं। सुबह ग्यारह बजे एक नाश्ता, अंडा, ब्रेड, फीका दूध मिला। इससे दूध बाहर से खरीद कर लाना पड़ा। दोपहर में एक रोटी, चावल, दाल, सब्जी मिली, जिसमें दाल काफी पतली थी। सब्जी भी ठीक नहीं थी। इसके अलावा पुत्री को लेकर भर्ती इंदू देवी का कहना है कि मंगलवार को आईं। रात में खाना मिला लेकिन रोटी नहीं थी। दाल पतली थी। आलू व नेनुआ की तरी वाली सब्जी थी, जिसमें आलू अधिक था।
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कोट
अस्पताल में मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था है। हर रोज दिन तथा रात में रोटी, दाल, रोटी, सब्जी दी जाती है। भोजन मानक के अनुसार ही दिए जाते हैं। किसी तरह की कोई समस्या है तो उसे और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
-डॉ. आनंद मोहन वर्मा, सीएमएस