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नर्सिंग होम पर छापा, डॉक्टर नदारद
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Mon, 09 May 2016 11:16 PM IST
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- फोटो : Desk
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भाटपाररानी क्षेत्र के बंगरा बाजार में अवैध ढंग से चल रहे एक नर्सिंग होम पर सोमवार को पीएचसी प्रभारी डॉ. के के गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की। इस दौरान नर्सिंग होम कोई भी डॉक्टर नहीं मिला। 14 रोगी मिले, जिन्हें आपरेशन के बाद भर्ती किया गया था। यह देखकर टीम दंग रह गई। जांच में पता चला कि बिना ओटी के चौकी पर लिटाकर आपरेशन किया जाता है। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
बंगरा बाजार में पिछले कई सालों से बिहार के मैरवा का व्यक्ति नर्सिंग होम चलाता है। नर्सिंग होम में पथरी, बच्चेदानी, हार्निया, बवासीर, हाईड्रोसील आदि के आपरेशन किया जाता है। हाल में ही जासपार निवासी युगुल किशोर कुशवाहा की पत्नी के पेट का आपरेशन करते समय कुछ गड़बड़ी कर दिया था। उसकी हालत बिगड़ती देख परिजन गोरखपुर लेकर गए। जहां सर्जन ने दोबारा आपरेशन कर उसकी जान बचाई।
ऐसे कई मामले आने पर भ्रष्टाचार निरोधक समिति के तहसील प्रभारी मनोज सिंह ने नर्सिंग होम के विरूद्ध मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग में शिकायत की थी। सीएमओ के आदेश पर जब जांच टीम पहुंची तो वहां पर क्षेत्र के बड़हरिया, करौंदा, मठिया, चुपवां आदि गांवों के 14 मरीज मिले, जिनका आपरेशन किया गया था। वहां पर कोई ओटी नहीं था। रोगियों ने बताया कि कमरे में चौकी पर लिटा कर आपरेशन किया जाता है। उनसे 20 से 25 हजार रुपये आपरेशन और दवा के नाम पर लिया जाता है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण गोरखपुर के निर्देश पर सीएमओ ने उन्हें टीम के साथ जांच करने का आदेश दिया था। जांच के दौरान चिकित्सक फरार था। दवा दुकानदार के पास कोई लाइसेंस नहीं मिला। इसकी रिपोर्ट वह सीएमओ को देंगे।
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बंगरा बाजार में पिछले कई सालों से बिहार के मैरवा का व्यक्ति नर्सिंग होम चलाता है। नर्सिंग होम में पथरी, बच्चेदानी, हार्निया, बवासीर, हाईड्रोसील आदि के आपरेशन किया जाता है। हाल में ही जासपार निवासी युगुल किशोर कुशवाहा की पत्नी के पेट का आपरेशन करते समय कुछ गड़बड़ी कर दिया था। उसकी हालत बिगड़ती देख परिजन गोरखपुर लेकर गए। जहां सर्जन ने दोबारा आपरेशन कर उसकी जान बचाई।
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ऐसे कई मामले आने पर भ्रष्टाचार निरोधक समिति के तहसील प्रभारी मनोज सिंह ने नर्सिंग होम के विरूद्ध मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग में शिकायत की थी। सीएमओ के आदेश पर जब जांच टीम पहुंची तो वहां पर क्षेत्र के बड़हरिया, करौंदा, मठिया, चुपवां आदि गांवों के 14 मरीज मिले, जिनका आपरेशन किया गया था। वहां पर कोई ओटी नहीं था। रोगियों ने बताया कि कमरे में चौकी पर लिटा कर आपरेशन किया जाता है। उनसे 20 से 25 हजार रुपये आपरेशन और दवा के नाम पर लिया जाता है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण गोरखपुर के निर्देश पर सीएमओ ने उन्हें टीम के साथ जांच करने का आदेश दिया था। जांच के दौरान चिकित्सक फरार था। दवा दुकानदार के पास कोई लाइसेंस नहीं मिला। इसकी रिपोर्ट वह सीएमओ को देंगे।
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