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Deoria News: दिल के मरीजों का मेडिकल कॉलेज में इलाज नहीं, बड़े शहर की ओर रुख करना मजबूरी
Mon, 24 Apr 2023 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 24 Apr 2023 11:42 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में दिल के मरीजों की दवा नहीं
जिला अस्पताल के मेडिकल कालेज में तब्दील होने पर दो साल पहले ध्वस्त हुआ आईसीयू वार्ड नहीं बन सका
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में दिल (हृदय रोग) के मरीजों के इलाज की व्यवस्था नहीं है। इस कारण मरीजों को महानगरों का रुख करना पड़ रहा है। इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर रेफर कर दे रहे हैं। गंभीर बात तो यह है कि जिला अस्पताल में स्थापित आईसीयू वार्ड ध्वस्त भी कर दिया गया है। डॉक्टर और इंतजाम के अभाव में मरीजों की जेब ढीली हो रही है। मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए 24 महीना हो गया। पर अब तक यहां हृदय रोग के मरीजों के इलाज के लिए न डॉक्टर हैं और न ही आईसीयू की सुविधा हो सकी है। सोमवार को 12 हृदय रोगी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उनमें से एक की स्थित गंभीर होने पर डॉक्टर ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
करीब पांच माह पहले डीएम कार्डियोलाजिस्ट डॉ. अभिषेक अग्रवाल की नियुक्ति की गई थी। वह सप्ताह में दो दिन ही ओपीडी में बैठते थे और एक दिन में 60-70 मरीजों का इलाज करते थे। इससे हृदय रोग के मरीजों को काफी सहूलियत थी, लेकिन मार्च में वह यहां से चले गए। इसके बाद अब मेडिसिन विभाग में हार्ट के मरीजों का उपचार होता है। इन दिनों इस बीमारी के लक्षण वाले हर दिन औसतन करीब 20 से 25 मरीज आते हैं। इसमें गंभीर मरीजों को संसाधन के अभाव में रेफर करना पड़ता है। सोमवार को 12 मरीज आए थे। इसमें एक मरीज की हालत गंभीर देख मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेज दिया गया। इमरजेंसी और ओपीडी को लेकर प्रतिदिन करीब पांच मरीज रेफर किए जाते हैं। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी होती है। उन्हें गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी की ओर रुख करना पड़ता है। कभी-कभी मरीज हायर सेंटर तक नहीं पहुंच पाते हैं। 20 अप्रैल भलुअनी ब्लाक के वादीपुर की रहने वाली इंद्रावती देवी को हर्ट की दिक्कत होने पर शाम को संसाधन और विशेष डॉक्टर की बात कहते हुए इमरजेंसी से रेफर दिया गया। परिजन मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले जा रहे थे कि रास्ते में दम तोड़ दिया। इसी दिन बढ़या हरदो के जनार्दन को भी हायर सेंटर भेजा गया। शहर के न्यू कॉलोनी की इंद्रावती देवी को हर्ट में दिक्कत होने पर रेफर किया गया। परिजन उन्हें केजीएमयू लेकर चले गए।
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जिला अस्पताल थे डॉक्टर और चार बेड का आईसीयू
जिला अस्पताल में पहले आईसीयू की सुविधा थी। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. यूडी त्रिपाठी गंभीर मरीजों का इलाज करते थे। इसके लिए ब्लड बैंक के बगल में चार बेड का आईसीयू था। पर मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण के समय वर्ष 2019 में आईसीयू को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन फिर उसे स्थापित नहीं किया जा सका है। इस समय न आईसीयू है और न ही डॉक्टर हैं।
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आईसीयू में यह होना चाहिए
मेडिकल कॉलेज में आईसीयू होनी चाहिए। इसमें वेंटीलेटर, हाईफ्लो ऑक्सीजन, डीफाइब्रिलेटर, इंफ्यूजन पंप, ऑक्सीजन कसंट्रेटर, मानीटर, ईसीजी, ग्लूको मीटर, बाइपैप, प्रोटेबल एक्स-रे, सेक्सन मशीन, व्हील चेयर, स्ट्रेचर, अत्याधुनिक बेड सहित अन्य उपकरण होने चाहिए। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक, दक्ष स्टाफ नर्स, एनेथेस्टिस्ट, ईसीजी, वेंटिलेटर व एक्स रे टेक्नीशियन, वार्ड ब्वाय, स्वीपर की तैनाती होनी चाहिए।
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- मां की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने हर्ट में दिक्कत बताया। इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचा तो रेफर कर दिया गया। मजबूरी में इलाज के लिए लखनऊ जाना पड़ा। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर और संसाधन न होने के कारण काफी दिक्कत हुई।
विकास कुमार गुप्ता, गुठनी
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- विशेषज्ञ डॉक्टर और आईसीयू न होने से मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। इसके लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है, जिससे काफी धर्न खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
अजय मिश्रा, रामनाथ देवरिया
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हृदय रोग के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर के लिए शासन से मांग की गई है। क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए जमीन चिह्नित की गई है। उसके निर्माण और ट्रेंड स्टाफ की तैनात के लिए प्रक्रिया की जा रही है। आने वाले समय में समस्या का समाधान हो जाएगा। हालांकि अभी चार बेड का आईसीयू निर्माणाधीन है, दो माह के अंदर तैयार हो जाएगा।
- डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस
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जिला अस्पताल के मेडिकल कालेज में तब्दील होने पर दो साल पहले ध्वस्त हुआ आईसीयू वार्ड नहीं बन सका
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में दिल (हृदय रोग) के मरीजों के इलाज की व्यवस्था नहीं है। इस कारण मरीजों को महानगरों का रुख करना पड़ रहा है। इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर रेफर कर दे रहे हैं। गंभीर बात तो यह है कि जिला अस्पताल में स्थापित आईसीयू वार्ड ध्वस्त भी कर दिया गया है। डॉक्टर और इंतजाम के अभाव में मरीजों की जेब ढीली हो रही है। मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए 24 महीना हो गया। पर अब तक यहां हृदय रोग के मरीजों के इलाज के लिए न डॉक्टर हैं और न ही आईसीयू की सुविधा हो सकी है। सोमवार को 12 हृदय रोगी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उनमें से एक की स्थित गंभीर होने पर डॉक्टर ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
करीब पांच माह पहले डीएम कार्डियोलाजिस्ट डॉ. अभिषेक अग्रवाल की नियुक्ति की गई थी। वह सप्ताह में दो दिन ही ओपीडी में बैठते थे और एक दिन में 60-70 मरीजों का इलाज करते थे। इससे हृदय रोग के मरीजों को काफी सहूलियत थी, लेकिन मार्च में वह यहां से चले गए। इसके बाद अब मेडिसिन विभाग में हार्ट के मरीजों का उपचार होता है। इन दिनों इस बीमारी के लक्षण वाले हर दिन औसतन करीब 20 से 25 मरीज आते हैं। इसमें गंभीर मरीजों को संसाधन के अभाव में रेफर करना पड़ता है। सोमवार को 12 मरीज आए थे। इसमें एक मरीज की हालत गंभीर देख मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेज दिया गया। इमरजेंसी और ओपीडी को लेकर प्रतिदिन करीब पांच मरीज रेफर किए जाते हैं। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी होती है। उन्हें गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी की ओर रुख करना पड़ता है। कभी-कभी मरीज हायर सेंटर तक नहीं पहुंच पाते हैं। 20 अप्रैल भलुअनी ब्लाक के वादीपुर की रहने वाली इंद्रावती देवी को हर्ट की दिक्कत होने पर शाम को संसाधन और विशेष डॉक्टर की बात कहते हुए इमरजेंसी से रेफर दिया गया। परिजन मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले जा रहे थे कि रास्ते में दम तोड़ दिया। इसी दिन बढ़या हरदो के जनार्दन को भी हायर सेंटर भेजा गया। शहर के न्यू कॉलोनी की इंद्रावती देवी को हर्ट में दिक्कत होने पर रेफर किया गया। परिजन उन्हें केजीएमयू लेकर चले गए।
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जिला अस्पताल थे डॉक्टर और चार बेड का आईसीयू
जिला अस्पताल में पहले आईसीयू की सुविधा थी। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. यूडी त्रिपाठी गंभीर मरीजों का इलाज करते थे। इसके लिए ब्लड बैंक के बगल में चार बेड का आईसीयू था। पर मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण के समय वर्ष 2019 में आईसीयू को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन फिर उसे स्थापित नहीं किया जा सका है। इस समय न आईसीयू है और न ही डॉक्टर हैं।
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आईसीयू में यह होना चाहिए
मेडिकल कॉलेज में आईसीयू होनी चाहिए। इसमें वेंटीलेटर, हाईफ्लो ऑक्सीजन, डीफाइब्रिलेटर, इंफ्यूजन पंप, ऑक्सीजन कसंट्रेटर, मानीटर, ईसीजी, ग्लूको मीटर, बाइपैप, प्रोटेबल एक्स-रे, सेक्सन मशीन, व्हील चेयर, स्ट्रेचर, अत्याधुनिक बेड सहित अन्य उपकरण होने चाहिए। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक, दक्ष स्टाफ नर्स, एनेथेस्टिस्ट, ईसीजी, वेंटिलेटर व एक्स रे टेक्नीशियन, वार्ड ब्वाय, स्वीपर की तैनाती होनी चाहिए।
- मां की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने हर्ट में दिक्कत बताया। इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचा तो रेफर कर दिया गया। मजबूरी में इलाज के लिए लखनऊ जाना पड़ा। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर और संसाधन न होने के कारण काफी दिक्कत हुई।
विकास कुमार गुप्ता, गुठनी
- विशेषज्ञ डॉक्टर और आईसीयू न होने से मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। इसके लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है, जिससे काफी धर्न खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
अजय मिश्रा, रामनाथ देवरिया
हृदय रोग के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर के लिए शासन से मांग की गई है। क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए जमीन चिह्नित की गई है। उसके निर्माण और ट्रेंड स्टाफ की तैनात के लिए प्रक्रिया की जा रही है। आने वाले समय में समस्या का समाधान हो जाएगा। हालांकि अभी चार बेड का आईसीयू निर्माणाधीन है, दो माह के अंदर तैयार हो जाएगा।
- डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस