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टेढे़-मेढे़ पैर को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत : प्राचार्य
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विश्व क्लब फुट दिवस पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने केक काटा।विज्ञप्ति
मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में केक काटकर मना विश्व क्लबफुट दिवस
- समय से उपचार होने से ठीक हो जाती है बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। विश्व क्लबफुट दिवस पर मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के क्लबफुट कक्ष में शुक्रवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल ने केक काटा और मरीजों के परिजनों को खिलाया गया। कक्ष को रंग-बिरंगे गुब्बारे से सजाया गया था।
प्राचार्य ने कहा कि टेढे़-मेढे़ पैर की बीमारी को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। नवजात में टेढे़-मेढ़े पंजे, पैर की बीमारी जन्मजात होती है। इसे लेकर घबराना नहीं चाहिए। इसके लिए सतर्कता जरूरी है। समय से उपचार करने से यह बीमारी ठीक हो सकती है और बच्चों अन्य बच्चों की तरह हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह दिवस डॉक्टर के सम्मान में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। उन्होंने इस पद्धति से उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला।कहा कि सरकार की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) योजना चलाई जा रही है। इसके तहत डॉक्टरों की टीम बच्चों को चिह्नित करती है और उनका इलाज कराया जाता है। कहा कि अनुष्का फाउंडेशन फॉर एलिमिनेटिंग क्लबफुट की ओर से 30 जून तक ऑनलाइन जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।
इस दौरान डॉ. आरके श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजय, डॉ. विकास मित्तल, डॉ. इरशाद, डॉ. शशांक मणि त्रिपाठी, डॉ. राणा विष्णु प्रताप सिंह और परमवीर आदि मौजूद रहे।
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- समय से उपचार होने से ठीक हो जाती है बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। विश्व क्लबफुट दिवस पर मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के क्लबफुट कक्ष में शुक्रवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल ने केक काटा और मरीजों के परिजनों को खिलाया गया। कक्ष को रंग-बिरंगे गुब्बारे से सजाया गया था।
प्राचार्य ने कहा कि टेढे़-मेढे़ पैर की बीमारी को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। नवजात में टेढे़-मेढ़े पंजे, पैर की बीमारी जन्मजात होती है। इसे लेकर घबराना नहीं चाहिए। इसके लिए सतर्कता जरूरी है। समय से उपचार करने से यह बीमारी ठीक हो सकती है और बच्चों अन्य बच्चों की तरह हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह दिवस डॉक्टर के सम्मान में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। उन्होंने इस पद्धति से उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला।कहा कि सरकार की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) योजना चलाई जा रही है। इसके तहत डॉक्टरों की टीम बच्चों को चिह्नित करती है और उनका इलाज कराया जाता है। कहा कि अनुष्का फाउंडेशन फॉर एलिमिनेटिंग क्लबफुट की ओर से 30 जून तक ऑनलाइन जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।
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इस दौरान डॉ. आरके श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजय, डॉ. विकास मित्तल, डॉ. इरशाद, डॉ. शशांक मणि त्रिपाठी, डॉ. राणा विष्णु प्रताप सिंह और परमवीर आदि मौजूद रहे।
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