फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   Medical college district level...facilities are low level

Deoria News: मेडिकल कॉलेज जिला स्तरीय...सुविधाएं निम्न स्तरीय

Mon, 19 Aug 2024 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Mon, 19 Aug 2024 12:59 AM IST
विज्ञापन
Medical college district level...facilities are low level
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में नहीं आटोक्लेव
विज्ञापन

इमरजेंसी में टांका-पट्टी कराने पर संक्रमण का भी जोखिम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में टांका-पट्टी कराने वाले जख्मी मरीजों को राहत के साथ संक्रमण की भी आशंका है, क्योंकि इमरजेंसी की माइनर ओटी में उपकरणों को स्टरलाइज करने के लिए आटोक्लेव की सुविधा भी नहीं है। डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी भी महसूस कर रहे हैं कि जिला स्तरीय मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं निम्न स्तरीय ही हैं। मरीजों का इलाज संसाधनों के अभाव में हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी की माइनर ओटी में टूटे हुए टेबल पर टांके लगाए जाते हैं, जबकि ओटी लाइट भी नहीं है। गंभीर बात है कि उपकरणों के ट्रेन में जंग दिखी। एक मरीज से दूसरे मरीज तक संक्रमण को रोकने के लिए उपकरणों को स्टरलाइज करने के लिए आटोक्लेव नहीं है। महज एक या दो सेट उपकरण है, उसे केमिकल में ही रखा जाता है, क्योंकि कुछ हद तक उपयोगी ब्वायलर भी नहीं है।
विज्ञापन

-----
एक साल से ताले में बंद है दस लाख की मशीन
मेडिकल कॉलेज में दस लाख की आटोक्लेव मशीन ताले के अंदर बंद है। यह मशीन एक साल पहले आई थी, लेकिन इसे अब तक इंस्टाल नहीं किया गया, जबकि इसके वारंटी की मियाद भी खत्म हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------
गंभीर बीमारियों के संक्रमण का जोखिम
इमरजेंसी में 15 से 18 अगस्त तक इमरजेंसी में 301 मरीजों का उपचार किया गया, जिसमें हर दिन 10-14 मरीजों का टांके लगाकर मरहम पट्टी की गई। जिले में ट्रामा सेंटर संचालित नहीं होने के कारण हादसे के मरीजों का इमरजेंसी में ही प्राथमिक उपचार किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार एक ही उपकरण को बिना स्टरलाइज किए कई मरीजों का उपचार करने से संक्रमण फैल सकता है। शरीर से बाहर होने पर एचआईवी वायरस 30 मिनट और हैपेटाइटिस के वायरस छह दिन तक नहीं मरते हैं। यहीं कारण है कि ब्लायलर की बजाए आटोक्लेव का उपयोग किया जाता है।
-----------

मिनी ओटी में होने चाहिए ये उपकरण
टू थेट फोरसेप
आट्री फोरसेप
प्लेन फोरसेप
निडिल होल्डर
शार्प सीजर
इंस्ट्रूमेंट एवं किडनी ट्रे
कैची
सर्जिकल ब्लेड
----
सर्जन की राय
ओटी के उपकरणों को स्टरलाइज करने के लिए हाई टेंपरेचर के साथ हाईप्रेशर भी होना चाहिए, जो आटोक्लेव में होता है। ब्वायलर भी इसमें पूरी तरह उपयोगी नहीं होता है। जीवित चीजों के संपर्क से दूर होने पर धीरे-धीरे बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, लेकिन बिना स्टरलाइजेशन के उपकरणों का उपयोग होने पर संक्रमण की आशंका होती है। इमरजेंसी में आटोक्लेव के साथ 2 -3 ड्रम उपकरण होने चाहिए ताकि जो सेट उपयोग में लाया जाए, उसे नीट एंड क्लीन कर दिया जाए।

-डॉ. एसके मिश्र, जनरल सर्जन
-------
इमरजेंसी की सुविधाएं बेहतर करने के लिए दस डॉक्टरों की टीम बनाई गई है। टीम की रिपोर्ट आते ही सुविधाएं अच्छी की जाएंगी। उपकरणों को स्टरलाइज करने की व्यवस्था जल्द ही की जाएगी।
-डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed