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मठ विवाद : अखाड़ा से निकाले गए स्वामी अभयानंद

Wed, 18 Feb 2026 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Wed, 18 Feb 2026 12:54 AM IST
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Math dispute: Swami Abhayananda expelled from Akhara
चनुकी। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के कनखल आश्रम के साधु स्वामी अभयानंद गिरी देवाश्रम मठ लार के महंत बनाए गए थे। महंत पद के विवाद के बीच कनखल आश्रम ने एक पत्र जारी कर स्वामी भगवान गिरी को इस बात की सूचना दी कि स्वामी अभयानंद गिरी को महंत पद से निष्कासित किया जा रहा है। कनखल आश्रम के पंच की तरफ से जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अभयानंद गिरी का आचरण ठीक नहीं होने के चलते उन्हें महंत पद से निष्कासित किया गया।
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लार के जमींदार घरानों की दान की गई जमीन पर बना है देवाश्रम मठ लार

प्रबंध समिति के आजीवन सदस्य व पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीराम सिंह ने बताया कि लार के क्षत्रिय समाज के पूर्वजों ने सैकड़ों साल पहले अपनी जमीन देवाश्रम मठ लार को दान में दी थी। उक्त भूमि के लगभग दस एकड़ भूमि में शिक्षण संस्थान चलते हैं। शेष भूमि पर खेती होती है।
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काफी पुराना है देवाश्रम मठ लार का गौरवशाली इतिहास
18वीं शताब्दी में बंगाल के मालदह जिला के भोला हाट महंत लंवगनाथ गिरी के शिष्य मौनी बाबा तीर्थाटन करने प्रयागराज आए और वहां से वाराणसी आकर रहने लगे। कुछ दिन बाद मौनी बाबा लार पहुंच गए। उन्हें लार के क्षत्रिय समाज के लोगों ने मठ का महंत बना दिया। मौनी बाबा के बाद क्रमशः शिवनाथ गिरी, सेवा गिरी, फुलगिरी, बलिराम, रामगोविंद, देवानंदगिरी, चंद्रशेखर गिरी महंत बने। चंद्रशेखर गिरी महराज ने महंत रहते इस मठ को निर्वाणी अखाड़ा प्रयागराज ट्रस्ट में समाहित कर दिया। चंद्रशेखर गिरी के देहावसान के बाद अखाड़ा से भगवान गिरी को महंत बनाया गया। महंत भगवान गिरी जब अस्वस्थ होने लगे तो उन्होंने अभयानंद गिरी को मठ का कार्यभार सौंप दिया। पीजी कॉलेज लार प्रबंध तंत्र के सदस्यों के अनुसार वर्तमान में विवाद होने की जानकारी भगवान गिरी को हुई तो उन्होंने मठ के महंत अभयानंद गिरी को हटाने के लिए एक पत्र जिलाधिकारी को दिया और रविंद्र गिरी तथा रामगिरी को अपना प्रतिनिधि भेजा। महंत पद से हटाए जाने की जानकारी होते ही महंत अभयानंद गिरी गेट पर ताला बंद कर कहीं चले गए। इधर, डीएम के आदेश के क्रम में तहसीलदार अलका सिंह मौके का जायजा लेने पहुंचीं तो गेट के अंदर पहले से मौजूद वर्तमान महंत के समर्थक भगवान गिरी के पत्र को फर्जी बताकर तहसील प्रशासन वापस जाने को कह दिया। महंत स्वामी भगवान गिरी द्वारा अपना अधिकार वापस लेने और कनखल आश्रम द्वारा स्वामी अभयानंद गिरी को महंत पद से निष्कासित करने के बाद यह मामला और पेचीदा हो गया है। स्वामी अभयानंद मठ के गेट पर ताला लगाकर गायब हैं। उधर, स्वामी भगवान गिरी के समर्थक उन्हें लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की तैयारी कर रहे हैं।
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