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Deoria News: खुलेआम घूम रहे कई हत्यारोपी, पीड़ित खौफ में जीने को मजबूर
Wed, 26 Mar 2025 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 26 Mar 2025 12:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। बरवां उपाध्याय गांव में करीब डेढ़ माह पहले हुई लोम हर्षक वारदात ने ग्रामीणों को दहला कर रख दिया था। वैश्य समाज भी मामूली बात पर हुई दो हत्याओं को लेकर आक्रोशित हो उठा था।
गांव में तनाव बढ़ने लगा था। फिर समाज के लोगों ने मामले को सीएम तक पहुंचाया। इसके बाद पुलिस ने वारदात में शामिल गांव के एक ही परिवार के पांच हत्यारोपियों समेत छह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
तब जाकर कुछ हद तक मामला शांत हुआ। हालांकि, फिर भी मृतक के परिजन और ग्रामीण पुलिस की कार्रवाई से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि वारदात को झुंड के साथ मिलकर अंजाम दिया गया। बावजूद इसके अन्य हत्यारोपी खुलेआम घूम रहे है। ऐसे में ग्रामीण पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रही हैं। खुखुंदू क्षेत्र के बरवां उपाध्याय गांव में छह फरवरी की रात में बाइक तेज चलाने से मना करने पर राम गणेश यादव, उसके बेटे मनीष यादव, मुकेश यादव, विनय यादव, विशाल यादव सहित अन्य ने मिलकर गांव निवासी दिनेश गुप्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। तारकेश्वर गुप्ता समेत अन्य कई ग्रामीण घायल हो गए थे। 12 फरवरी घायल तारकेश्वर गुप्ता की भी मौत हो गई थी।
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वारदात से बौखलाए समाज के अगुवा सीएम दरबार पहुंच गए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने राम गणेश, विनय यादव, विशाल यादव, मनीष यादव, मुकेश यादव और अनिल यादव निवासी पोखर भिंडा थाना रामपुर कारखाना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गिरफ्तारी के दौरान मुकेश मेडिकल कराने ले जाते समय भागने का भी प्रयास किया था। इस पर पुलिस ने उसके एक पैर में गोली मारी थी।
इधर, मंगलवार को जब बरवां गांव पहुंच दिनेश गुप्ता की पत्नी आशा देवी, तारकेश्वर गुप्ता की मां सुशीला देवी, पत्नी लक्ष्मी देवी और बड़े बेटे विवेक गुप्ता से बात की गई तो उनका दर्द छलक आया। पीड़ितों ने बताया कि घटना की रात हमलावरों ने भयमुक्त होकर झुंड के साथ हमला बोला और बेरहमी से पीटकर मौत के घाट उतार दिया। उसी दौरान और बीच में भी कई बार मुख्य हत्यारोपियों समेत 20-25 अन्य हत्यारों का नाम पुलिस को लिखित रूप में दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे। लेकिन पुलिस ने सिर्फ 6 लोगों को ही गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
उनका कहना है कि अभी भी मुख्य तीन चार हत्यारोपियों समेत अन्य हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा भी था तो बाद में छोड़ दिया।
विवेक ने बताया कि पुलिस पता नहीं क्यों अन्य हत्यारोपियों की गिरफ्तारी करने से कतरा रही है। जबकि पुलिस को बकायदे सूचीबद्ध तरीके से हत्यारोपियों की लिस्ट भी सौंपी जा चुकी है। उसने कहा कि बीते 21 मार्च को जेल गए हत्यारोपियों की जमानत की तारीख थी, मगर खारिज हो गई। खुखुंदू क एसओ दिग्विजय सिंह ने बताया कि घटना के समय ही तीन-चार बार तहरीर मिली थी। कभी 20-22 तो कभी 25 लोगों के और शामिल होने का जिक्र किया गया है। दोनों पीड़ित परिवारों से पूछताछ कर साक्ष्य एकत्र कि जा रहे हैं। अब तक जिनके खिलाफ साक्ष्य मिला है उसे गिरफ्तार किया चुका है। आगे भी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी।
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खुखुंदू। बरवां उपाध्याय गांव में करीब डेढ़ माह पहले हुई लोम हर्षक वारदात ने ग्रामीणों को दहला कर रख दिया था। वैश्य समाज भी मामूली बात पर हुई दो हत्याओं को लेकर आक्रोशित हो उठा था।
गांव में तनाव बढ़ने लगा था। फिर समाज के लोगों ने मामले को सीएम तक पहुंचाया। इसके बाद पुलिस ने वारदात में शामिल गांव के एक ही परिवार के पांच हत्यारोपियों समेत छह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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तब जाकर कुछ हद तक मामला शांत हुआ। हालांकि, फिर भी मृतक के परिजन और ग्रामीण पुलिस की कार्रवाई से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि वारदात को झुंड के साथ मिलकर अंजाम दिया गया। बावजूद इसके अन्य हत्यारोपी खुलेआम घूम रहे है। ऐसे में ग्रामीण पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रही हैं। खुखुंदू क्षेत्र के बरवां उपाध्याय गांव में छह फरवरी की रात में बाइक तेज चलाने से मना करने पर राम गणेश यादव, उसके बेटे मनीष यादव, मुकेश यादव, विनय यादव, विशाल यादव सहित अन्य ने मिलकर गांव निवासी दिनेश गुप्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। तारकेश्वर गुप्ता समेत अन्य कई ग्रामीण घायल हो गए थे। 12 फरवरी घायल तारकेश्वर गुप्ता की भी मौत हो गई थी।
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वारदात से बौखलाए समाज के अगुवा सीएम दरबार पहुंच गए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने राम गणेश, विनय यादव, विशाल यादव, मनीष यादव, मुकेश यादव और अनिल यादव निवासी पोखर भिंडा थाना रामपुर कारखाना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गिरफ्तारी के दौरान मुकेश मेडिकल कराने ले जाते समय भागने का भी प्रयास किया था। इस पर पुलिस ने उसके एक पैर में गोली मारी थी।
इधर, मंगलवार को जब बरवां गांव पहुंच दिनेश गुप्ता की पत्नी आशा देवी, तारकेश्वर गुप्ता की मां सुशीला देवी, पत्नी लक्ष्मी देवी और बड़े बेटे विवेक गुप्ता से बात की गई तो उनका दर्द छलक आया। पीड़ितों ने बताया कि घटना की रात हमलावरों ने भयमुक्त होकर झुंड के साथ हमला बोला और बेरहमी से पीटकर मौत के घाट उतार दिया। उसी दौरान और बीच में भी कई बार मुख्य हत्यारोपियों समेत 20-25 अन्य हत्यारों का नाम पुलिस को लिखित रूप में दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे। लेकिन पुलिस ने सिर्फ 6 लोगों को ही गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
उनका कहना है कि अभी भी मुख्य तीन चार हत्यारोपियों समेत अन्य हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा भी था तो बाद में छोड़ दिया।
विवेक ने बताया कि पुलिस पता नहीं क्यों अन्य हत्यारोपियों की गिरफ्तारी करने से कतरा रही है। जबकि पुलिस को बकायदे सूचीबद्ध तरीके से हत्यारोपियों की लिस्ट भी सौंपी जा चुकी है। उसने कहा कि बीते 21 मार्च को जेल गए हत्यारोपियों की जमानत की तारीख थी, मगर खारिज हो गई। खुखुंदू क एसओ दिग्विजय सिंह ने बताया कि घटना के समय ही तीन-चार बार तहरीर मिली थी। कभी 20-22 तो कभी 25 लोगों के और शामिल होने का जिक्र किया गया है। दोनों पीड़ित परिवारों से पूछताछ कर साक्ष्य एकत्र कि जा रहे हैं। अब तक जिनके खिलाफ साक्ष्य मिला है उसे गिरफ्तार किया चुका है। आगे भी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी।