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Deoria News: गजेटियर में राप्ती नदी किनारे 900 एकड़ जंगल पर भू-माफिया ने किया कब्जा

Sun, 23 Jul 2023 11:20 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jul 2023 11:20 PM IST
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Land mafia encroached upon 900 acres of forest on the banks of Rapti river in Gazetteer
मौके पर बचा एक एकड़, डीएम ने देखा तो टीम गठित कर जंगल की तलाश करने का निर्देश दिया
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संवाद न्यूज एजेंसी



देवरिया। जिले के गजेटियर में रुद्रपुर राप्ती नदी किनारे 900 एकड़ में जंगल कागज में है। इस बारे में जिलाधिकारी ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि पूरे जंगल पर भू-माफिया ने कब्जा कर लिया है। मौके पर महज एक एकड़ जंगल बचा हुआ है। इस पर डीएम ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए जंगल की तलाश के लिए राजस्व कर्मियों को निर्देश दिया है। इसे लेकर भू-माफिया में हड़कंप मच गया है।

कुछ दिन पहले शासन ने निर्देश दिया था कि सरकारी भूमि से कब्जा हटा कर सुरक्षित किया जाए। इस पर डीएम ने जिले के गजेटियर को देखा तो कई जगहों पर एक मुश्त सरकारी जमीन मिली। इसमें रुद्रपुर तहसील के राप्ती नदी किनारे राजस्व अभिलेख में नौ सौ एकड़ का बड़ा वन क्षेत्र अंकित है। पर हकीकत तो यह है धीरे-धीरे भू-माफिया ने सरकारी जमीन पर कब्जा जमा लिया है। यहां लगे पेड़ोंं को काटकर जेब भर लिया और अधिकारी लापरवाह बने रहे। वन विभाग को इस वृहद वन क्षेत्र पर कागजों में नाज है। पर मौके पर कभी मुड़कर कोई गया नहीं है। अब सवाल खड़ा होता है कि इतने बड़े वन क्षेत्र पर कई दशक से कब्जा होता रहा और किसी ने सुधि नहीं ली। यहां तक कि अब प्रशासन को भी पता नहीं है कि आखिर 900 एकड़ का जंगल कहां चला गया। इसे लेकर डीएम ने राजस्वकर्मियों को जब मौके पर भेजकर जानकारी जुटाई तो पता चला कि केवल एक एकड़ भूमि ही मौके पर जंगल के रूप में है। इसे लेकर अफसर भी सोचने को मजबूर हैं कि आखिर किसकी शह पर जंगल काटकर जमीन पर कब्जे का खेल चलता रहा है। जबकि दूसरी तरफ हर साल शासन को वन क्षेत्र के बारे में वन विभाग सूचना देता रहा कि राप्ती के तट पर वृहद वन क्षेत्र मौजूद है। इस गंभीर मामले पर किसी भी आला अफसर की नजर अब तक नहीं पड़ी।
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भू-माफिया सूची बनाने में बड़ी चूक

करीब दो साल पहले जिले में 28 भू-माफिया की सूची तैयार की गई थी। पर सूची से इत्तर भू-माफिया सैकड़ों एकड़ भूमि पर कब्जा करते रहे। इतना ही नहीं, कर्मचारियों की मिलीभगत से अपने नाम भी कराते गए। खामियों से भरी इस सूची में बड़े माफिया छूट गए और खलिहान जैसी भूमि और तालाब पर कब्जा करने वाले लोग ही भू-माफिया बन कर रह गए है।


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केस एक

बरहज तहसील के सरयू नदी के उस पार जिले के छह राजस्व गांव हैं। यहां गोरखपुर, देवरिया, मऊ जिले के तीन हजार किसानों की तकरीबन 4650 एकड़ भूमि पर भू-माफिया का कब्जा है। इसमें 1650 एकड़ भूमि सरकारी है। प्रशासन इस भूमि पर कब्जा नहीं कर पाता है, क्योंकि उसे पता ही नहीं है कि उसकी भूमि और निजी कहा है। सामाजिक कार्यकर्ता अजय प्रताप सिंह ने शासन में शिकायत की तो वर्ष 2000 में प्रमुख सचिव के आदेश पर राजा टोडरमल प्रशिक्षण संस्थान हरदोई ने दियारा की 1650 एकड़ भूमि की पैमाइश कर पत्थर गाड़ा था। पर कुछ समय बाद माफियाओं ने निशान को मिटा दिया और आला अफसर भी इसकी सुधि नहीं लिया है।



केस दो-

रुद्रपुर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सीलिंग की भूमि के मामले में वर्ष 2017 से लंबित रिकॉल आवेदन में भी निर्णय पारित करने का निर्देश डीएम ने दी तो जांच में पता चला कि ग्राम जंगल तरैनी में 35.18 एकड़, परसा जोकहा में 0.66 एकड़ भूमि 13 जनवरी 1989 को सरकारी घोषित हुई थी। इसके अलावा भी तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों के 7.30 एकड़ से अधिक भूमि सीलिंग के तहत निकली थी। अफसरों की मिलीभगत से जमीन को भू माफियों के नाम दर्ज कर दिया गया।

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केस तीन

सलेमपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम मझौली में सीलिंग में अतिरिक्त घोषित हुई भूमि का क्रय-विक्रय किया गया है। इतना ही नहीं मुख्य राजस्व अधिकारी ने तहसीलदार को यह भी बताया है कि इस मामले में न्यायालय का स्थगन आदेश है। इसके बावजूद भी सीलिंग की भूमि का नामांतरण किया गया है। इसमें सिलिंग की भूमि के अलावा श्मशान की भूमि को भी अपने नाम करा लिया गया है।



कोट

राप्ती नदी के किनारे 900 एकड़ का जंगल होना कागज में है। इसकी जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि महज एक एकड़ जंगल मौजूद है। जंगल की तलाश कराई जा रही है। सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कारवाई की जाएगी।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम
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