फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   investigation

सात के बजाय 70 दिन में भी जांच अधूरी

Mon, 13 Sep 2021 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Sep 2021 11:27 PM IST
विज्ञापन
investigation
सात के बजाय 70 दिन में भी जांच अधूरी
विज्ञापन

विकास के नाम पर प्रशासकों द्वारा 33.16 करोड़ निकालने का मामला, जांच में बरहज ब्लॉक के एक गांव में पांच लाख की गड़बड़ी आ चुकी है सामने
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर प्रशासकों द्वारा निकाले गए 33.16 करोड़ की जांच रफ्तार मंद है। जुलाई की शुरूआत में दी गई जांच 70 दिन बाद भी अधूरी है। यह हाल तब है जब इसे पूरा करने के लिए डीएम द्वारा सात दिन का समय अलग-अलग जांच अधिकारियों को दिया था। बरहज विकास खंड के एक गांव की पूरी हुई जांच में तकरीबन पांच लाख से अधिक की गड़बड़ी का मामला उजागर हो चुका है। सूत्राें के अनुसार, पोल न खुलने के चलते पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है।
जिले के 16 विकास खंडों की 1185 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों ने 25 दिसंबर 2020 से 25 मई 2021 के बीच तकरीबन 33 करोड़ 16 लाख 58 हजार से अधिक की धनराशि निकाल ली। विकास के नाम पर धन निकाले जाने में मानकों की खूब अनदेखी की गई।
विज्ञापन

विभागीय सूत्रों की मानें तो रिबोर, मरम्मत, नि:शुल्क बोरिंग, फागिंग मशीन, आरओ आदि के नाम पर कागजी कोरम पूरा कर करोड़ों का गोलमाल किया गया। कहीं बिना टेंडर प्रक्रिया के कार्य कराकर भुगतान कर दिया गया तो कहीं फर्जी फर्म बनवाकर उसके खाते में लाखों रुपये के चेक के माध्यम से भुगतान कर दिया गया। ब्लॉकों में जीएसटी की चोरी में भी खेल किया गया। बिना कार्य कराए ही भुगतान करने के कई मामले सामने आए तो अमर उजाला ने जून के अंत में खबर प्रकाशित की।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम आशुतोष निरंजन ने लार, बरहज, गौरीबाजार विकास खंड की जांच के लिए अलग-अलग अधिकारियों की तीन टीमें गठित की। इसमें गौरीबाजार की जांच मुख्य राजस्व अधिकारी को सौंपी गई। सबसे अधिक गड़बड़ी की बात इसी विकास खंड में सामने आई थी। बरहज की तत्कालीन खंड विकास अधिकारी को जांच की भनक लगी तो घबराकर वह लंबी छुट्टी लेकर चले गए। बरहज के एक गांव की जांच एसडीएम, डीपीआरओ की संयुक्त टीम ने की तो तकरीबन पांच लाख की गड़बड़ी उजागर हुई। इसके बाद अन्य 30 से अधिक गांवों की जांच का अब तक पता नहीं है। सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले में विकास विभाग के अधिकारियों के दामन पर दाग लग न जाए इसलिए पूरे मामले का दबा दिया गया। डीएम आशुतोष निरंजन ने बताया कि पूरे मामले की मॉनिटरिंग सीडीओ को सौंपी गई है।
...तो जिले का सबसे बड़ा घोटाला होगा साबित
पांच माह में प्रशासकों द्वारा 33 करोड़ 16 लाख रुपये विकास के नाम पर निकासी की गई। इसकी पूरे जिले की जांच करा लिया जाए तो संभवत: यह सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा। इतने बड़े घोटाले की भनक मिलने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की चुप्पी समझ से परे है। सही से जांच हो तो इसमें कई विकास विभाग के अफसर भ्रष्टाचार के मामले में जेल तक जाना पड़ सकता है। विकास के नाम पर आनन-फानन में निकाली गई इस धनराशि की गड़बड़ी का मामला जांच के नाम पर फाइलों में दबा दिया गया। लार और गौरीबाजार के एक भी गांवों की जांच नहीं हुई। इसे लेकर तरह - तरह की चर्चाएं है।
गौरीबाजार विकास खंड में प्रशासक द्वारा करोड़ों रुपये विकास के नाम पर निकाले जाने के मामले की जांच डीएम ने मुझे दी है। मेरे सहयोग में दो अन्य अधिकारी है। जल्द ही जांच कार्य पूर्ण कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी।

- अमृतलाल बिंद, मुख्य राजस्व अधिकारी
मामला मेरे संज्ञान में आया है। मुझे आए हुए अभी एक माह भी पूरा नहीं हुआ। पूरे मामले को पता कराता हूं। गड़बड़ी की बात सामने आई तो जिले के सभी विकास खंडों के प्रशासकों द्वारा कराएं गए कार्यों व भुगतान की जांच कराई जाएगी।
- रवींद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed