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Deoria News: दरोगा अजय के पिता ने जांच पर उठाए सवाल
Tue, 10 Mar 2026 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 10 Mar 2026 12:34 AM IST
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देवरिया। शहर से सटे मुंडाडीह निवासी और बस्ती जिले के परसरामपुर थाने में तैनात दरोगा अजय कुमार गौड़ की मौत को पुलिस भले ही नदी में डूबने से हुई मौत मान रही है, लेकिन उनके पिता रामचंद्र गौड़ इस जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं।
उनका कहना है कि यह जांच रिपोर्ट नहीं बल्कि असल दोषी को बचाने के लिए पुलिस की मनगढ़ंत कहानी है। पिता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में पोस्टमार्टम और डायटम रिपोर्ट में भारी विरोधाभास का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की गुहार लगाई है। आरोप है कि ऑन-ड्यूटी लापता हुए पुलिस अधिकारी के शरीर पर चोट के निशान थे, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। दरोगा अजय कुमार गौड़ पांच फरवरी की शाम को ड्यूटी के दौरान अचानक लापता हो गए थे। तीन दिन बाद आठ फरवरी को छावनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत सरयू नदी में शव मिला था।
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मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अजय गौड़ के पिता ने दावा किया है कि मोबाइल से ली गई तस्वीरों में मृतक के गले, नाक, होंठ और ठोढी पर गंभीर चोट के निशान थे और एक हाथ भी टूटा हुआ प्रतीत हो रहा था। पिता ने पोस्टमार्टम और डायटम रिपोर्ट में विरोधाभास पर हैरानी जताते हुए लिखा है कि पहले बताया गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के फेफड़ों में नदी का पानी या रेत का कोई अंश नहीं पाया गया, जो आमतौर पर डूबने वाली मौतों में देखा जाता है।
इसके बाद डायटम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘डूबना’ बताया जा रहा है। इसीलिए पुलिस की थ्योरी पर संदेह है। चार दिन तक पानी में रहने के बावजूद शव की त्वचा खराब नहीं हुई थी, जो वैज्ञानिक दृष्टि से संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस के उच्चाधिकारी इस मामले में भ्रामक तथ्य पेश कर रहे हैं।
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उनका कहना है कि यह जांच रिपोर्ट नहीं बल्कि असल दोषी को बचाने के लिए पुलिस की मनगढ़ंत कहानी है। पिता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में पोस्टमार्टम और डायटम रिपोर्ट में भारी विरोधाभास का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की गुहार लगाई है। आरोप है कि ऑन-ड्यूटी लापता हुए पुलिस अधिकारी के शरीर पर चोट के निशान थे, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। दरोगा अजय कुमार गौड़ पांच फरवरी की शाम को ड्यूटी के दौरान अचानक लापता हो गए थे। तीन दिन बाद आठ फरवरी को छावनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत सरयू नदी में शव मिला था।
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मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में अजय गौड़ के पिता ने दावा किया है कि मोबाइल से ली गई तस्वीरों में मृतक के गले, नाक, होंठ और ठोढी पर गंभीर चोट के निशान थे और एक हाथ भी टूटा हुआ प्रतीत हो रहा था। पिता ने पोस्टमार्टम और डायटम रिपोर्ट में विरोधाभास पर हैरानी जताते हुए लिखा है कि पहले बताया गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के फेफड़ों में नदी का पानी या रेत का कोई अंश नहीं पाया गया, जो आमतौर पर डूबने वाली मौतों में देखा जाता है।
इसके बाद डायटम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘डूबना’ बताया जा रहा है। इसीलिए पुलिस की थ्योरी पर संदेह है। चार दिन तक पानी में रहने के बावजूद शव की त्वचा खराब नहीं हुई थी, जो वैज्ञानिक दृष्टि से संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस के उच्चाधिकारी इस मामले में भ्रामक तथ्य पेश कर रहे हैं।