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Deoria News: पथरी के बढ़े मरीज...महिलाएं अधिक पीड़ित
Thu, 04 Dec 2025 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 04 Dec 2025 11:57 PM IST
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महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज के सर्जरी विभाग की ओपीडी में मरीज देखते डॉक्टर, फोटो: संवाद
देवरिया। पथरी की बीमारी अब आम बात हो गई है। किडनी और गाल ब्लेडर में पथरी के मरीज बढ़ गए हैं। हालात यह है कि शुगर बीपी की तरह हर तीसरे घर में पथरी के मरीज मिलने लगे हैं।
इसमें फाइव एफ फैक्टर वाले लोगों में इसकी संभावना अधिक है। लोग सर्जरी कराने की जगह दर्द निवारक गोलियां खाकर काम चला रहे हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज के मेडिसीन विभाग में डॉक्टर निखिलेश मिश्र बताते हैं कि पथरी की बीमारी अब आम बात हो गई है। देवरिया और आसपास में इसके मरीज अधिक मिलते हैं।
देखने में आया है कि पथरी की बीमारी महिलाओं में अधिक मिल रही है। मेडिकल रिसर्च में आया है कि फाइव एफ वाले फैक्टर वाली महिलाओं में पथरी के मामले अधिक मिल रहे हैं।
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वहीं मेडिकल काॅलेज में सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मानवेंद्र कुमार ने बताया कि फीमेल, फेयरी, फैटी, फर्टी और फास्टिंग यह पांच फैक्टर हैं, जो पथरी वाले रोगियों में कामन मिल रहे हैं। 40 वर्ष पार मोटी, गोरी और अनियमित भोजन करने वाली महिलाओं में पथरी के मामले अधिक मिल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में 15-16 मरीज पथरी की शिकायत वाले आते हैं। इसमें फाइव एफ फैक्टर वाले अधिक होते हैं।
डॉ. मानवेंद्र ने बताया कि अन्य लोगों में भी पथरी के मरीज मिलते हैं, पर फाइव एफ वाले अधिक मिलते हैं।
हालांकि यह जरूरी नहीं है कि 5एफ में पथरी हो ही। उन्होंने बताया कि पथरी हो जाने पर सर्जरी ही विकल्प है। खासतौर से गाल ब्लेडर की पथरी के केस में इसे निकालना पड़ता है।
मेडिकल काॅलेज में प्रतिदिन दो से तीन सर्जरी पथरी केस वाली होती है। मेडिकल काॅलेज में ओपन सर्जरी के माध्यम से इसे निकाला जाता है।
पथरी से बचाव के लिए समय से भोजन करना बहुत आवश्यक है। पर्याप्त पानी पीएं।
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इसमें फाइव एफ फैक्टर वाले लोगों में इसकी संभावना अधिक है। लोग सर्जरी कराने की जगह दर्द निवारक गोलियां खाकर काम चला रहे हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज के मेडिसीन विभाग में डॉक्टर निखिलेश मिश्र बताते हैं कि पथरी की बीमारी अब आम बात हो गई है। देवरिया और आसपास में इसके मरीज अधिक मिलते हैं।
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देखने में आया है कि पथरी की बीमारी महिलाओं में अधिक मिल रही है। मेडिकल रिसर्च में आया है कि फाइव एफ वाले फैक्टर वाली महिलाओं में पथरी के मामले अधिक मिल रहे हैं।
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वहीं मेडिकल काॅलेज में सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मानवेंद्र कुमार ने बताया कि फीमेल, फेयरी, फैटी, फर्टी और फास्टिंग यह पांच फैक्टर हैं, जो पथरी वाले रोगियों में कामन मिल रहे हैं। 40 वर्ष पार मोटी, गोरी और अनियमित भोजन करने वाली महिलाओं में पथरी के मामले अधिक मिल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में 15-16 मरीज पथरी की शिकायत वाले आते हैं। इसमें फाइव एफ फैक्टर वाले अधिक होते हैं।
डॉ. मानवेंद्र ने बताया कि अन्य लोगों में भी पथरी के मरीज मिलते हैं, पर फाइव एफ वाले अधिक मिलते हैं।
हालांकि यह जरूरी नहीं है कि 5एफ में पथरी हो ही। उन्होंने बताया कि पथरी हो जाने पर सर्जरी ही विकल्प है। खासतौर से गाल ब्लेडर की पथरी के केस में इसे निकालना पड़ता है।
मेडिकल काॅलेज में प्रतिदिन दो से तीन सर्जरी पथरी केस वाली होती है। मेडिकल काॅलेज में ओपन सर्जरी के माध्यम से इसे निकाला जाता है।
पथरी से बचाव के लिए समय से भोजन करना बहुत आवश्यक है। पर्याप्त पानी पीएं।