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श्रावणी पर्व: सरयू में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
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श्रावणी पर्व: सरयू में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
बरहज। रक्षाबंधन पर्व और श्रावण पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई। मान्यता है कि श्रावणी स्नान पर्व पर 10 चीजों के साथ स्नान करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। जबकि रोग आदि का नाश और पूर्णदायी फल की प्राप्ति होती है।
रविवार को सरयू नदी में परमहंसानंत संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य विश्राम शुक्ल के नेतृत्व में आचार्यों और वेदपाठियों, जबकि दूर-दराज से आए लोगों ने स्नान-दान किया। विद्वानों ने मिट्टी, गाय का गोबर, दूध, घी, पंचगव्य, भस्म, अपामार्ग, कुशा, दूर्वा, शहद, गंगाजल आदि के साथ स्नान किया। जबकि अनंत आश्रम में पीठाधीश्वर आंजनेय दास के देखरेख में अरुंधती सहित सप्त ऋषियों का पूजा-अर्चन किया गया। विद्वानों का कहना था कि शास्त्रों में कहा गया है कि श्रावणी स्नान से शारीरिक शुद्धि के साथ पापों से मुक्ति, वहीं पूजा-अर्चन से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से सुख-शांति, धन-वैभव की प्राप्ति होती है। मौके पर प्राचार्य गोविंद दत्त शुक्ल, कृष्णमुरारी त्रिपाठी, परशुराम पांडेय, श्रीनिवास पांडेय, चंदन पांडेय, पंकज त्रिपाठी, संपूर्णानंद मिश्र, राकेश त्रिपाठी, वरुणेंद्र मिश्र, रामदेव तिवारी, ओमप्रकाश दूबे, हरिशंकर पांडेय, दयाशंकर, अमित पांडेय आदि मौजूद रहे।
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बरहज। रक्षाबंधन पर्व और श्रावण पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई। मान्यता है कि श्रावणी स्नान पर्व पर 10 चीजों के साथ स्नान करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। जबकि रोग आदि का नाश और पूर्णदायी फल की प्राप्ति होती है।
रविवार को सरयू नदी में परमहंसानंत संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य विश्राम शुक्ल के नेतृत्व में आचार्यों और वेदपाठियों, जबकि दूर-दराज से आए लोगों ने स्नान-दान किया। विद्वानों ने मिट्टी, गाय का गोबर, दूध, घी, पंचगव्य, भस्म, अपामार्ग, कुशा, दूर्वा, शहद, गंगाजल आदि के साथ स्नान किया। जबकि अनंत आश्रम में पीठाधीश्वर आंजनेय दास के देखरेख में अरुंधती सहित सप्त ऋषियों का पूजा-अर्चन किया गया। विद्वानों का कहना था कि शास्त्रों में कहा गया है कि श्रावणी स्नान से शारीरिक शुद्धि के साथ पापों से मुक्ति, वहीं पूजा-अर्चन से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से सुख-शांति, धन-वैभव की प्राप्ति होती है। मौके पर प्राचार्य गोविंद दत्त शुक्ल, कृष्णमुरारी त्रिपाठी, परशुराम पांडेय, श्रीनिवास पांडेय, चंदन पांडेय, पंकज त्रिपाठी, संपूर्णानंद मिश्र, राकेश त्रिपाठी, वरुणेंद्र मिश्र, रामदेव तिवारी, ओमप्रकाश दूबे, हरिशंकर पांडेय, दयाशंकर, अमित पांडेय आदि मौजूद रहे।
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