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यहां तो कागजों में टीबी के मरीज किए जाते हैं भर्ती
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देवरिया के जिला अस्पताल के टीबी एमडीआर कक्ष में धूल फांक रहे बेड।
- फोटो : DEORIA
यहां तो कागजों में टीबी मरीज किए जाते हैं भर्ती
देवरिया। टीबी के गंभीर रोगियों के सहूलियत के लिए जिला अस्पताल में चार बेड का डीआर टीबी सेंटर खोला गया। एमडीआर और एक्सडीआर मरीजों को भर्ती करने के बजाय सिर्फ दवा देकर लौटा दिया जा रहा है। कागजों में 153 एमडीआर रोगियों को भर्ती कर इलाज किया गया है, जबकि एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया है। चादर विहीन बेड पर धूल जमा हैं।
टीबी के गंभीर रोगियों को एमडीआर और एक्सडीआर की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मरीजों को इलाज के लिए गोरखपुर भेजा जाता था। कुछ माह पहले मरीजों की सहूलियत के लिए जिला अस्पताल में चार बेड का डीआर टीबी सेंटर खोला गया। टीबी स्वास्थ्य पारदर्शिक अंकित कुमार समेत दो कर्मचारियों की तैनाती है। दो स्टाफ नर्सों की तैनाती होनी है, लेकिन अब तक नहीं हुई है। जिले में टीबी के गंभीर रोगी 244 चिह्नित किए गए हैं। डीआर टीबी सेंटर पर आने वाले मरीजों को एक मिनट के लिए भी भर्ती नहीं कराया जाता है। कागजी खानापूर्ति को दवा देकर घर भेज दिया जाता है। इसका उदाहरण एमडीआर मरीजों के भर्ती करने के लिए बनाए गए वार्ड में लगे बिना चद्दर का बेड और उसपर जमी धूल है। अंकित कुमार ने बताया कि मरीज खुद भर्ती नहीं होना चाहते हैं। इसलिए दवा दिया जाता है। शौचालय और वार्ड के फर्श पर भी धूल जमा हैं। गंदगी का अंबार वार्ड में लगा है। ऐसे में टीबी के खात्मा पर कर्मचारियों की लापरवाही भारी पड़ रही है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर भी गंभीर नहीं है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार झां ने बताया कि स्टाफ नर्सों की तैनाती नहीं हुई है। इसलिए मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। गंभीर रोगी मिलने पर पूर्व की भांति उन्हें गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। वार्ड में सफाई रहनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
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देवरिया। टीबी के गंभीर रोगियों के सहूलियत के लिए जिला अस्पताल में चार बेड का डीआर टीबी सेंटर खोला गया। एमडीआर और एक्सडीआर मरीजों को भर्ती करने के बजाय सिर्फ दवा देकर लौटा दिया जा रहा है। कागजों में 153 एमडीआर रोगियों को भर्ती कर इलाज किया गया है, जबकि एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया है। चादर विहीन बेड पर धूल जमा हैं।
टीबी के गंभीर रोगियों को एमडीआर और एक्सडीआर की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मरीजों को इलाज के लिए गोरखपुर भेजा जाता था। कुछ माह पहले मरीजों की सहूलियत के लिए जिला अस्पताल में चार बेड का डीआर टीबी सेंटर खोला गया। टीबी स्वास्थ्य पारदर्शिक अंकित कुमार समेत दो कर्मचारियों की तैनाती है। दो स्टाफ नर्सों की तैनाती होनी है, लेकिन अब तक नहीं हुई है। जिले में टीबी के गंभीर रोगी 244 चिह्नित किए गए हैं। डीआर टीबी सेंटर पर आने वाले मरीजों को एक मिनट के लिए भी भर्ती नहीं कराया जाता है। कागजी खानापूर्ति को दवा देकर घर भेज दिया जाता है। इसका उदाहरण एमडीआर मरीजों के भर्ती करने के लिए बनाए गए वार्ड में लगे बिना चद्दर का बेड और उसपर जमी धूल है। अंकित कुमार ने बताया कि मरीज खुद भर्ती नहीं होना चाहते हैं। इसलिए दवा दिया जाता है। शौचालय और वार्ड के फर्श पर भी धूल जमा हैं। गंदगी का अंबार वार्ड में लगा है। ऐसे में टीबी के खात्मा पर कर्मचारियों की लापरवाही भारी पड़ रही है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर भी गंभीर नहीं है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार झां ने बताया कि स्टाफ नर्सों की तैनाती नहीं हुई है। इसलिए मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। गंभीर रोगी मिलने पर पूर्व की भांति उन्हें गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। वार्ड में सफाई रहनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
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