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Deoria News: यहां पर भी चढ़ावे का खेल, अभिलेखागार से रिकाॅर्ड पाना कठिन, कागजातों में हेरफेर कराना है आसान
Sat, 03 Jun 2023 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 03 Jun 2023 12:06 AM IST
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राजस्व अभिलेखागार से भूमि का रिकॉर्ड और मानचित्र के लिए लोगों को देने पड़ रहे पांच सौ रुपये, नहीं देने पर बनना पड़ रहा चकरघिन्नी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अभिलेखागार से भूमि का रिकाॅर्ड और मानचित्र पाना आसान नहीं है। यहां भी चढ़ावे का खेल कई वर्षां से चल रहा है। हालत यह है कि पांच से दस रुपये शुल्क पर मिलने वाले कागजातों के लिए अगर पांच सौ रुपये नहीं दिया तो रिकाॅर्ड के लिए कई दिनों तक चक्कर काटना पड़ेगा। पर कागजों में हेरफेर कराना विभागीय मिलीभगत से आसान है। इसका प्रमाण यह है कि कुछ मामलों में अभिलेखागार के कर्मचारियों पर जालसाजी का मुकदमा दर्ज हो चुका है।
नियमानुसार राजस्व अभिलेखागार से पुष्टिकृत मानचित्र, फाइनल नक्शा, पुरानी खतौनी सहित विभिन्न प्रकार के भूमि के रिकाॅर्ड पाने का आमजन को हक है, लेकिन सच तो यह है कि सीधे तौर लोगों को यह कागजात मिलना मुश्किल है। कचहरी में घुसते ही विभिन्न नामों से प्रचलित व्यक्तियों का सहारा लेना पड़ता है। इसके बाद सेटिंग का खेल शुरू हो जाता है। जैसा काम, वैसा दाम लगता है। रकम लेने के बाद जरूरतमंद को एक सप्ताह का समय दिया जाता है। इसके बाद उसे कागजात सौंप दिए जाते हैं। शुक्रवार को नक्शा बनवाने और पुरानी खतौनी का नकल निकलवाने आए बरियारपुर के बरईपार गांव के विश्नाथ ने कहा कि अभिलेखागार तक पहुंच रखने वाले एक बुजुर्ग ने बताया कि एक नक्शे की नकल का हम लोग पांच सौ रुपये लेते हैं और तीन से चार दिन में बन जाता है। उसने यह भी कहा कि वैसे तो पूरी जिंदगी भर नहीं बनेगा। एक व्यक्ति ने कहा कि अगर रुपये देंगे तो बाहर से ले जाकर कागजात की फोटो काॅपी भी करा देंगे। महज दो रुपये की फोटो काॅपी के बदले सौ रुपये की मांग की। आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन करीब पचास लोग विभिन्न कागजातों के लिए अभिलेखागार पहुंचते हैं। इसमें रोज तीन से चार लोगों को नक्शा मिल पाता है। इस कारण करीब 145 लोगों के आवश्यक कागजातों के मामले लंबित पड़े हुए हैं।
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कोट
जाति प्रमाणपत्र के लिए अभिलेख निकलवाना है। इसके लिए चार सौ रुपये दिया हूं। करीब पंद्रह दिनों से चक्कर काट रहा हूं, लेकिन अभी तक नहीं मिला है। परेशान होकर थक गया हूं।
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विक्की, दानोपुर
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कोट
करीब एक साल पहले नक्शा के लिए प्रार्थना दी हूं, लेकिन अभी तक नहीं मिला। अभिलेखागार से जानकारी मिली है कि गांव का नक्शा ही गायब हो गया है। इससे भूमि की नापी और सीमांकन नहीं पा रहा है।
प्रभावती पांडेय, सिलहटा
अभिलेखागार से कोई रिकार्ड सरकारी दर पर मिल ही नहीं सकता है। बिना चढ़ावा कोई काम नहीं होने वाला है। इसकी शिकायत हमने कई बार आला अफसरों से भी की है, लेकिन अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
उमेश मिश्र, अध्यक्ष जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
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कोट
- हमने अभिलेखागार के भ्रष्टाचार की शिकायत की। कई बार मुकदमे भी दर्ज हुए। गलत तरीके से कागजातों में हेरफेर करने का काम किया जाता रहा है। इस कारण जांच तो हुई, लेकिन लीपापोती हो गई। कई गांवों के नक्शा गायब हैं। इस कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बृज बांके तिवारी, पूर्व अध्यक्ष
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केस-एक
शहर के रामगुलाम टोला निवासी सुनील पाठक की तहरीर पर अभिलेखागार के कर्मचारी, लेखपाल सहित अन्य पर कुछ साल पहले मुकदमा दर्ज हुआ था। उन्होंने बताया कि कूटरचना कर उनके कागजातों में हेराफेरी कर दी गई है। मामले में एक व्यक्ति की भूमि पर दूसरे का नाम चढ़ा देने का आरोप था।
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केस-दो
दो वर्ष पहले 2021 में सदर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन लेखपाल, राजस्व अभिलेखागार के बाबू सहित अन्य पर धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। भाटपाररानी तहसील के सरया गांव निवासी निर्भय नारायण सिंह ने बताया था कि उनके खेत को फर्जी तरीके से दूसरे नाम दर्ज कर दिया गया था।
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केस-तीन
- 2015 में अभिलेखागार से गायब अभिलेखों के मामले में कुछ कर्मचारियों और अन्य पर सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें आरोप था कि कुछ लोगों की मिलीभगत से कागजातों में जमकर हेरफेर की गई है। इतना नहीं गांवों के नक्शे भी साजिश के तहत गायब कर दिए गए हैं।
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35 गांवों के नक्शे हो चुके हैं गायब, 293 के दीमक चाट गए
देवरिया। जिले के 2178 ग्रामों में 2258 भू-नक्शे हैं। शासन ने भू-नक्शों को डिजिटलाइज्ड करने की कवायद चार साल पहले शुरू की थी। यह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। 1898 गांवों के 1965 भू-नक्शे राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध हैं। इनको डिजिटलाइज्ड किया जा चुका है। देखरेख के अभाव में 293 गांवों के मानचित्र गंदे और कुछ के दीमक चाट जाने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। वहीं, 35 गांवों का नक्शा नहीं मिल रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार काफी समय पहले से अभिलेखागार में कुछ बाहरी लोगों की दखल होने के कारण कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़ा खेल किया गया है। इसका नतीजा इस समय ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। उनको अपने गांव का नक्शा लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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कोट:
- जिन गांवों के नक्शे नहीं, उसके लिए राजस्व परिषद को पत्र भेजा गया। नकल और मानचित्र के लिए सरकारी शुल्क है। इसके लिए कार्यालय के सामने ही साइन बोर्ड लगाया गया है। अगर कोई कर्मचारी रुपये मांगता है तो उसके खिलाफ शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
रजनीश राय,मुख्य राजस्व अधिकारी
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देवरिया। अभिलेखागार से भूमि का रिकाॅर्ड और मानचित्र पाना आसान नहीं है। यहां भी चढ़ावे का खेल कई वर्षां से चल रहा है। हालत यह है कि पांच से दस रुपये शुल्क पर मिलने वाले कागजातों के लिए अगर पांच सौ रुपये नहीं दिया तो रिकाॅर्ड के लिए कई दिनों तक चक्कर काटना पड़ेगा। पर कागजों में हेरफेर कराना विभागीय मिलीभगत से आसान है। इसका प्रमाण यह है कि कुछ मामलों में अभिलेखागार के कर्मचारियों पर जालसाजी का मुकदमा दर्ज हो चुका है।
नियमानुसार राजस्व अभिलेखागार से पुष्टिकृत मानचित्र, फाइनल नक्शा, पुरानी खतौनी सहित विभिन्न प्रकार के भूमि के रिकाॅर्ड पाने का आमजन को हक है, लेकिन सच तो यह है कि सीधे तौर लोगों को यह कागजात मिलना मुश्किल है। कचहरी में घुसते ही विभिन्न नामों से प्रचलित व्यक्तियों का सहारा लेना पड़ता है। इसके बाद सेटिंग का खेल शुरू हो जाता है। जैसा काम, वैसा दाम लगता है। रकम लेने के बाद जरूरतमंद को एक सप्ताह का समय दिया जाता है। इसके बाद उसे कागजात सौंप दिए जाते हैं। शुक्रवार को नक्शा बनवाने और पुरानी खतौनी का नकल निकलवाने आए बरियारपुर के बरईपार गांव के विश्नाथ ने कहा कि अभिलेखागार तक पहुंच रखने वाले एक बुजुर्ग ने बताया कि एक नक्शे की नकल का हम लोग पांच सौ रुपये लेते हैं और तीन से चार दिन में बन जाता है। उसने यह भी कहा कि वैसे तो पूरी जिंदगी भर नहीं बनेगा। एक व्यक्ति ने कहा कि अगर रुपये देंगे तो बाहर से ले जाकर कागजात की फोटो काॅपी भी करा देंगे। महज दो रुपये की फोटो काॅपी के बदले सौ रुपये की मांग की। आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन करीब पचास लोग विभिन्न कागजातों के लिए अभिलेखागार पहुंचते हैं। इसमें रोज तीन से चार लोगों को नक्शा मिल पाता है। इस कारण करीब 145 लोगों के आवश्यक कागजातों के मामले लंबित पड़े हुए हैं।
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जाति प्रमाणपत्र के लिए अभिलेख निकलवाना है। इसके लिए चार सौ रुपये दिया हूं। करीब पंद्रह दिनों से चक्कर काट रहा हूं, लेकिन अभी तक नहीं मिला है। परेशान होकर थक गया हूं।
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विक्की, दानोपुर
कोट
करीब एक साल पहले नक्शा के लिए प्रार्थना दी हूं, लेकिन अभी तक नहीं मिला। अभिलेखागार से जानकारी मिली है कि गांव का नक्शा ही गायब हो गया है। इससे भूमि की नापी और सीमांकन नहीं पा रहा है।
प्रभावती पांडेय, सिलहटा
अभिलेखागार से कोई रिकार्ड सरकारी दर पर मिल ही नहीं सकता है। बिना चढ़ावा कोई काम नहीं होने वाला है। इसकी शिकायत हमने कई बार आला अफसरों से भी की है, लेकिन अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
उमेश मिश्र, अध्यक्ष जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
कोट
- हमने अभिलेखागार के भ्रष्टाचार की शिकायत की। कई बार मुकदमे भी दर्ज हुए। गलत तरीके से कागजातों में हेरफेर करने का काम किया जाता रहा है। इस कारण जांच तो हुई, लेकिन लीपापोती हो गई। कई गांवों के नक्शा गायब हैं। इस कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बृज बांके तिवारी, पूर्व अध्यक्ष
केस-एक
शहर के रामगुलाम टोला निवासी सुनील पाठक की तहरीर पर अभिलेखागार के कर्मचारी, लेखपाल सहित अन्य पर कुछ साल पहले मुकदमा दर्ज हुआ था। उन्होंने बताया कि कूटरचना कर उनके कागजातों में हेराफेरी कर दी गई है। मामले में एक व्यक्ति की भूमि पर दूसरे का नाम चढ़ा देने का आरोप था।
केस-दो
दो वर्ष पहले 2021 में सदर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन लेखपाल, राजस्व अभिलेखागार के बाबू सहित अन्य पर धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। भाटपाररानी तहसील के सरया गांव निवासी निर्भय नारायण सिंह ने बताया था कि उनके खेत को फर्जी तरीके से दूसरे नाम दर्ज कर दिया गया था।
केस-तीन
- 2015 में अभिलेखागार से गायब अभिलेखों के मामले में कुछ कर्मचारियों और अन्य पर सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें आरोप था कि कुछ लोगों की मिलीभगत से कागजातों में जमकर हेरफेर की गई है। इतना नहीं गांवों के नक्शे भी साजिश के तहत गायब कर दिए गए हैं।
35 गांवों के नक्शे हो चुके हैं गायब, 293 के दीमक चाट गए
देवरिया। जिले के 2178 ग्रामों में 2258 भू-नक्शे हैं। शासन ने भू-नक्शों को डिजिटलाइज्ड करने की कवायद चार साल पहले शुरू की थी। यह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। 1898 गांवों के 1965 भू-नक्शे राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध हैं। इनको डिजिटलाइज्ड किया जा चुका है। देखरेख के अभाव में 293 गांवों के मानचित्र गंदे और कुछ के दीमक चाट जाने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। वहीं, 35 गांवों का नक्शा नहीं मिल रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार काफी समय पहले से अभिलेखागार में कुछ बाहरी लोगों की दखल होने के कारण कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़ा खेल किया गया है। इसका नतीजा इस समय ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। उनको अपने गांव का नक्शा लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कोट:
- जिन गांवों के नक्शे नहीं, उसके लिए राजस्व परिषद को पत्र भेजा गया। नकल और मानचित्र के लिए सरकारी शुल्क है। इसके लिए कार्यालय के सामने ही साइन बोर्ड लगाया गया है। अगर कोई कर्मचारी रुपये मांगता है तो उसके खिलाफ शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
रजनीश राय,मुख्य राजस्व अधिकारी