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Deoria News: जिले में साइबर ठगों का बढ़ता जाल, चुटकियाें में लगाई लाखों की चपत

Thu, 20 Aug 2026 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 20 Aug 2026 12:30 AM IST
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Growing network of cyber fraudsters in the district; swindled of lakhs in a jiffy.
देवरिया। जिले में साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। किसी को शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का लालच देकर फंसाया गया तो किसी को टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिये निवेश कराया गया। यूपीआई के माध्यम से बैंक खातों से सीधे रकम निकलने के मामले भी सामने आए हैं। पिछले एक साल के प्रमुख मामलों की रकम जोड़ने पर ठगी एक करोड़ रुपये से अधिक की बैठती है।
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सलेमपुर क्षेत्र के अहिरौली लाला निवासी सुजीत कुमार त्रिगुनायक से निवेश के नाम पर 14 लाख रुपये की ठगी की गई। अप्रैल 2026 में व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये शेयर बाजार में निवेश कराने के नाम पर करीब 42 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया।
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मई में हरैया लाला निवासी संतोष कुमार से ट्रेडिंग के नाम पर 7.70 लाख रुपये और भटनी क्षेत्र के जिगनी निवासी अभिषेक कुमार की पत्नी रेनू यादव से शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 4.29 लाख रुपये की ठगी की गई।
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पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों पर भी कार्रवाई की। अप्रैल में फर्जी कंपनी और म्यूल खातों से जुड़े नेटवर्क की जांच में नौ बैंक खातों से करीब 60 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया।
इन खातों को लेकर एनसीआरपी पोर्टल पर देश के अलग-अलग हिस्सों से 46 शिकायतें दर्ज थीं। जुलाई में सुरौली क्षेत्र के एक व्यापारी से हुई साइबर ठगी में पुलिस के प्रयास से 30 लाख रुपये वापस कराए गए।
सबसे नया मामला उमानगर निवासी स्वास्थ्य विभाग के लैब टेक्नीशियन दिनेश्वर मिश्र का है। 17 अगस्त को उनके पंजाब नेशनल बैंक खाते से दो बार 50-50 हजार रुपये और केनरा बैंक खाते से 1.46 लाख रुपये यूपीआई के जरिये निकल लिए गए। दोनों खातों से कुल 2.46 लाख रुपये निकाले गए।
इस मामले की शिकायत साइबर थाने में की गई है।
कभी निवेश का लालच, कभी अधिकारी बनकर डराते हैं साइबर ठग : ऑनलाइन ट्रेडिंग, फर्जी लिंक, यूपीआई और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को बना रहे निशाना देवरिया संवाद के अनुसार साइबर ठग लोगों को जाल में फंसाने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।
किसी को शेयर बाजार में कई गुना मुनाफे का लालच दिया जा रहा है तो किसी को टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़कर ऑनलाइन ट्रेडिंग कराई जा रही है।
बैंक खाते की केवाईसी बंद होने, पार्सल में आपत्तिजनक सामान मिलने, बिजली कनेक्शन कटने और क्रेडिट कार्ड बंद होने का डर दिखाकर भी लोगों से गोपनीय जानकारी ली जा रही है। इसके बाद ओटीपी, यूपीआई पिन या फर्जी लिंक के जरिये खाते से रकम निकाल ली जाती है।
साइबर ठगों का बड़ा हथियार लालच है। सोशल मीडिया पर घर बैठे कमाई, पार्ट टाइम नौकरी, ऑनलाइन टास्क और निवेश पर मोटा मुनाफा देने का दावा किया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम का फायदा देकर भरोसा जीता जाता है। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराई जाती है।
कई मामलों में मोबाइल पर फर्जी ट्रेडिंग एप या वेबसाइट दिखाई जाती है, जिसमें निवेश की रकम और मुनाफा बढ़ता नजर आता है मगर रुपये निकालने की कोशिश करते ही टैक्स, शुल्क या खाता खोलने के नाम पर और रकम मांगी जाती है।
दूसरा तरीका लोगों को डराने का है। ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक, कस्टम, दूरसंचार विभाग या दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन करते हैं। आधार कार्ड या मोबाइल नंबर का गलत इस्तेमाल होने, बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन या किसी आपराधिक मामले में नाम आने की बात कहकर डराया जाता है। वीडियो कॉल पर कथित पूछताछ कर पीड़ित को अलग कमरे में रहने और किसी से बात न करने को कहा जाता है।
इसके बाद गिरफ्तारी से बचाने या खाते की जांच के नाम पर रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर करा ली जाती है। इसके अलावा फर्जी कस्टमर केयर नंबर, क्यूआर कोड, नकली भुगतान स्क्रीनशॉट, ऑनलाइन खरीद-बिक्री, फर्जी लोन एप, शादी की वेबसाइट, बीमा पॉलिसी, इनाम और लॉटरी के नाम पर भी ठगी की जा रही है। रिश्तेदार या परिचित की तस्वीर लगाकर व्हाट्सएप से रुपये मांगने, आवाज की नकल कर परिवार के सदस्य के संकट में होने की बात कहने और मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड कराने जैसे तरीके भी अपनाए जा रहे हैं।

साइबर ठगी से बचने के लिए अनजान लिंक न खोलने, ओटीपी और यूपीआई पिन साझा न करने तथा रुपये भेजने से पहले फोन करने वाले की पहचान की पुष्टि करना सबसे जरूरी है।
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