फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   "Grassroots education policy beyond '

'शिक्षा नीति जमीनी हकीकत से परे'

Mon, 16 May 2016 12:35 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया Updated Mon, 16 May 2016 12:35 AM IST
विज्ञापन
 "Grassroots education policy beyond '
जिला पंचायत सभागार में आयोजित व्याख्यान एवं सम्मान कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि।
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने देश की शिक्षा नीति की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति तैयार करने में शिक्षकों का योगदान बहुत कम है। देश में जो शिक्षा की नीतियां बन रही हैं, वह जमीनी सच्चाई से परे हैं। हर विश्वविद्यालय की अलग पृष्ठभूमि है। यह शिक्षा के हित में ठीक नहीं हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में आई गिरावट पर चिंता जताई। 
विज्ञापन


जिला पंचायत सभागार में वह रविवार को पूर्वांचल में शिक्षा, न्याय, प्रशासन और मीडिया विषय पर आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कुलपति ने कहा कि शिक्षा का मूल अर्थ है अच्छा इंसान बनना। आज के युवाओं के पास अच्छा ज्ञान है लेकिन उनके पास शिक्षा नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि अभिभावक शिक्षित हों। ताकि बच्चों को घर में अच्छा संस्कार मिल सके। शिक्षा को रोजगार के नजरिए से देखा जा रहा है। जिसका  नतीजा है कि कोटा जैसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं। यह गंभीर बात है। 
विज्ञापन


आईपीएस अधिकारी जुुगुल किशोर ने अफसरों को निशाने पर रखा। उन्होंने कहा कि अफसर धन कमाने में लगे हैं। उनके पास जनता को गुड गवर्नेंस देने का समय नहीं है। धन से कभी सुख नहीं मिल सकता। धन से धर्म यानी जनता के हित में काम करें। उन्होंने पिछले सालों में अफसरों के जेल जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक निजी स्वार्थ या दवाब में काम करना बंद नहीं करेंगे। इस प्रवृत्ति का दमन नहीं करेंगे। सुख नहीं मिलेगा। मस्तिष्क का उपयोग अच्छे कामों में लगाएं। उन्होंने अफसरों के जेल जाने की घटनाओं से सबक लेने को कहा। उन्होंने अफसरों को जनता का सेवक बताया।
विज्ञापन
विज्ञापन



हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके ओझा ने कहा कि इमानदारी से वकालत की जा सकती है। वकीलों को चरित्र का निर्माण करना होगा। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. अरविंद ने कहा कि शिक्षा का उपयोग हमें समाज के विकास में करना चाहिए। शिक्षा की दो धाराएं हैं। कौन सी समाज के लिए उपयोगी है और कौन सी नहीं। इसे जानना जरूरी है। हम मां-बाप, परिवार और समाज के लिए क्या कर रहे हैं, इस पर विचार करना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव और संचालन शिक्षक सुधाकर मिश्र ने की।


आयोजक पवन उपाध्याय ने आभार जताया। इस मौके पर रजिस्ट्रार प्रभाष द्विवेदी, संजीव द्विवेदी, शेषनाथ तिवारी, डॉ. अजय मणि, डॉ. एचएस राय, गंगेश्वर तिवारी, सिंगासन गिरी, मनोज मिश्र, जिला अग्निशमन अधिकारी प्रभाकर , परमेश्वर, प्रमोद गौतम, अनुज, नरसिंह, अखिलेंद्र , ज्ञानेश्वर, बबलू यादव आदि मौजूद रहे।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed