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Deoria News: अयोध्या जाना 1992 में था अपराध, रामभक्तों को भेजा जाता था जेल
Mon, 08 Jan 2024 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 08 Jan 2024 12:21 AM IST
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पूर्व चेयरमैन श्रीराम सिंह और पूर्व विधायक रविंद्र प्रताप मल्ल ने साझा कीं यादें
देवरिया। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियों को लेकर हर ओर उत्साह का माहौल है। जिले में घर-घर जाकर पूजित अक्षत का वितरण किया जा रहा है। 22 जनवरी को एक ओर लाखों लोग अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के साक्षी बनेंगे, वहीं जिले में घर-घर दीपोत्सव मनाने की भी तैयारी है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब अयोध्या की ओर कूच अपराध की श्रेणी में आ गया था। 1992 में अयोध्या जाने के निकले जिले के अधिकांश कारसेवकों पर शांतिभंग और कई पर एनएसए की भी कार्रवाई हुई थी। उन्हें कई दिनों तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा था। 32 साल बाद मर्यादा पुरूषोत्तम राम की प्राण प्रतिष्ठा की घड़ी करीब आई है, तो उस दौर के कारसेवक उत्साह से लबरेज हैं। लार नगर के पूर्व चेयरमैन श्रीराम सिंह और पूर्व विधायक रविंद्र प्रताप मल्ल ने राम मंदिर आंदोलन की यादें साझा कीं।
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मेरा नाम श्रीराम मुझे अयोध्या जाने से कौन रोकेगा....
देवरिया। 1992 में कुशीनगर और देवरिया एक ही जिला था। उस समय लार नगर के चेयरमैन श्रीराम सिंह चेयरमैन संघ के अध्यक्ष रहे। उन्होंने बताया कि तत्कालीन डीएम कुंवर फतेहबहादुर सिंह ने कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के प्रमुख पदाधिकारियों और भाजपा नेताओं के साथ बैठक की। इस दौरान वह बोले कि 6 दिसंबर 1992 को कोई अयोध्या नहीं जाएगा। इस पर मैं बोला कि मेरा नाम ही श्रीराम है, मुझे अयोध्या जाने से कौन रोकेगा। अयोध्या न जाएं, ऐसा हो ही नहीं सकता है। इतना कहकर वहां से चल दिया। अयोध्या जाने की तैयारी में लगा था कि घर से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दो दिन लार थाने में रखने के बाद जिला कारागार में भेज दिया गया, जहां 18 दिन जेल में रहना पड़ा और एनएसए भी लगा। विवादित ढांचा ढहते हुए जेल में ही टीवी पर हम लोगों ने देखा। आज अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा की चल रही तैयारी को देख खुशी है। इस दिन का वर्षों से इंतजार था।
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12 दिन तक छिपे थे बजाजी गली में, 15 दिन काटनी पड़ी थी जेल
देवरिया। पूर्व विधायक रविंद्र प्रताप मल्ल ने बताया कि 1992 के दौर में पुलिस कारसेवकों के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार करती थी। बिहार और बंगाल से अयोध्या जाने के लिए निकले कारसेवक देवरिया के रास्ते ही यूपी में प्रवेश करते थे। बार्डर से कारसेवकों को गिरफ्तार करने के बाद जिला कारागार के अलावा मंडी में बनाए गए अस्थायी जेल में रखा जाता था। उस समय विधायक होने के कारण आने वाले कारसेवकों को भोजन कराने की जिम्मेदार मेरी थी और पुलिस से बचना भी था। 12 दिन बजाजी रोड इलाके में छिपकर रहा। बाद में सीओ सिटी ज्ञान सिंह ने टाउनहाल के पास गिरफ्तार कर लिया। 15 दिन तक जेल में रहना पड़ा और एनएसए की कार्रवाई हुई। उस समय राम का नाम लेने और अयोध्या जाने वालों पर पुलिस केस दर्ज करती थी। अब भगवान श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर चल रही तैयारियों को देखकर मन गदगद हो रहा है।
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देवरिया। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियों को लेकर हर ओर उत्साह का माहौल है। जिले में घर-घर जाकर पूजित अक्षत का वितरण किया जा रहा है। 22 जनवरी को एक ओर लाखों लोग अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के साक्षी बनेंगे, वहीं जिले में घर-घर दीपोत्सव मनाने की भी तैयारी है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब अयोध्या की ओर कूच अपराध की श्रेणी में आ गया था। 1992 में अयोध्या जाने के निकले जिले के अधिकांश कारसेवकों पर शांतिभंग और कई पर एनएसए की भी कार्रवाई हुई थी। उन्हें कई दिनों तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा था। 32 साल बाद मर्यादा पुरूषोत्तम राम की प्राण प्रतिष्ठा की घड़ी करीब आई है, तो उस दौर के कारसेवक उत्साह से लबरेज हैं। लार नगर के पूर्व चेयरमैन श्रीराम सिंह और पूर्व विधायक रविंद्र प्रताप मल्ल ने राम मंदिर आंदोलन की यादें साझा कीं।
मेरा नाम श्रीराम मुझे अयोध्या जाने से कौन रोकेगा....
देवरिया। 1992 में कुशीनगर और देवरिया एक ही जिला था। उस समय लार नगर के चेयरमैन श्रीराम सिंह चेयरमैन संघ के अध्यक्ष रहे। उन्होंने बताया कि तत्कालीन डीएम कुंवर फतेहबहादुर सिंह ने कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के प्रमुख पदाधिकारियों और भाजपा नेताओं के साथ बैठक की। इस दौरान वह बोले कि 6 दिसंबर 1992 को कोई अयोध्या नहीं जाएगा। इस पर मैं बोला कि मेरा नाम ही श्रीराम है, मुझे अयोध्या जाने से कौन रोकेगा। अयोध्या न जाएं, ऐसा हो ही नहीं सकता है। इतना कहकर वहां से चल दिया। अयोध्या जाने की तैयारी में लगा था कि घर से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दो दिन लार थाने में रखने के बाद जिला कारागार में भेज दिया गया, जहां 18 दिन जेल में रहना पड़ा और एनएसए भी लगा। विवादित ढांचा ढहते हुए जेल में ही टीवी पर हम लोगों ने देखा। आज अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा की चल रही तैयारी को देख खुशी है। इस दिन का वर्षों से इंतजार था।
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12 दिन तक छिपे थे बजाजी गली में, 15 दिन काटनी पड़ी थी जेल
देवरिया। पूर्व विधायक रविंद्र प्रताप मल्ल ने बताया कि 1992 के दौर में पुलिस कारसेवकों के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार करती थी। बिहार और बंगाल से अयोध्या जाने के लिए निकले कारसेवक देवरिया के रास्ते ही यूपी में प्रवेश करते थे। बार्डर से कारसेवकों को गिरफ्तार करने के बाद जिला कारागार के अलावा मंडी में बनाए गए अस्थायी जेल में रखा जाता था। उस समय विधायक होने के कारण आने वाले कारसेवकों को भोजन कराने की जिम्मेदार मेरी थी और पुलिस से बचना भी था। 12 दिन बजाजी रोड इलाके में छिपकर रहा। बाद में सीओ सिटी ज्ञान सिंह ने टाउनहाल के पास गिरफ्तार कर लिया। 15 दिन तक जेल में रहना पड़ा और एनएसए की कार्रवाई हुई। उस समय राम का नाम लेने और अयोध्या जाने वालों पर पुलिस केस दर्ज करती थी। अब भगवान श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर चल रही तैयारियों को देखकर मन गदगद हो रहा है।
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