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खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा
देवरिया
Updated Fri, 22 Jul 2016 10:30 PM IST
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बरहज के दियारा इलाके से घाघरा नदी में नाव से जाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बरहज। घाघरा में बाढ़ के पानी से तटवर्ती इलाका पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। खतरे के निशान से करीब आधा मीटर ऊपर बह रही नदी का पानी रामजानकी मार्ग के पास पहुंच गया है। कटान में तेजी हुई है, घाघरा के उस पार परसिया देवार और विशुनपुर देवार का मुख्य रास्ता कट रहा है। प्रशासन की ओर से राहत व बचाव के प्रबंध नहीं हुए हैं।
थाना घाट पर घाघरा खतरे के लाल निशान 66.50 मीटर से 45 सेमी ऊपर 66.95 मीटर पर बह रही है। जिसके चलते बाढ़ का पानी देवारा क्षेत्र के अधिकांश टोलों में तेजी से फैल रहा है। वहां का जनजीवन पूरी तरह से ठप है और लोग अपने घरों में दुबके हैं। विशुनपुर देवार के महेश यादव ने बताया कि तहसील प्रशासन से राहत सामग्री की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई भी मदद नहीं मिली।
उधर भदिला प्रथम व धनया कुंद महाल में चार नावें भेजी गई हैं, वहां के लोगों को भी राहत सामग्री मुहैया नहीं कराई गई है। राप्ती नदी का जलस्तर भी कपरवार के उग्रसेन सेतु को छूने के लिए आतुर है। राप्ती नदी से महेन के पास एक बंधे पर कटान हो रही है। महेन के संतोष यादव ने बताया कि बाढ़ खंड विभाग को पहले से ही बंधे को मजबूत बनाने की बात कही गई थी।
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लेकिन विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। मोहरा, समोगर और मनियापार भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हो रहा है। सबसे खराब स्थिति कटईलवां गांव की है, जहां नदी कटान करते हुए खेती की जमीनों के साथ गांव को काटने पर आमादा है। तहसील प्रशासन का महज यही कहना है कि बाढ़ पर पूरी निगरानी की जा रही है, लेकिन राहत के नाम पर पीड़ितों को फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई।
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थाना घाट पर घाघरा खतरे के लाल निशान 66.50 मीटर से 45 सेमी ऊपर 66.95 मीटर पर बह रही है। जिसके चलते बाढ़ का पानी देवारा क्षेत्र के अधिकांश टोलों में तेजी से फैल रहा है। वहां का जनजीवन पूरी तरह से ठप है और लोग अपने घरों में दुबके हैं। विशुनपुर देवार के महेश यादव ने बताया कि तहसील प्रशासन से राहत सामग्री की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई भी मदद नहीं मिली।
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उधर भदिला प्रथम व धनया कुंद महाल में चार नावें भेजी गई हैं, वहां के लोगों को भी राहत सामग्री मुहैया नहीं कराई गई है। राप्ती नदी का जलस्तर भी कपरवार के उग्रसेन सेतु को छूने के लिए आतुर है। राप्ती नदी से महेन के पास एक बंधे पर कटान हो रही है। महेन के संतोष यादव ने बताया कि बाढ़ खंड विभाग को पहले से ही बंधे को मजबूत बनाने की बात कही गई थी।
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लेकिन विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। मोहरा, समोगर और मनियापार भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हो रहा है। सबसे खराब स्थिति कटईलवां गांव की है, जहां नदी कटान करते हुए खेती की जमीनों के साथ गांव को काटने पर आमादा है। तहसील प्रशासन का महज यही कहना है कि बाढ़ पर पूरी निगरानी की जा रही है, लेकिन राहत के नाम पर पीड़ितों को फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई।