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गड़बड़झाला : एचपीसीएल में टैंकर बना डीसीएम तो बीपीसीएल ने बना दिया ट्रक
Sun, 16 Feb 2025 11:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 16 Feb 2025 11:53 PM IST
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देवरिया। बैतालपुर में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड में बीते वर्ष अक्तूबर में वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए टेंडर प्रक्रिया जैम पोर्टल पर प्रकाशित हुई।
इसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकारियों ने कर्मचारियों से सांठगांठ कर पात्र अभ्यर्थियों को छोड़ अपात्र को टेंडर कर दिया। इसका खुलासा फरवरी माह में उस समय हुआ जब टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई। पात्र अभ्यर्थियों ने अपने स्तर से जांच की तो पता चला कि बाट माप का फर्जी कागजात लगाकर टैंकर की जगह डीसीएम का टेंडर कर दिया गया है।
इसके अलावा डिपो में पहले से चल रहे तीन टैंकर में आईओसीएल का फर्जी कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र लगाकर टेंडर किया गया है। तीनों अभ्यर्थियों ने बाट माप विभाग वरिष्ठ निरीक्षक से शिकायत की तो उनकी जांच में वाहन संख्या और प्रमाणपत्र संख्या गलत मिले थे। इसके बाद डीएम से लेकर एचपीसीएल के गोरखपुर, लखनऊ व मुंबई के अधिकारियों से इस फर्जीवाड़े की शिकायत की थी।
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इसकी जांच अभी चल ही रही थी कि एचपीसीएल में टैंकर बने डीसीएम को बीपीसीएल में ट्रक दिखाकर गैस ढुलाई का पता चला है। एक के बाद एक फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद डिपो की खूब किरकिरी हो रही है। फिलहाल अभी टेंडर प्रक्रिया की जांच जारी है। मंगलवार तक इसके फाइनल होने की संभावना है। इसके बाद अधिकारियों की टीम ट्रक के टेंडर में हुए गड़बड़झाला की भी जांच कराएगी।
मालूम हो कि बीते वर्ष के अक्तूबर माह में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड बैतालपुर में वाहनों के लगाने के लिए टेंडर जैम पोर्टल पर प्रकाशित हुआ। टेंडर का सात वर्षों से इंतजार कर रहे बैतलापुर के गुड़री के प्रमोद कुमार यादव पुत्र गनेश यादव, रामसूरत सिंह पुत्र स्व. रामजी सिंह व शहर के भुजौली कॉलोनी निवासी राजकुमार झा पुत्र हरेराम झा ने टैंकर लगाने के लिए जैम पोर्टल पर आवेदन किया था।
फरवरी के पहले सप्ताह में उन्हें टेंडर खुलने की जानकारी मिली तो उन्होंने डिपो से पता किया। डिपो की ओर से बताया गया कि उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया है। राजकुमार झा ने डिपो के इंचार्ज वेद प्रकाश से शिकायत की। राजकुमार व अन्य आवेदक टेंडर की सत्यता जानने की फिराक में लग गए। तीनों को जानकारी मिली कि एक डीसीएम का टैंकर के रूप में टेंडर किया गया है। इसी तरह तीन अन्य वाहनों की जांच में पता चला कि एक का फर्जी कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र आईओसीएल का और अन्य दो का फर्जी कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र लग गया है।
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इसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकारियों ने कर्मचारियों से सांठगांठ कर पात्र अभ्यर्थियों को छोड़ अपात्र को टेंडर कर दिया। इसका खुलासा फरवरी माह में उस समय हुआ जब टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई। पात्र अभ्यर्थियों ने अपने स्तर से जांच की तो पता चला कि बाट माप का फर्जी कागजात लगाकर टैंकर की जगह डीसीएम का टेंडर कर दिया गया है।
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इसके अलावा डिपो में पहले से चल रहे तीन टैंकर में आईओसीएल का फर्जी कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र लगाकर टेंडर किया गया है। तीनों अभ्यर्थियों ने बाट माप विभाग वरिष्ठ निरीक्षक से शिकायत की तो उनकी जांच में वाहन संख्या और प्रमाणपत्र संख्या गलत मिले थे। इसके बाद डीएम से लेकर एचपीसीएल के गोरखपुर, लखनऊ व मुंबई के अधिकारियों से इस फर्जीवाड़े की शिकायत की थी।
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इसकी जांच अभी चल ही रही थी कि एचपीसीएल में टैंकर बने डीसीएम को बीपीसीएल में ट्रक दिखाकर गैस ढुलाई का पता चला है। एक के बाद एक फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद डिपो की खूब किरकिरी हो रही है। फिलहाल अभी टेंडर प्रक्रिया की जांच जारी है। मंगलवार तक इसके फाइनल होने की संभावना है। इसके बाद अधिकारियों की टीम ट्रक के टेंडर में हुए गड़बड़झाला की भी जांच कराएगी।
मालूम हो कि बीते वर्ष के अक्तूबर माह में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड बैतालपुर में वाहनों के लगाने के लिए टेंडर जैम पोर्टल पर प्रकाशित हुआ। टेंडर का सात वर्षों से इंतजार कर रहे बैतलापुर के गुड़री के प्रमोद कुमार यादव पुत्र गनेश यादव, रामसूरत सिंह पुत्र स्व. रामजी सिंह व शहर के भुजौली कॉलोनी निवासी राजकुमार झा पुत्र हरेराम झा ने टैंकर लगाने के लिए जैम पोर्टल पर आवेदन किया था।
फरवरी के पहले सप्ताह में उन्हें टेंडर खुलने की जानकारी मिली तो उन्होंने डिपो से पता किया। डिपो की ओर से बताया गया कि उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया है। राजकुमार झा ने डिपो के इंचार्ज वेद प्रकाश से शिकायत की। राजकुमार व अन्य आवेदक टेंडर की सत्यता जानने की फिराक में लग गए। तीनों को जानकारी मिली कि एक डीसीएम का टैंकर के रूप में टेंडर किया गया है। इसी तरह तीन अन्य वाहनों की जांच में पता चला कि एक का फर्जी कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र आईओसीएल का और अन्य दो का फर्जी कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र लग गया है।