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अनुदानित स्कूलों के भुगतान में लेखा अनुभाग ने दिखाई है ज्यादा ही तेजी
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अनुदानित स्कूलों के भुगतान में लेखा अनुभाग ने दिखाई तेजी
शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े में लेखाधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका भी है संदिग्ध
जिम्मेदारों ने एडेड स्कूलों के भुगतान की फाइल कभी नहीं रोकी
जांच के बाद मामले का पर्दाफाश होने की है उम्मीद
फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। चुनिंदा अनुदानित स्कूलों में बीते वर्षों में जिन शिक्षकों को नौकरी मिली है, उनके बकाया भुगतान में भी खेल किया गया है। बिना शैक्षिक प्रमाण पत्रों एवं अन्य आवश्यक कागजात के सत्यापन के ही इन शिक्षकों का भुगतान करने में बेसिक कार्यालय के लेखा अनुभाग ने इनका भुगतान कर दिया है। इसमें तत्कालीन वित्त व लेखाधिकारी तथा यहां के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। इनके पैन व आधार सहित अन्य अभिलेखों की भी जांच हो तो इसमें भी बड़े पैमाने पर हुए गड़बड़ी का पर्दाफाश होना तय है।
एसटीएफ ने अनुदानित स्कूलों में शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े में लेखा अनुभाग की कारगुजारियों को भी केंद्र में रखा हुआ है। सर्वविदित है कि लेखा अनुभाग के बाबुओं को बिना चढ़ावा दिए कोई काम संभव नहीं है। सामान्य काम के लिए भी ये आए व्यक्ति को कई दिनों तक दौड़ाते हैं। दो बाबुओं की कार्यप्रणाली को लेकर यहां लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। कई बार इनकी शिकायत शासन तक हो चुकी हैं, हालांकि, अपने आकाओं की कृपा की बदौलत यह हर बार बच जाते हैं। एक बाबू तो अपनी पहुंच और प्रभाव के चलते तबादले के बाद भी यही जमा है तो दूसरा भी सेटिंग के खेल में कुछ कम नहीं है। जिले में वर्तमान में 72 अनुदानित स्कूल हैं, इनमें 69 स्कूलों के करीब 700 शिक्षकों के वेतन मद में हर माह करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। बकाया भुगतान के लिए संबंधित शिक्षक हर माह यहां के दोनों बाबुओं को पहले खुश करते हैं। इसके बाद ही उनका काम होना संभव हो पाता है। उधर, जब से एसटीएफ ने पुरनाछापर निवासी सतीश चंद्र मिश्र उर्फ राजू को अपनी हिरासत में लिया है, लेखा अनुभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है। उसके बाद जांच टीम दो बार बीएसए कार्यालय आ चुकी है और लेखा अनुभाग में कुछ चिह्नित शिक्षकों के संबंध में जरूरी अभिलेख भी ले जा चुकी है। वित्त व लेखाधिकारी जगदीश श्रीवास्तव ने बताया कि बीएसए के अनुमोदन के बाद जिन शिक्षकों के बकाया भुगतान की अनुमति दी जाती है, उसे कर दिया जाता है। अगर किसी को बाबुओं से कोई शिकायत है तो उसे लिखित रूप से उच्चाधिकारियों को देना चाहिए।
हर दूसरे तीसरे दिन लेखा अनुभाग में दिखते हैं स्कूल प्रबंधक
अनुुदानित विद्यालयों में नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के बकाए भुगतान के लिए यहां के प्रबंधकों ने भी एड़ी-चोटी का जोर लगाए रहते हैं। कई प्रबंधक तो दो से तीन दिन के अंदर कार्यालय में नजर आते हैं। अधिकारियों के साथ चाय पीते हैं और अपने मतलब साधते हैं। अगर यह अधिकारी से मिलते हैं तो किसी अन्य को साहब से मिलने की अनुमति भी नहीं दी जाती है।
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दो पूर्व बीएसए के समय में हुई नियुक्तियां हैं जांच का विषय
आठ साल तक जिले में रहे एक बीएसए और अगस्त 2014 से जुलाई 2016 के दौरान अनुदानित स्कूलों में शिक्षक भर्ती के नाम पर खूब फर्जीवाड़ किया गया है। इन शिक्षकों के भुगतान में भी गजब की तेजी दिखाई गई। चर्चा तो यह भी है कि फर्जी शिक्षक अपने वेतन का एक निर्धारित हिस्सा लेखा अनुभाग के चर्चित बाबुओं को चढ़ाते हैं। इन दोनो की शान शौकत अफसरों वाले हैं।
भुगतान करने पर निलंबित हुए थे पूर्व बीएसए और एडी बेसिक
पिछले वर्षों के दौरान हुई शिकायतों के बाद जिले के अनुदानित स्कूलों में 17 शिक्षकों को कूटरचित ढंग से तैयार प्रमाण पत्रों पर नियुक्ति एवं करोड़ों रुपये एरियर के भुगतान के मामले में शासन ने तत्कालीन मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर उस दौरान एडी बेसिक रहीं मृदुला आनंद एवं जिले में काफी दिनों तक जमे रहे बीएसए को निलंबित कर दिया था। इससे विभाग की भी काफी किरकिरी हुई थी।
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शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े में लेखाधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका भी है संदिग्ध
जिम्मेदारों ने एडेड स्कूलों के भुगतान की फाइल कभी नहीं रोकी
जांच के बाद मामले का पर्दाफाश होने की है उम्मीद
फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। चुनिंदा अनुदानित स्कूलों में बीते वर्षों में जिन शिक्षकों को नौकरी मिली है, उनके बकाया भुगतान में भी खेल किया गया है। बिना शैक्षिक प्रमाण पत्रों एवं अन्य आवश्यक कागजात के सत्यापन के ही इन शिक्षकों का भुगतान करने में बेसिक कार्यालय के लेखा अनुभाग ने इनका भुगतान कर दिया है। इसमें तत्कालीन वित्त व लेखाधिकारी तथा यहां के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। इनके पैन व आधार सहित अन्य अभिलेखों की भी जांच हो तो इसमें भी बड़े पैमाने पर हुए गड़बड़ी का पर्दाफाश होना तय है।
एसटीएफ ने अनुदानित स्कूलों में शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े में लेखा अनुभाग की कारगुजारियों को भी केंद्र में रखा हुआ है। सर्वविदित है कि लेखा अनुभाग के बाबुओं को बिना चढ़ावा दिए कोई काम संभव नहीं है। सामान्य काम के लिए भी ये आए व्यक्ति को कई दिनों तक दौड़ाते हैं। दो बाबुओं की कार्यप्रणाली को लेकर यहां लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। कई बार इनकी शिकायत शासन तक हो चुकी हैं, हालांकि, अपने आकाओं की कृपा की बदौलत यह हर बार बच जाते हैं। एक बाबू तो अपनी पहुंच और प्रभाव के चलते तबादले के बाद भी यही जमा है तो दूसरा भी सेटिंग के खेल में कुछ कम नहीं है। जिले में वर्तमान में 72 अनुदानित स्कूल हैं, इनमें 69 स्कूलों के करीब 700 शिक्षकों के वेतन मद में हर माह करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। बकाया भुगतान के लिए संबंधित शिक्षक हर माह यहां के दोनों बाबुओं को पहले खुश करते हैं। इसके बाद ही उनका काम होना संभव हो पाता है। उधर, जब से एसटीएफ ने पुरनाछापर निवासी सतीश चंद्र मिश्र उर्फ राजू को अपनी हिरासत में लिया है, लेखा अनुभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है। उसके बाद जांच टीम दो बार बीएसए कार्यालय आ चुकी है और लेखा अनुभाग में कुछ चिह्नित शिक्षकों के संबंध में जरूरी अभिलेख भी ले जा चुकी है। वित्त व लेखाधिकारी जगदीश श्रीवास्तव ने बताया कि बीएसए के अनुमोदन के बाद जिन शिक्षकों के बकाया भुगतान की अनुमति दी जाती है, उसे कर दिया जाता है। अगर किसी को बाबुओं से कोई शिकायत है तो उसे लिखित रूप से उच्चाधिकारियों को देना चाहिए।
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हर दूसरे तीसरे दिन लेखा अनुभाग में दिखते हैं स्कूल प्रबंधक
अनुुदानित विद्यालयों में नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के बकाए भुगतान के लिए यहां के प्रबंधकों ने भी एड़ी-चोटी का जोर लगाए रहते हैं। कई प्रबंधक तो दो से तीन दिन के अंदर कार्यालय में नजर आते हैं। अधिकारियों के साथ चाय पीते हैं और अपने मतलब साधते हैं। अगर यह अधिकारी से मिलते हैं तो किसी अन्य को साहब से मिलने की अनुमति भी नहीं दी जाती है।
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दो पूर्व बीएसए के समय में हुई नियुक्तियां हैं जांच का विषय
आठ साल तक जिले में रहे एक बीएसए और अगस्त 2014 से जुलाई 2016 के दौरान अनुदानित स्कूलों में शिक्षक भर्ती के नाम पर खूब फर्जीवाड़ किया गया है। इन शिक्षकों के भुगतान में भी गजब की तेजी दिखाई गई। चर्चा तो यह भी है कि फर्जी शिक्षक अपने वेतन का एक निर्धारित हिस्सा लेखा अनुभाग के चर्चित बाबुओं को चढ़ाते हैं। इन दोनो की शान शौकत अफसरों वाले हैं।
भुगतान करने पर निलंबित हुए थे पूर्व बीएसए और एडी बेसिक
पिछले वर्षों के दौरान हुई शिकायतों के बाद जिले के अनुदानित स्कूलों में 17 शिक्षकों को कूटरचित ढंग से तैयार प्रमाण पत्रों पर नियुक्ति एवं करोड़ों रुपये एरियर के भुगतान के मामले में शासन ने तत्कालीन मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर उस दौरान एडी बेसिक रहीं मृदुला आनंद एवं जिले में काफी दिनों तक जमे रहे बीएसए को निलंबित कर दिया था। इससे विभाग की भी काफी किरकिरी हुई थी।