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पांच बच्चों को अपनों की तलाश
अमर उजाला ब्यूरो/देवरिया
Updated Thu, 11 Feb 2016 10:59 PM IST
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अपने मां -बाप से बिछड़े इन मासूमों को अपनों की तलाश है। मासूमों को जीआरपी और लोकल पुलिस ने बाल गृह बालिका में रखवाया है।
संस्था के लोग बच्चों को भोजन और देखभाल की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। इनमें तीन बच्चे एक साल से ढाई साल उम्र तक के हैं। जबकि दो बच्चों की उम्र चार, सात साल है।
मां विंध्यवासिनी संस्थान की अध्यक्ष गिरिजा त्रिपाठी ने बताया कि सलेमपुर में दो बच्चे पुलिस को मिले। पुलिस ने सात सितंबर 2015 को उन बच्चों को बाल गृह बालिका में भेज दिया।
उन बच्चें में चार साल की सानिया और सात साल की समीना है। काउंसिलिंग में पता चला कि दोनों सगी बहनें हैं। बहुत मुश्किल से उन बच्चों ने अपने पिता का नाम अलाउददीन ग्राम रहीमपुर बताया।
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काफी प्रयास के बाद भी उनका पता नहीं चल सका है। तीन नवंबर 2015 को एक साल का एक बच्चा गोरखपुर-वाराणसी सवारी गाड़ी में और तीन फरवरी को डेढ़ साल का एक बच्चा सिवान-गोरखपुर सवारी गाड़ी में मिला।
जीआरपी ने उन बच्चों को बाल गृह बालिका में भिजवाया। इसी तरह ढाई साल का एक बच्चा भटनी रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को मिला।
जीआरपी ने बाल गृह बालिका में उसे रखवाकर चली गई। बालगृह की अधीक्षक कंचनलता ने बताया कि सभी बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण दिया जा रहा है।
जिस किसी सज्जन का बच्चा हो। वह प्रमाण के साथ आकर बच्चों को ले जाएं। अन्यथा उन बच्चों को मान्यता प्राप्त संस्थानों में सीडब्ल्यूसी के आदेश पर भेज दिया जाएगा।
बाल गृह बालिका में 10 से 18 साल की बालिकाओं को संरक्षण दिया जाता है।
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संस्था के लोग बच्चों को भोजन और देखभाल की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। इनमें तीन बच्चे एक साल से ढाई साल उम्र तक के हैं। जबकि दो बच्चों की उम्र चार, सात साल है।
मां विंध्यवासिनी संस्थान की अध्यक्ष गिरिजा त्रिपाठी ने बताया कि सलेमपुर में दो बच्चे पुलिस को मिले। पुलिस ने सात सितंबर 2015 को उन बच्चों को बाल गृह बालिका में भेज दिया।
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उन बच्चें में चार साल की सानिया और सात साल की समीना है। काउंसिलिंग में पता चला कि दोनों सगी बहनें हैं। बहुत मुश्किल से उन बच्चों ने अपने पिता का नाम अलाउददीन ग्राम रहीमपुर बताया।
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काफी प्रयास के बाद भी उनका पता नहीं चल सका है। तीन नवंबर 2015 को एक साल का एक बच्चा गोरखपुर-वाराणसी सवारी गाड़ी में और तीन फरवरी को डेढ़ साल का एक बच्चा सिवान-गोरखपुर सवारी गाड़ी में मिला।
जीआरपी ने उन बच्चों को बाल गृह बालिका में भिजवाया। इसी तरह ढाई साल का एक बच्चा भटनी रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को मिला।
जीआरपी ने बाल गृह बालिका में उसे रखवाकर चली गई। बालगृह की अधीक्षक कंचनलता ने बताया कि सभी बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण दिया जा रहा है।
जिस किसी सज्जन का बच्चा हो। वह प्रमाण के साथ आकर बच्चों को ले जाएं। अन्यथा उन बच्चों को मान्यता प्राप्त संस्थानों में सीडब्ल्यूसी के आदेश पर भेज दिया जाएगा।
बाल गृह बालिका में 10 से 18 साल की बालिकाओं को संरक्षण दिया जाता है।