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Deoria News: मानसून की बेरुखी से बढ़ी किसानों की धड़कन, खेतों में फटी दरार

Thu, 25 Jul 2024 12:49 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jul 2024 12:49 AM IST
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Farmers' heartbeat increased due to indifference of monsoon, cracks burst in the fields
खेतों में पड़ा दरार किसान इंजन चलाने को विवश
- धान की फसल की सिंचाई के लिए करनी पड़ रही कड़ी मशक्कत
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- नहरों ने भी किसानों को किया निराश, फसल को बचाने के लिए पंपिंग सेट से करनी पड़ रही सिंचाई

संवाद न्यूज एजेंसी

तरकुलवा। मानसून की बेरुखी से किसानों की धड़कन बढ़ गई है। बारिश न होने से किसानों के चेहरे पर अब मायूसी देखने को मिल रही है। करीब 15 दिन से बारिश न होने से क्षेत्र के किसानों की धान की फसल पर संकट छा गया है। उधर, नहरों में पानी न होने से किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। धान के खेतों में दरार पड़ गई है। फसल को जिंदा रखने के लिए किसानों को काफी मशक्कत से महंगे दाम पर पंपिंग सेट से काफी मशक्कत कर धान की सिंचाई करनी पड़ रही है।
मानसून की दगाबाजी से जुलाई के अंतिम सप्ताह में भी दूर-दूर तक कहीं बारिश की संभावना नहीं दिख रही है। पानी के अभाव में खेतों में दरार फट चुकी है। इससे धान की फसल की उत्पादकता प्रभावित होने की संभावना है। इधर, सावन के महीने में लगातार 15 दिनों से बारिश नहीं होने और आसमान से निकल रही चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से विकास खंड के हरैया, कनकपुरा, सोहनरिया, अमवा, सिसवा, मुड़ियकटवा, पगरा, बेलही, सकतुआ, सकतुई, खैराट, बिरती, जलुआ, जमुनी, बालपुरश्रीनगर, पटखौली आदि गांवों में खेतों में दरार फट गई है।
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ट्यूबवेल और पंपिंग सेट मशीन से धान की सिंचाई करने पर खेत में एक दिन पानी खड़ा होता है, अगले दिन फिर से खेत सूख जाते हैं। कनकपुरा के किसान रामकृपाल राव कहते हैं कि बारिश के पानी से धान की सिंचाई बेहतर होती है, जिससे फसल में बीमारियों के लगने की संभावना काफी कम हो जाती है और पैदावार भी अच्छी होती है। कौलाचक के प्रधान अबरार अहमद, हंसराज सिंह, अबुल हसन, पूर्व प्रधान महबूब खान, अमवा के किसान रमापति सिंह, दुर्गेश तिवारी, चंद्रबली सिंह, रज्जाक अंसारी आदि का कहना है कि गरीब किसानों के लिए पटवन कर खेती करना मुश्किल है। पास में दो किमी. लंबी बाबूपट्टी माइनर है, जिसमें छटांक भर पानी नहीं है।
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निजी बोरिंग वाले प्रति घंटा दो सौ रुपए पटवन मांग रहे हैं। गरीब किसानों के लिए पटवन का मूल्य चुकाना मुश्किल है। ऐसे में निराश होकर किसान अपने भाग्य को कोसने लगा है। किसानों का कहना है़ कि नहर में यदि पानी होता तो सिंचाई कर फसलों को जिंदा रखते, लेकिन नहरें भी बेपानी हैं। बारिश के बिन हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। किसान बर्बाद हो रही अपनी फसल को देखकर तड़प रहा है, लेकिन बेबस और लाचार है।
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