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Deoria News: पूर्व सीएमओ की चिट्ठी से फंसेंगे तीन और आला अधिकारी!
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पूर्व सीएमओ की चिट्ठी से फंसेंगे तीन और आला अधिकारी!
सिफलिस-रैपिड किट घोटाला : कई गुना अधिक दर पर किट खरीदने की हुई थी पुष्टि
देवरिया। जनपद में जननी सुरक्षा योजना के तहत रैपिड और सिफलिस (एचबीएसएजी) किट की खरीदारी में हुई अनियमितता का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। दरअसल, कई गुना अधिक दर पर किट खरीदने की पुष्टि होने के बाद शासन की जांच में दोषी पाए गए तत्कालीन सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय ने उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को पत्र लिखकर किट भुगतान व खरीद में शामिल जिले के तीन अन्य आला अधिकारियों से भी रिकवरी कराने की मांग की है। इस मामले में करीब एक माह पहले निदेशक प्रशासन गणपति राजा ने केस दर्ज कर रिकवरी का आदेश दिया है। डॉ. आलोक पांडेय इसी साल जून में रिटायर हो चुके हैं।
वर्ष 2020-21, 2021-22 में स्वास्थ्य विभाग ने सिफलिस और रैपिड टेस्ट किट क्रमश: 5.48 रुपये व 7.73 रुपये की जगह 80 रुपये में खरीदी गई थी। तत्कालीन पशुधन व दुग्ध विकास मंत्री व वर्तमान में रुद्रपुर के विधायक जय प्रकाश निषाद ने शहर के एक व्यक्ति की शिकायत पर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह से जनपद में हुए किट घोटाले की जांच की मांग की थी।
इसके बाद शासन के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने एक फरवरी 2021 में जांच के लिए एडीएम फाइनेंस नागेंद्र सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम की जांच में रैपिड और सिफलिस किट की खरीदारी में घपला सिद्ध हुआ था। इसमें इमीडिएट ऑडिट में ऑडिटर ने 17 लाख रुपये की रिकवरी के लिए अधिकारियों को रिपोर्ट दी थी। मामले में पूर्व सीएमओ पर कार्रवाई के शासन से निर्देश दिए गए थे।
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सूत्रों की मानें तो रैपिड-सिफलिस किट घोटाले से संबंधित फाइल नदारद है। दरअसल, निदेशक प्रशासन गणपति राजा ने सीएमओ डॉ. राजेश झा से घोटाले से संबंधित फाइल की जानकारी मांगी। इस बाबत जब सीएमओ ने कर्मचारियों से फाइल मांगी तो वे एक-दूसरे पर टालने लगे। विभाग में अफरातफरी मच गई। कर्मचारी दो दिन से फाइल ढूंढने में लगे हैं।
2500-2500 किट खरीदी गई थी
स्वास्थ्य विभाग ने जननी सुरक्षा के तहत रैपिड टेस्ट और सिफलिस टेस्ट किट की खरीद यूपीएमसीएल से न करके फर्मों से की थी। सरकारी दर से कई गुना अधिक रेट पर 2500-2500 रैपिड व सिफलिस टेस्ट किट खरीदी गई थी। इसकी खरीद में अनियमितता उजागर होने पर शासन से शिकायत की गई थी। संवाद
डिप्टी सीएम को लिखी चिट्ठी में हैं कई आरोप
पूर्व सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय ने उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को भेजे गए पत्र में कई आरोप लगाए हैं। डॉ. पांडेय ने पत्र में कहा है कि खरीदारी उनके मातहतों ने की। किट खरीद के लिए अकेले वह जिम्मेदार नहीं हैं। बल्कि उनकी उतनी जिम्मेदारी नहीं बनती, जितना किट खरीद और बिल वेरिफाई करने वाले अधिकारियों की। उन्होंने किट खरीद में शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए उनसे भी रिकवरी कराने की मांग की है।
वर्जन
मामला मेरे संज्ञान में ठीक-ठीक नहीं है। जानकारी ली जा रही है। कर्मचारियों को किट खरीदारी से संबंधित पत्रावली निकलवाने के निर्देश दिए गए हैं। अभी शासन से मेरे पास ऑफिसियली इस बाबत कोई सूचना नहीं आई है।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ
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सिफलिस-रैपिड किट घोटाला : कई गुना अधिक दर पर किट खरीदने की हुई थी पुष्टि
देवरिया। जनपद में जननी सुरक्षा योजना के तहत रैपिड और सिफलिस (एचबीएसएजी) किट की खरीदारी में हुई अनियमितता का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। दरअसल, कई गुना अधिक दर पर किट खरीदने की पुष्टि होने के बाद शासन की जांच में दोषी पाए गए तत्कालीन सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय ने उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को पत्र लिखकर किट भुगतान व खरीद में शामिल जिले के तीन अन्य आला अधिकारियों से भी रिकवरी कराने की मांग की है। इस मामले में करीब एक माह पहले निदेशक प्रशासन गणपति राजा ने केस दर्ज कर रिकवरी का आदेश दिया है। डॉ. आलोक पांडेय इसी साल जून में रिटायर हो चुके हैं।
वर्ष 2020-21, 2021-22 में स्वास्थ्य विभाग ने सिफलिस और रैपिड टेस्ट किट क्रमश: 5.48 रुपये व 7.73 रुपये की जगह 80 रुपये में खरीदी गई थी। तत्कालीन पशुधन व दुग्ध विकास मंत्री व वर्तमान में रुद्रपुर के विधायक जय प्रकाश निषाद ने शहर के एक व्यक्ति की शिकायत पर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह से जनपद में हुए किट घोटाले की जांच की मांग की थी।
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इसके बाद शासन के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने एक फरवरी 2021 में जांच के लिए एडीएम फाइनेंस नागेंद्र सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम की जांच में रैपिड और सिफलिस किट की खरीदारी में घपला सिद्ध हुआ था। इसमें इमीडिएट ऑडिट में ऑडिटर ने 17 लाख रुपये की रिकवरी के लिए अधिकारियों को रिपोर्ट दी थी। मामले में पूर्व सीएमओ पर कार्रवाई के शासन से निर्देश दिए गए थे।
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सूत्रों की मानें तो रैपिड-सिफलिस किट घोटाले से संबंधित फाइल नदारद है। दरअसल, निदेशक प्रशासन गणपति राजा ने सीएमओ डॉ. राजेश झा से घोटाले से संबंधित फाइल की जानकारी मांगी। इस बाबत जब सीएमओ ने कर्मचारियों से फाइल मांगी तो वे एक-दूसरे पर टालने लगे। विभाग में अफरातफरी मच गई। कर्मचारी दो दिन से फाइल ढूंढने में लगे हैं।
2500-2500 किट खरीदी गई थी
स्वास्थ्य विभाग ने जननी सुरक्षा के तहत रैपिड टेस्ट और सिफलिस टेस्ट किट की खरीद यूपीएमसीएल से न करके फर्मों से की थी। सरकारी दर से कई गुना अधिक रेट पर 2500-2500 रैपिड व सिफलिस टेस्ट किट खरीदी गई थी। इसकी खरीद में अनियमितता उजागर होने पर शासन से शिकायत की गई थी। संवाद
डिप्टी सीएम को लिखी चिट्ठी में हैं कई आरोप
पूर्व सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय ने उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को भेजे गए पत्र में कई आरोप लगाए हैं। डॉ. पांडेय ने पत्र में कहा है कि खरीदारी उनके मातहतों ने की। किट खरीद के लिए अकेले वह जिम्मेदार नहीं हैं। बल्कि उनकी उतनी जिम्मेदारी नहीं बनती, जितना किट खरीद और बिल वेरिफाई करने वाले अधिकारियों की। उन्होंने किट खरीद में शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए उनसे भी रिकवरी कराने की मांग की है।
वर्जन
मामला मेरे संज्ञान में ठीक-ठीक नहीं है। जानकारी ली जा रही है। कर्मचारियों को किट खरीदारी से संबंधित पत्रावली निकलवाने के निर्देश दिए गए हैं। अभी शासन से मेरे पास ऑफिसियली इस बाबत कोई सूचना नहीं आई है।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ