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सीबीआई जांच में तीन साल से बंद है खनन
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सीबीआई जांच में तीन साल से बंद है खनन
खनन माफिया को संरक्षण देने वालों के करीब पहुंची जांच की आंच
सपा सरकार में नियम को दरकिनार कर किया गया बालू खनन का पट्टा
तत्कालीन डीएम, एडीएम समेत छह लोगों पर सीबीआई दर्ज करा चुकी है केस
सपा सरकार में तैनात बाकी अफसरों का सीबीआई ने खनन विभाग से मांगा ब्योरा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सपा सरकार में नियम को दरकिनार कर खनन कराने और खनन माफियाओं को सहयोग देने वाले पूर्व में तैनात अफसर सीबीआई और ईडी की जांच में फंसते नजर आ रहे हैं। सीबीआई जांच की आंच में तीन साल से खनन जिले में बंद है। इसकी वजह से अवैध खनन प्रशासनिक संरक्षण में खुलेआम हो रहा है। सीबाईआई जांच और सीएम की सख्ती के बाद आरोपी अफसरों की परेशानी और बढ़ती नजर आ रही है। चर्चा है कि जल्द मामले में लिप्त अफसर और कई पट़्टाधारक सीबीआई की गिरफ्त में आ सकते हैं। इसको लेकर खलबली मची हुई है।
सपा सरकार में नियम से हटकर जिले में बालू घाटों का पट्टा अफसरों ने किया और अवैध तरीके से खनन कराने वाले ठेकेदारों का सहयोग किया। शासन के आदेश पर प्रदेश के कई जिलों में सफेद बालू के काले कारनामे की जांच सीबीआई ने शुरू की। जांच में प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर तैनात जिले रहे तत्कालीन भूवैज्ञानिक विजय कुमार मौर्य, खनन अधिकारी की तैनाती पंकज सिंह, डीएम विवेक कुमार, एडीएम राजस्व एवं वित्त डीएस उपाध्याय और पट्टाधारक शारदा यादव, फूलबदन निषाद पर सीबीआई ने केस दर्ज कराया। अब इसी प्रकरण की जांच ईडी ने भी शुरू की है। जांच की आंच तेज होने से खनन माफिया को संरक्षण देने और कानून को दरकिनार कर बालू खनन कराने वाले अफसरों की बेचैन बढ़ गई है। बचाव में अफसर हाथ-पांव मार रहे हैं और सत्ता पक्ष के नेताओं से भी संपर्क कर रहे हैं। इस बाबत खनन अधिकारी उमाकांत ने बताया कि सीबीआई इन अफसरों पर केस दर्ज करा चुकी है। अभी कई और लोगों के नाम सामने आए हैं। इसका ब्योरा सीबीआई को उपलब्ध करा दिया गया है। सीबीआई की जांच टीम जल्द आने वाली है।
कार्रवाई के जद में आए अफसरों की रही है तैनाती
देवरिया। 20 फरवरी 2013 से 8 अक्तूबर 2013 तक भूवैज्ञानिक विजय कुमार मौर्य जिले में तैनात रहे। दोबारा इनकी तैनाती 16 दिसंबर 2015 से 29 जनवरी 2016 तक जिले में रही। खनन अधिकारी पंकज सिंह की तैनाती वर्ष 2012-13 तक तैनाती रही। वहीं, डीएम विवेक कुमार 4 मार्च से 10 जून 2013 तक तैनात रहे। एडीएम वित्त एवं राजस्व डीएस उपाध्याय 3 नवंबर 2012 से 5 अप्रैल 2013 तक जिले में तैनात रहे। इन्हीं अफसरों की तैनाती में नियम से हटकर बालू खनन के लिए पट्टा किया गया है।
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जांच के घेरे में तीन बालू घाट
देवरिया। जिले में नियम को दरकिनार कर कई बालू घाट के पट्टे दिए गए थे। लेकिन प्रथमदृष्टया एनएच से हेतिमपुर तक, कोटवा से रतनपुर तक और सबवत से अहिरौली तक बालू घाट का पट्टा कागज में हेराफेरी कर देने का मामला उजागर हुआ है। इसके अलावा सलेमपुर और बरहज तहसील क्षेत्र के बालू घाटों का सपा सरकार में पट्टा करने वाले अन्य अफसर भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं और बहुत जल्द बेनकाब होंगे।
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खनन माफिया को संरक्षण देने वालों के करीब पहुंची जांच की आंच
सपा सरकार में नियम को दरकिनार कर किया गया बालू खनन का पट्टा
तत्कालीन डीएम, एडीएम समेत छह लोगों पर सीबीआई दर्ज करा चुकी है केस
सपा सरकार में तैनात बाकी अफसरों का सीबीआई ने खनन विभाग से मांगा ब्योरा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सपा सरकार में नियम को दरकिनार कर खनन कराने और खनन माफियाओं को सहयोग देने वाले पूर्व में तैनात अफसर सीबीआई और ईडी की जांच में फंसते नजर आ रहे हैं। सीबीआई जांच की आंच में तीन साल से खनन जिले में बंद है। इसकी वजह से अवैध खनन प्रशासनिक संरक्षण में खुलेआम हो रहा है। सीबाईआई जांच और सीएम की सख्ती के बाद आरोपी अफसरों की परेशानी और बढ़ती नजर आ रही है। चर्चा है कि जल्द मामले में लिप्त अफसर और कई पट़्टाधारक सीबीआई की गिरफ्त में आ सकते हैं। इसको लेकर खलबली मची हुई है।
सपा सरकार में नियम से हटकर जिले में बालू घाटों का पट्टा अफसरों ने किया और अवैध तरीके से खनन कराने वाले ठेकेदारों का सहयोग किया। शासन के आदेश पर प्रदेश के कई जिलों में सफेद बालू के काले कारनामे की जांच सीबीआई ने शुरू की। जांच में प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर तैनात जिले रहे तत्कालीन भूवैज्ञानिक विजय कुमार मौर्य, खनन अधिकारी की तैनाती पंकज सिंह, डीएम विवेक कुमार, एडीएम राजस्व एवं वित्त डीएस उपाध्याय और पट्टाधारक शारदा यादव, फूलबदन निषाद पर सीबीआई ने केस दर्ज कराया। अब इसी प्रकरण की जांच ईडी ने भी शुरू की है। जांच की आंच तेज होने से खनन माफिया को संरक्षण देने और कानून को दरकिनार कर बालू खनन कराने वाले अफसरों की बेचैन बढ़ गई है। बचाव में अफसर हाथ-पांव मार रहे हैं और सत्ता पक्ष के नेताओं से भी संपर्क कर रहे हैं। इस बाबत खनन अधिकारी उमाकांत ने बताया कि सीबीआई इन अफसरों पर केस दर्ज करा चुकी है। अभी कई और लोगों के नाम सामने आए हैं। इसका ब्योरा सीबीआई को उपलब्ध करा दिया गया है। सीबीआई की जांच टीम जल्द आने वाली है।
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कार्रवाई के जद में आए अफसरों की रही है तैनाती
देवरिया। 20 फरवरी 2013 से 8 अक्तूबर 2013 तक भूवैज्ञानिक विजय कुमार मौर्य जिले में तैनात रहे। दोबारा इनकी तैनाती 16 दिसंबर 2015 से 29 जनवरी 2016 तक जिले में रही। खनन अधिकारी पंकज सिंह की तैनाती वर्ष 2012-13 तक तैनाती रही। वहीं, डीएम विवेक कुमार 4 मार्च से 10 जून 2013 तक तैनात रहे। एडीएम वित्त एवं राजस्व डीएस उपाध्याय 3 नवंबर 2012 से 5 अप्रैल 2013 तक जिले में तैनात रहे। इन्हीं अफसरों की तैनाती में नियम से हटकर बालू खनन के लिए पट्टा किया गया है।
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जांच के घेरे में तीन बालू घाट
देवरिया। जिले में नियम को दरकिनार कर कई बालू घाट के पट्टे दिए गए थे। लेकिन प्रथमदृष्टया एनएच से हेतिमपुर तक, कोटवा से रतनपुर तक और सबवत से अहिरौली तक बालू घाट का पट्टा कागज में हेराफेरी कर देने का मामला उजागर हुआ है। इसके अलावा सलेमपुर और बरहज तहसील क्षेत्र के बालू घाटों का सपा सरकार में पट्टा करने वाले अन्य अफसर भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं और बहुत जल्द बेनकाब होंगे।