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बेटी की डोली के बाद उठी मां की अर्थी
देवरिया
Updated Wed, 22 Feb 2017 10:53 PM IST
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shadi
- फोटो : amar ujala
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गौरीबाजार। यह संयोग ही है कि एक तरफ बेटी की डोली उठी तो दूसरी ओर मां की अर्थी। इसी हृदयविदारक घटना का गवाह बना बेलकुंडा गांव। जिस घर के लोग बेटी की शादी में झूम रहे थे।
पलक झपकते ही खुशियों से लबरेज घर में मातम छा गया। खुशियां काफूर हो गईं और रिश्तेदार भी सदमे में आ गए। किसी तरह बेटी ससुराल गई। गौरीबाजार, बेलकुंडा गांव निवासी रामऔतार यादव ने बेटी ममता की शादी अतरडीहा निवासी दुर्गेश यादव के साथ तय की। परिवार के लोग मांगलिक दिन का इंतजार कर रहे थे।
मंगलवार को अतरडीहा निवासी दुर्गेश सेहरा बांधकर बेलकुंडा पहुंचे। बेटी की शादी में लालती देवी पत्नी रामऔतार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। रिश्तेदारों की मेहमाननवाजी हो या घर आई बारात का स्वागत। लालती देवी हर जगह मौजूद थीं।
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देर रात ममता का सिंदूरदान होते ही मां लालती देवी की तबीयत खराब हो गई। परिजन उन्हें लेकर गौरीबाजार पीएचसी पर पहुंचे। इसी दौरान शादी की बाकी रस्म पूरी कर ली गई। मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मां ने दम तोड़ दिया। ममता घबराई थी, वह बार-बार मां के बारे में पूछ रही थी।
किसी तरह घरवाले बेटी को विदा कर दिया। करीब आधे घंटे बाद ही लालती देवी का शव गांव पहुंच गया। खुशी का माहौल गम में बदल गया। शहनाई की धुन मातम में बदल गई। गांव से लेकर रिश्तेदार तक घटना से अवाक थे। लालती देवी का अंतिम संस्कार बड़हलगंज में किया गया।
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पलक झपकते ही खुशियों से लबरेज घर में मातम छा गया। खुशियां काफूर हो गईं और रिश्तेदार भी सदमे में आ गए। किसी तरह बेटी ससुराल गई। गौरीबाजार, बेलकुंडा गांव निवासी रामऔतार यादव ने बेटी ममता की शादी अतरडीहा निवासी दुर्गेश यादव के साथ तय की। परिवार के लोग मांगलिक दिन का इंतजार कर रहे थे।
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मंगलवार को अतरडीहा निवासी दुर्गेश सेहरा बांधकर बेलकुंडा पहुंचे। बेटी की शादी में लालती देवी पत्नी रामऔतार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। रिश्तेदारों की मेहमाननवाजी हो या घर आई बारात का स्वागत। लालती देवी हर जगह मौजूद थीं।
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देर रात ममता का सिंदूरदान होते ही मां लालती देवी की तबीयत खराब हो गई। परिजन उन्हें लेकर गौरीबाजार पीएचसी पर पहुंचे। इसी दौरान शादी की बाकी रस्म पूरी कर ली गई। मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मां ने दम तोड़ दिया। ममता घबराई थी, वह बार-बार मां के बारे में पूछ रही थी।
किसी तरह घरवाले बेटी को विदा कर दिया। करीब आधे घंटे बाद ही लालती देवी का शव गांव पहुंच गया। खुशी का माहौल गम में बदल गया। शहनाई की धुन मातम में बदल गई। गांव से लेकर रिश्तेदार तक घटना से अवाक थे। लालती देवी का अंतिम संस्कार बड़हलगंज में किया गया।