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Deoria Murder Case: सामूहिक हत्याकांड के बाद अब 48 घंटे के अंदर करना होगा भूमि विवाद का निस्तारण, लिस्ट तैयार

Sat, 07 Oct 2023 10:47 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 07 Oct 2023 10:47 AM IST
सार

देवरिया जिले में भूमि विवाद को लेकर अब तक के सबसे बड़े हत्याकांड के बाद शासन भी सख्त हो गया है। इसका असर अब जिले पर भी देखने को मिल रहा है। सभी लंबित प्रकरणों पर आला अफसरों की नजर है। वह अधीनस्थों को सख्त हिदायत दी गई है कि किसी भी मामले में भूमि विवाद का मामला लटकाया न जाए। हर पीड़ित को संभव न्याय मिले।

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Deoria Murder Case now land dispute will have to be resolved within 48 hours After the mass murder
देवरिया सामूहिक हत्याकांड। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

फतेहपुर के लेड़हा टोला में भूमि विवाद में सामूहिक हत्याकांड के बाद अफसरों ने इस तरह के लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर योजना बनाई है। 48 घंटे के भीतर पैमाइश कराना और त्वरित निस्तारण का निर्देश दिया गया है। इसको लेकर समाधान दिवस पर लंबित मामलों की सूची भी तैयार की गई है।
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जिले में भूमि विवाद को लेकर अब तक के सबसे बड़े हत्याकांड के बाद शासन भी सख्त हो गया है। इसका असर अब जिले पर भी देखने को मिल रहा है। सभी लंबित प्रकरणों पर आला अफसरों की नजर है। वह अधीनस्थों को सख्त हिदायत दी गई है कि किसी भी मामले में भूमि विवाद का मामला लटकाया न जाए। हर पीड़ित को संभव न्याय मिले।
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सभी मामलों का संतोषजनक निस्तारण होना चाहिए। जिले में जनवरी माह से सितंबर तक समाधान दिवस पर आए मामलों में राजस्व के 550 मामले आए थे, जिसमें से 253 मामले राजस्व के हैं, जो विभिन्न कारणों से लंबित पड़े हुए हैं। इन मामलों को तहसीलवार सूचीबद्ध कर निस्तारण करने की योजना बनाई गई है।
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जबकि, दूसरी तरफ जिले में राजस्व के लंबित 28 हजार वादों पर भी अफसरों ने निस्तारण के लिए खाका तैयार किया है। सभी तहसीलवार वादों को हर माह 30 से 35 का लक्ष्य बनाकर एक एसडीएम निस्तारित करेंगे। हालांकि हाल के दिनों में यह देखा जाए तो जिलाधिकारी ने सबसे अधिक राजस्व वादों का निस्तारण किया है। इसी तरह मुख्य राजस्व अधिकारी न्यायलय के वाद काफी संख्या में निस्तारित किए गए हैं।

हर महीने 30 से 35 वादों का निस्तारण किया गया है, जो काफी दिनों से लंबित थे। सीआरओ रजनीश राय ने बताया कि राजस्व वाद को लेकर गंभीरता बरती जा रही है जो लंबित मामले में है उनके निस्तारण की योजना बनाई गई है।

आईजीआरएस के निस्तारण में गंभीर नहीं हैं कुछ अफसर
आईजीआरएस के मामलों के निस्तारण को लेकर कई बार लापरवाही सामने आ चुकी है। जनवरी से सितंबर तक आठ ऐसे अधिकारी हैं जिनका वेतन भी रोका जा चुका है।

 

समीक्षा के दौरान पाया गया था कि निस्तारण में लापरवाही बरते हैं जिनके कारण समयबद्ध तरीके से मामला निस्तारित नहीं हो सका है। जबकि दूसरी तरफ यह भी देखने को मिलता है कि पुलिस से संबंधित अधिकांश मामलों में हल्का सिपाही को भेजकर जांच कराई जाती है। इसके कारण लोगों की शिकायत होती है कि मामला निस्तारित न होने के बाद भी निस्तारण की रिपोर्ट लगा दी जाती है।

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