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अविश्वास प्रस्ताव के लिए जिला पंचायत सदस्यों ने दिया नोटिस
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जिला पंचायत सदस्यो ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सीडीओ को मांग पत्र सौपा।
- फोटो : DEORIA
अविश्वास प्रस्ताव के लिए ने दिया नोटिस
31 से अधिक जिला पंचायत सदस्यों के हैं हस्ताक्षर, अविश्वास के लिए 29 की है जरूरत
रामप्रवेश के जेल जाने के बाद शासन के निर्देश पर कार्यवाहक अध्यक्ष हैं डीएम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए सोमवार को जिला पंचायत सदस्यों ने डीएम की गैर मौजूदगी में सीडीओ और एडीएम प्रशासन को नोटिस दिया। प्रस्ताव पारित करने में 31 से अधिक सदस्यों ने समर्थन दिया है।
दीपक मणि की जमीन बैनामा फर्जी तरीके से कराने के मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव समेत पांच लोगों को पुलिस ने जेल भेजा था। उनके जेल जाने के बाद शासन ने डीएम को उनके कार्यों को निर्वहन करने के लिए नामित किया है। तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार के कार्यकाल में जिला पंचायत सदस्यों ने अविश्वास लाने के लिए प्रयास किया था, लेकिन सदस्य दो गुटों में बंट गए और अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। एक सप्ताह में दो बार जिला पंचायत सदस्यों ने बैठक की और अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई। 56 जिला पंचायत सदस्यों में से 31 जिला पंचायत सदस्यों ने अपना समर्थन दिया है। सपा के जिला पंचायत सदस्य सिकंदर यादव के नेतृत्व में सदस्य डीएम कार्यालय पर पहुंचे और काफी इंतजार के बाद डीएम के नहीं होने पर सीडीओ शिवशरणप्पा और एडीएम प्रशासन राकेश पटेल को नोटिस दिया।
कभी थे करीबी, अब बना लिए दूरी
अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस देने शाम को जिला पंचायत सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। इसमें कई ऐसे जिला पंचायत सदस्य नजर आए जिनकी कभी गिनती रामप्रवेश यादव के करीबियों में होती थी। उनके जेल जाने के बाद भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए बनी योजना से दूर रहे और उसका विरोध किए थे। जेल में रहने के बाद भी रामप्रवेश यादव ने अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सदस्यों को अपनी योजना में सफल नहीं होने दिया।
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उपेक्षा के बाद एकजुट हुए सदस्य
जिला पंचायत के कार्यवाहक अध्यक्ष डीएम हैं। डीएम के कार्यवाहक अध्यक्ष रहने के दौरान जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में लिए गए कार्यों के कई प्रस्ताव खारिज हो गए हैं। विरोध के बाद भी सदस्यों की सुनवाई नहीं हो रही है। उपेक्षा का दंश झेल रहे सदस्य एकजुट हुए और अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए बिगुल फूंक दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला पंचायत का टेंडर सेम रेट पर सेटिंग के तहत खुल गया। ऐसा होना धांधली की श्रेणी में आता है।
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31 से अधिक जिला पंचायत सदस्यों के हैं हस्ताक्षर, अविश्वास के लिए 29 की है जरूरत
रामप्रवेश के जेल जाने के बाद शासन के निर्देश पर कार्यवाहक अध्यक्ष हैं डीएम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए सोमवार को जिला पंचायत सदस्यों ने डीएम की गैर मौजूदगी में सीडीओ और एडीएम प्रशासन को नोटिस दिया। प्रस्ताव पारित करने में 31 से अधिक सदस्यों ने समर्थन दिया है।
दीपक मणि की जमीन बैनामा फर्जी तरीके से कराने के मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव समेत पांच लोगों को पुलिस ने जेल भेजा था। उनके जेल जाने के बाद शासन ने डीएम को उनके कार्यों को निर्वहन करने के लिए नामित किया है। तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार के कार्यकाल में जिला पंचायत सदस्यों ने अविश्वास लाने के लिए प्रयास किया था, लेकिन सदस्य दो गुटों में बंट गए और अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। एक सप्ताह में दो बार जिला पंचायत सदस्यों ने बैठक की और अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई। 56 जिला पंचायत सदस्यों में से 31 जिला पंचायत सदस्यों ने अपना समर्थन दिया है। सपा के जिला पंचायत सदस्य सिकंदर यादव के नेतृत्व में सदस्य डीएम कार्यालय पर पहुंचे और काफी इंतजार के बाद डीएम के नहीं होने पर सीडीओ शिवशरणप्पा और एडीएम प्रशासन राकेश पटेल को नोटिस दिया।
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कभी थे करीबी, अब बना लिए दूरी
अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस देने शाम को जिला पंचायत सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। इसमें कई ऐसे जिला पंचायत सदस्य नजर आए जिनकी कभी गिनती रामप्रवेश यादव के करीबियों में होती थी। उनके जेल जाने के बाद भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए बनी योजना से दूर रहे और उसका विरोध किए थे। जेल में रहने के बाद भी रामप्रवेश यादव ने अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सदस्यों को अपनी योजना में सफल नहीं होने दिया।
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उपेक्षा के बाद एकजुट हुए सदस्य
जिला पंचायत के कार्यवाहक अध्यक्ष डीएम हैं। डीएम के कार्यवाहक अध्यक्ष रहने के दौरान जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में लिए गए कार्यों के कई प्रस्ताव खारिज हो गए हैं। विरोध के बाद भी सदस्यों की सुनवाई नहीं हो रही है। उपेक्षा का दंश झेल रहे सदस्य एकजुट हुए और अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए बिगुल फूंक दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला पंचायत का टेंडर सेम रेट पर सेटिंग के तहत खुल गया। ऐसा होना धांधली की श्रेणी में आता है।