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बंधों पर कटान कर रहीं नदियां
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91- पिड़रा करनपुर बांध को काट रही गोर्रा नदी
- फोटो : DEORIA
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संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर/एकौना। नदियों के जलस्तर में गिरावट के बाद कटान से कछार और दोआबा के बंधे जगह जगह दरक कर नदी में गिर रहे हैं। बांधों को बचाने के लिए सिंचाई विभाग की युक्ति काम नहीं आ रही। वहीं खतरे के निशान के ऊपर बह रही राप्ती और गोर्रा से बाढ़ का खतरा बरकरार है।
सोमवार को पिड़रा करनपुर बांध की मिट्टी कटकर गोर्रा नदी में गिरने लगी। करीब पांच मीटर तक बंधा नदी में ढ़हता देख सिंचाई विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया। आनन फानन में सिंचाई विभाग ने बल्लियों और रस्सी के सहारे बांध के कटान को रोकने की कोशिश शुरू कर दी। इसके बाद भी देर शाम तक बंधे पर कटान जारी रहा। सिलहटा गांव के समीप खेती योग्य भूमि को बर्बाद कर चुकी गोर्रा बांध को काट रही है। गायघाट गांव के समीप बांध काटते हुए राप्ती नदी आबादी की तरफ तेजी से बढ़ रही है। यहां गांव और बंधे को बचाने के लिए सिंचाई विभाग पारकोपाइन डाल कटान रोक रहा था, पर सफलता नहीं मिली। दो मीटर बांध कट जाने के बाद अब गैबीयान से कटान रोका जा रहा है। नायलान की रस्सी की जाली बनाकर बोल्डर के सहारे कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है। राप्ती नदी लगातार बंधे को अपने आगोश में ले रही है। सेमरौना नकईल बांध से सटे तलशपुरवा गांव की चार मकानों के नदी में विलीन होने का खतरा बना है। पांडेय माझा भीमसेन बांध पर गोर्रा नदी के कटान से स्थिति नाजुक बनी है। अवर अभियंता सचिन अग्रवाल ने कहा कि बांध को बचाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। जलस्तर कम होने से कटान रोकने में दिक्कतें आ रहीं हैं।
बचाव के नाम पर लूट करा रही भाजपा: खोखा सिंह
रुद्रपुर। सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नरायण सिंह उर्फ खोखा सिंह ने सोमवार को गायघाट बंधे पर हो रही कटान का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग पानी में रुपया डूबा रहा है। बांध बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। बंधे पर कोई काम नहीं दिख रहा। अब कटान होने पर बाढ़ बचाव कार्य के नाम पर घोटाले किए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान हरेंद्र सिंह त्यागी, कृष्णा यादव, रामनिवास यादव, महंथ यादव, आजम शेख, शैलेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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सरयू के जलस्तर में आई तेजी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू के जलस्तर में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है। पिछले तीन दिनों में जलस्तर एक दिन स्थिर होने के बाद नदी में 13 सेमी की बढ़त दर्ज की गई है। नदी के निरंतर तेजी को लेकर तटवर्ती गांवों के लोग सहमे हुए हैं।
सोमवार को थाना घाट पर बने मीटर गेज पर नदी खतरे के निशान 66.50 से एक मीटर आठ सेमी ऊपर बह रही थी। पिछले दिनों नदी उच्चतम 68.15 मीटर तक पहुंची थी। नदी के पीछे हटने से लोगों ने कुछ हद तक राहत महसूस की थी। एक बार फिर उसके जलस्तर में तेजी आने से नदी बढ़त बना रही है। जो 67.58 मीटर पर बह रही है। सरयू में आए सैलाब से राप्ती भी उफान पर है। नदी पार के परसियां, विशुनपुर देवार के 26 टोले पानी से घिरे हुए हैं। जबकि भदिला प्रथम टापू बना हुआ है। जलस्तर में आई तेजी से तटवर्ती गांवों के लोग रतजगा कर रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में उठ दुर्गंध से जीवन मुहाल
बरहज। सरयू और राप्ती नदी में आए सैलाब से बाढ़ का पानी खेतों और नालों के रास्ते दर्जनों गांवों में लोगों के घरों तक पहुंच गया था। लोगों में जेहन में 1998 का खौफ ताजा होने लगा था। बाढ़ का पानी घरों और खेतों से पीछे हटने के बाद जगह-जगह जलजमाव और उठने वाली सड़ांध ने लोगों का जीवन मुहाल कर दिया है। गांवों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। कुछ गांवों में लोग वायरल बुखार की चपेट में आ गए हैं। वहीं पशुओं में भी बीमारी के संभावना बढ़ गई है। एसडीएम संजीव कुमार यादव ने बताया कि चिकित्सकीय टीमों को गांवों में भेजकर मवेशियों का टीकाकरण कराया जा रहा है। स्वास्थ्य टीम ने बाढ़ प्रभावित कुछ गांवों में जांच कर दवाइयां बांटी हैं।
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रुद्रपुर/एकौना। नदियों के जलस्तर में गिरावट के बाद कटान से कछार और दोआबा के बंधे जगह जगह दरक कर नदी में गिर रहे हैं। बांधों को बचाने के लिए सिंचाई विभाग की युक्ति काम नहीं आ रही। वहीं खतरे के निशान के ऊपर बह रही राप्ती और गोर्रा से बाढ़ का खतरा बरकरार है।
सोमवार को पिड़रा करनपुर बांध की मिट्टी कटकर गोर्रा नदी में गिरने लगी। करीब पांच मीटर तक बंधा नदी में ढ़हता देख सिंचाई विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया। आनन फानन में सिंचाई विभाग ने बल्लियों और रस्सी के सहारे बांध के कटान को रोकने की कोशिश शुरू कर दी। इसके बाद भी देर शाम तक बंधे पर कटान जारी रहा। सिलहटा गांव के समीप खेती योग्य भूमि को बर्बाद कर चुकी गोर्रा बांध को काट रही है। गायघाट गांव के समीप बांध काटते हुए राप्ती नदी आबादी की तरफ तेजी से बढ़ रही है। यहां गांव और बंधे को बचाने के लिए सिंचाई विभाग पारकोपाइन डाल कटान रोक रहा था, पर सफलता नहीं मिली। दो मीटर बांध कट जाने के बाद अब गैबीयान से कटान रोका जा रहा है। नायलान की रस्सी की जाली बनाकर बोल्डर के सहारे कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है। राप्ती नदी लगातार बंधे को अपने आगोश में ले रही है। सेमरौना नकईल बांध से सटे तलशपुरवा गांव की चार मकानों के नदी में विलीन होने का खतरा बना है। पांडेय माझा भीमसेन बांध पर गोर्रा नदी के कटान से स्थिति नाजुक बनी है। अवर अभियंता सचिन अग्रवाल ने कहा कि बांध को बचाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। जलस्तर कम होने से कटान रोकने में दिक्कतें आ रहीं हैं।
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बचाव के नाम पर लूट करा रही भाजपा: खोखा सिंह
रुद्रपुर। सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नरायण सिंह उर्फ खोखा सिंह ने सोमवार को गायघाट बंधे पर हो रही कटान का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग पानी में रुपया डूबा रहा है। बांध बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। बंधे पर कोई काम नहीं दिख रहा। अब कटान होने पर बाढ़ बचाव कार्य के नाम पर घोटाले किए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान हरेंद्र सिंह त्यागी, कृष्णा यादव, रामनिवास यादव, महंथ यादव, आजम शेख, शैलेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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सरयू के जलस्तर में आई तेजी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू के जलस्तर में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है। पिछले तीन दिनों में जलस्तर एक दिन स्थिर होने के बाद नदी में 13 सेमी की बढ़त दर्ज की गई है। नदी के निरंतर तेजी को लेकर तटवर्ती गांवों के लोग सहमे हुए हैं।
सोमवार को थाना घाट पर बने मीटर गेज पर नदी खतरे के निशान 66.50 से एक मीटर आठ सेमी ऊपर बह रही थी। पिछले दिनों नदी उच्चतम 68.15 मीटर तक पहुंची थी। नदी के पीछे हटने से लोगों ने कुछ हद तक राहत महसूस की थी। एक बार फिर उसके जलस्तर में तेजी आने से नदी बढ़त बना रही है। जो 67.58 मीटर पर बह रही है। सरयू में आए सैलाब से राप्ती भी उफान पर है। नदी पार के परसियां, विशुनपुर देवार के 26 टोले पानी से घिरे हुए हैं। जबकि भदिला प्रथम टापू बना हुआ है। जलस्तर में आई तेजी से तटवर्ती गांवों के लोग रतजगा कर रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में उठ दुर्गंध से जीवन मुहाल
बरहज। सरयू और राप्ती नदी में आए सैलाब से बाढ़ का पानी खेतों और नालों के रास्ते दर्जनों गांवों में लोगों के घरों तक पहुंच गया था। लोगों में जेहन में 1998 का खौफ ताजा होने लगा था। बाढ़ का पानी घरों और खेतों से पीछे हटने के बाद जगह-जगह जलजमाव और उठने वाली सड़ांध ने लोगों का जीवन मुहाल कर दिया है। गांवों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। कुछ गांवों में लोग वायरल बुखार की चपेट में आ गए हैं। वहीं पशुओं में भी बीमारी के संभावना बढ़ गई है। एसडीएम संजीव कुमार यादव ने बताया कि चिकित्सकीय टीमों को गांवों में भेजकर मवेशियों का टीकाकरण कराया जा रहा है। स्वास्थ्य टीम ने बाढ़ प्रभावित कुछ गांवों में जांच कर दवाइयां बांटी हैं।