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जिला अस्पताल में दवाओं की किल्लत, खिड़की से निराश लौट रहे मरीज
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जिला अस्पताल में दवाओं की किल्लत, खिड़की से निराश लौट रहे मरीज
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में दवाओं की किल्लत बरकरार है। हृदय रोग, लिवर, किडनी, बाल रोग, न्यूरो, स्किन, ईएनटी, आर्थो, थायराइड, एंटी एलर्जी की दवाओं का टोटा है। स्टोर के बाहर 246 दवाओं की सूची चस्पा हैं। ये दवाएं हमेशा स्टोर में होनी चाहिए, पर इनमें विभिन्न रोगों की केवल 80 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। इसमें भी सिरप और ग्लूकोज की बोतल, मरहम पट्टी भी शामिल है। डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं, वे नहीं मिल पा रही है। इस वजह से बाहर से दवा खरीदना मरीजों की मजबूरी हो गई है।
जिला अस्पताल के स्टोर में जरूरत की दवाओं की कमी है। हालत यह है कि जिन दवाओं को होना चाहिए उनकी कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। घंटों लाइन में लगने के बाद मरीजों को महज पर्चे पर लिखी गई पांच-छह दवाओं में केवल से दो से तीन दवाएं ही उपलब्ध हो पा रही हैं। इसके कारण मरीजों को बाहरी दुकानों का सहारा लेनेे पड़ रहा है। इस वजह से मुफ्त दवाओं से मरीज दूर हो जा रहे हैं। कई ऐसे गरीब मरीज है, जिनके पास बाहर की दवा खरीदने के लिए रुपये न होने पर बिना दवा के ही घर चले जाते हैं।
इन रोगों की दवाओं की कमी
देवरिया। अस्पताल में हार्ट, लिवर, किडनी, बाल रोग, न्यूरो, स्किन, ईएनटी, आर्थो, थायराइड, एंटी एलर्जी, ट्यूब, जैसी दवाओं की कमी लगातार बनी हुई है। ये दवाएं महंगी होती हैं और लोग बाहर से खरीदने के लिए मजबूर हैं। इसके कारण सिविल लाइंस और शहर में स्थित अन्य मेडिकल दुकानों पर मरीजों और उनके तीमारदारों की भीड़ जुटी रह रही है। मरीज खुद बताते हैं कि अस्पताल में दवा कम मिलने के कारण बाहर का सहारा लेना पड़ा रहा है।
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एक तो गर्मी में एक घंटे तक लाइन में खड़ा रहा हूं। जब दवा लेने की बारी आई तो पता चला कि पर्चे में लिखी गई दवाएं नहीं हैं। इसके कारण बाहर से दवा खरीदनी मजबूरी हो गई है। घर से यह सोच कर चला था कि अस्पताल में इलाज मुफ्त में होगा लेकिन दवा न मिलने रुपये खर्च करने पड़े। -लालजी, पंसरही
डाक्टर ने तो दवा लिख दी लेकिन जब काउंटर पर गया तो पता चला कि दवाएं नहीं हैं। इसके चलते बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। जिम्मेदार अफसरों को सभी प्रकार की दवाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। -राम मनोहर, लक्ष्मीपुर
पांच दवाएं लिखी गई थीं। उनमें दो दवाएं ही मिली हैं। जो दवा नहीं मिली हैं, वे काफी महंगी हैं। अस्पताल में केवल मामूली दवाएं ही मिल रही हैं। गंभीर रोगों की दवाओं की कमी है। इसके कारण लोगों को दिक्कत आ रही है। -प्रदीप जायसवाल, नौतन
अस्पताल के डाक्टर की लिखी सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं। हमारी पर्ची पर छह दवाएं लिखी गई थी। इसमें केवल तीन दवाएं मिली हैं। बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी मजबूरी है। इससे जेब पर असर पड़ रहा है। पूरा दिन गुजारने के बाद दवा के लिए परेशान होना पड़ा। -शंभू यादव, करमहा
अस्पताल में आवश्यक दवाओं की कमी नहीं है। जो दवाएं मौजूद नहीं हैं, उनको मंगाने के लिए डिमांड भेजी गई है। मरीजों को दिक्कत न हो, इसका पूरा ख्याल किया जाता है। -डॉ. एचके मिश्र, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक
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देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में दवाओं की किल्लत बरकरार है। हृदय रोग, लिवर, किडनी, बाल रोग, न्यूरो, स्किन, ईएनटी, आर्थो, थायराइड, एंटी एलर्जी की दवाओं का टोटा है। स्टोर के बाहर 246 दवाओं की सूची चस्पा हैं। ये दवाएं हमेशा स्टोर में होनी चाहिए, पर इनमें विभिन्न रोगों की केवल 80 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। इसमें भी सिरप और ग्लूकोज की बोतल, मरहम पट्टी भी शामिल है। डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं, वे नहीं मिल पा रही है। इस वजह से बाहर से दवा खरीदना मरीजों की मजबूरी हो गई है।
जिला अस्पताल के स्टोर में जरूरत की दवाओं की कमी है। हालत यह है कि जिन दवाओं को होना चाहिए उनकी कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। घंटों लाइन में लगने के बाद मरीजों को महज पर्चे पर लिखी गई पांच-छह दवाओं में केवल से दो से तीन दवाएं ही उपलब्ध हो पा रही हैं। इसके कारण मरीजों को बाहरी दुकानों का सहारा लेनेे पड़ रहा है। इस वजह से मुफ्त दवाओं से मरीज दूर हो जा रहे हैं। कई ऐसे गरीब मरीज है, जिनके पास बाहर की दवा खरीदने के लिए रुपये न होने पर बिना दवा के ही घर चले जाते हैं।
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इन रोगों की दवाओं की कमी
देवरिया। अस्पताल में हार्ट, लिवर, किडनी, बाल रोग, न्यूरो, स्किन, ईएनटी, आर्थो, थायराइड, एंटी एलर्जी, ट्यूब, जैसी दवाओं की कमी लगातार बनी हुई है। ये दवाएं महंगी होती हैं और लोग बाहर से खरीदने के लिए मजबूर हैं। इसके कारण सिविल लाइंस और शहर में स्थित अन्य मेडिकल दुकानों पर मरीजों और उनके तीमारदारों की भीड़ जुटी रह रही है। मरीज खुद बताते हैं कि अस्पताल में दवा कम मिलने के कारण बाहर का सहारा लेना पड़ा रहा है।
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एक तो गर्मी में एक घंटे तक लाइन में खड़ा रहा हूं। जब दवा लेने की बारी आई तो पता चला कि पर्चे में लिखी गई दवाएं नहीं हैं। इसके कारण बाहर से दवा खरीदनी मजबूरी हो गई है। घर से यह सोच कर चला था कि अस्पताल में इलाज मुफ्त में होगा लेकिन दवा न मिलने रुपये खर्च करने पड़े। -लालजी, पंसरही
डाक्टर ने तो दवा लिख दी लेकिन जब काउंटर पर गया तो पता चला कि दवाएं नहीं हैं। इसके चलते बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। जिम्मेदार अफसरों को सभी प्रकार की दवाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। -राम मनोहर, लक्ष्मीपुर
पांच दवाएं लिखी गई थीं। उनमें दो दवाएं ही मिली हैं। जो दवा नहीं मिली हैं, वे काफी महंगी हैं। अस्पताल में केवल मामूली दवाएं ही मिल रही हैं। गंभीर रोगों की दवाओं की कमी है। इसके कारण लोगों को दिक्कत आ रही है। -प्रदीप जायसवाल, नौतन
अस्पताल के डाक्टर की लिखी सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं। हमारी पर्ची पर छह दवाएं लिखी गई थी। इसमें केवल तीन दवाएं मिली हैं। बाकी दवाएं बाहर से खरीदनी मजबूरी है। इससे जेब पर असर पड़ रहा है। पूरा दिन गुजारने के बाद दवा के लिए परेशान होना पड़ा। -शंभू यादव, करमहा
अस्पताल में आवश्यक दवाओं की कमी नहीं है। जो दवाएं मौजूद नहीं हैं, उनको मंगाने के लिए डिमांड भेजी गई है। मरीजों को दिक्कत न हो, इसका पूरा ख्याल किया जाता है। -डॉ. एचके मिश्र, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक