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पुजारी प्रयागदास हत्याकांड का पर्दाफाश
देवरिया
Updated Mon, 11 Jul 2016 10:53 PM IST
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पुजारी प्रयाग दास हत्याकांड के पर्दाफाश का पुलिस ने दावा किया है।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। पैकौली कुटी के मुख्य पुजारी प्रयाग दास हत्याकांड के पर्दाफाश का पुलिस ने दावा किया है। पुलिस का कहना है कि मूर्तियों की चोरी हत्या की घटना को डायवर्ट करने के लिए की गई थी। हालांकि मूर्तियों की बरामदगी नहीं होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस आरोपियों केे लाई डिटेक्टर के सामने आरोपियों को पेश करने की तैयारी में है।
पुलिस लाइंस में प्रेसवार्ता के दौरान एसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि 31 मई की सुबह पैकौली कुुटी के मुख्य पुजारी प्रयागदास की चाकू से हत्या करके मूर्तियों को चोरी कर लिया गया था। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ हत्या और चोरी का केस दर्ज हुआ। पर्दाफाश के लिए कई टीमों का गठन किया गया।
जांच और फोरेंसिक टीम की मदद से परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने भलुअनी, नकडीहा निवासी धनंजय तिवारी उर्फ नन्हें को गिरफ्तार किया। उसने पूछताछ के दौरान हत्या की बात स्वीकार की और घटना में शामिल आरोपियों का भी नाम बताया। एसपी ने कहा कि जांच में पता चला कि कुटी पर धनंजय तिवारी की गतिविधियों को लेकर प्रयागदास विरोध करते थे।
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जबकि धनंजय कुटी के कर्मचारी दयाराम का रिश्ते में भांजा है। धनंजय की नाराजगी को भुनाने के लिए काशीनाथ मिश्र उसके करीब आ गए। काशीनाथ मिश्र पहले मंदिर के मुख्य पुजारी थे। मंदिर प्रशासन ने काशीनाथ मिश्र की गतिविधियों को देखकर हटा दिया था।
बावजूद इसके काशीनाथ मिश्र फिर से मुख्य पुजारी बनने का ख्वाब देख रहे थे। पड़ताल में पता चला कि मुख्य पुजारी प्रयागदास ने अगया गांव निवासी शिवशंकर की पत्नी को चार हजार रुपये उधार दिए थे। रुपये मांगने के बहाने मुख्य पुजारी शिवशंकर के घर अक्सर आते जाते थे।
उनका परिवार के सदस्यों से मधुर संबंध बन गए थे। यह बात शिवशंकर को खटक रही थी। उसने गांव के करीबी मित्र रामप्रवेश सिंह को पुजारी और पत्नी के बारे में जानकारी दी और उसने काशीनाथ मिश्र और धनंजय तिवारी को भी भड़काया और कहा कि पुजारी को रास्ते से हटा दिया जाए तो सब फायदे में रहेंगे। 20 मई को मंदिर के बगीचे में शिवशंकर, रामप्रवेश, काशीनाथ मिश्र और धनंजय तिवारी ने पुजारी के हत्या की योजना बनाई। हत्या में प्रयोग होने वाला चाकू काशीनाथ बिहार से लाए थे। योजना के तहत पुजारी काशीनाथ मिश्र घटना की रात मंदिर से बाहर सोने चले गए।
जबकि शिवशंकर, रामप्रवेश और धनंजय पीछे से दीवार फांदकर अंदर दाखिल हुए। मंदिर के आंगन में सो रहे मुख्य पुजारी प्रयागदास पर चाकू से हमला कर हत्या कर दी। एसपी ने बताया कि हत्या को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने मूर्ति चोरी की। लेकिन सबसे कीमती मूर्ति हनुमानजी की थी। उसे हाथ तक नहीं लगाया। उन्हें पता था कि हनुमान जी की मूर्ति चोरी होने से पूजापाठ प्रभावित होगा।
मूर्तियों को चोरी करने के बाद मंदिर के प्राचीन पोखरे में उसे छुपा दिया। एसपी ने बताया कि पहले दिन ही शिवशंकर और रामप्रवेश को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। जब उन्हें छोड़ा गया तो वह पोखरे से मूर्तियों को हटा दिए क्योंकि धनंजय तिवारी ने पूछताछ के दौरान बताया कि मूर्तियों की निशानदेही के लिए पोखरे में त्रिशूल रखा गया है। जिस पुलिस ने बरामद किया।
पुलिस ने हत्या में शामिल धनंजय तिवारी उर्फ नन्हें, रामप्रवेश सिंह, शिवशंकर और पूर्व पुजारी काशीनाथ मिश्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शिवशंकर टप्पेबाज किस्म का है। वह नेपाल में पकड़ा गया था। रुपये दुगना करने के नाम पर ठगी करता है।
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पुलिस लाइंस में प्रेसवार्ता के दौरान एसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि 31 मई की सुबह पैकौली कुुटी के मुख्य पुजारी प्रयागदास की चाकू से हत्या करके मूर्तियों को चोरी कर लिया गया था। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ हत्या और चोरी का केस दर्ज हुआ। पर्दाफाश के लिए कई टीमों का गठन किया गया।
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जांच और फोरेंसिक टीम की मदद से परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने भलुअनी, नकडीहा निवासी धनंजय तिवारी उर्फ नन्हें को गिरफ्तार किया। उसने पूछताछ के दौरान हत्या की बात स्वीकार की और घटना में शामिल आरोपियों का भी नाम बताया। एसपी ने कहा कि जांच में पता चला कि कुटी पर धनंजय तिवारी की गतिविधियों को लेकर प्रयागदास विरोध करते थे।
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जबकि धनंजय कुटी के कर्मचारी दयाराम का रिश्ते में भांजा है। धनंजय की नाराजगी को भुनाने के लिए काशीनाथ मिश्र उसके करीब आ गए। काशीनाथ मिश्र पहले मंदिर के मुख्य पुजारी थे। मंदिर प्रशासन ने काशीनाथ मिश्र की गतिविधियों को देखकर हटा दिया था।
बावजूद इसके काशीनाथ मिश्र फिर से मुख्य पुजारी बनने का ख्वाब देख रहे थे। पड़ताल में पता चला कि मुख्य पुजारी प्रयागदास ने अगया गांव निवासी शिवशंकर की पत्नी को चार हजार रुपये उधार दिए थे। रुपये मांगने के बहाने मुख्य पुजारी शिवशंकर के घर अक्सर आते जाते थे।
उनका परिवार के सदस्यों से मधुर संबंध बन गए थे। यह बात शिवशंकर को खटक रही थी। उसने गांव के करीबी मित्र रामप्रवेश सिंह को पुजारी और पत्नी के बारे में जानकारी दी और उसने काशीनाथ मिश्र और धनंजय तिवारी को भी भड़काया और कहा कि पुजारी को रास्ते से हटा दिया जाए तो सब फायदे में रहेंगे। 20 मई को मंदिर के बगीचे में शिवशंकर, रामप्रवेश, काशीनाथ मिश्र और धनंजय तिवारी ने पुजारी के हत्या की योजना बनाई। हत्या में प्रयोग होने वाला चाकू काशीनाथ बिहार से लाए थे। योजना के तहत पुजारी काशीनाथ मिश्र घटना की रात मंदिर से बाहर सोने चले गए।
जबकि शिवशंकर, रामप्रवेश और धनंजय पीछे से दीवार फांदकर अंदर दाखिल हुए। मंदिर के आंगन में सो रहे मुख्य पुजारी प्रयागदास पर चाकू से हमला कर हत्या कर दी। एसपी ने बताया कि हत्या को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने मूर्ति चोरी की। लेकिन सबसे कीमती मूर्ति हनुमानजी की थी। उसे हाथ तक नहीं लगाया। उन्हें पता था कि हनुमान जी की मूर्ति चोरी होने से पूजापाठ प्रभावित होगा।
मूर्तियों को चोरी करने के बाद मंदिर के प्राचीन पोखरे में उसे छुपा दिया। एसपी ने बताया कि पहले दिन ही शिवशंकर और रामप्रवेश को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। जब उन्हें छोड़ा गया तो वह पोखरे से मूर्तियों को हटा दिए क्योंकि धनंजय तिवारी ने पूछताछ के दौरान बताया कि मूर्तियों की निशानदेही के लिए पोखरे में त्रिशूल रखा गया है। जिस पुलिस ने बरामद किया।
पुलिस ने हत्या में शामिल धनंजय तिवारी उर्फ नन्हें, रामप्रवेश सिंह, शिवशंकर और पूर्व पुजारी काशीनाथ मिश्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शिवशंकर टप्पेबाज किस्म का है। वह नेपाल में पकड़ा गया था। रुपये दुगना करने के नाम पर ठगी करता है।