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मुकदमे के गवाह को बना दिया विवेचक

Fri, 21 Oct 2016 10:31 PM IST
देवरिया
देवरिया Updated Fri, 21 Oct 2016 10:31 PM IST
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Observer to witness the trial made
police - फोटो : amar ujala
नीलांबुज मिश्र
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सलेमपुर। पुलिस की चूक से मेहरौना में हुए बवाल के बाद की गई कार्रवाई पर शुरू से सवाल खड़े हो रहे हैं, ऐसा होना लाजमी भी है। लार-मेहरौना कांड में एसओ की तहरीर पर जो केस दर्ज हुए, उसमें सलेमपुर के प्रभारी कोतवाल गवाह हैं। अब नियम को ताख पर रख उन्हीं को विवेचक बना दिया गया है। इसकी चर्चा आम लोगों के अलावा पुलिस महकमे में भी है।

मूर्ति विसर्जन के दौरान जुलूस में 15 अक्टूबर की रात को लार के मेहरौना में बवाल और आगजनी हो गई थी। पुलिस ने बर्बरता का परिचय देते हुए जुलूस में शामिल लोगों को दौड़ाकर पीटा था। लोगों के तरफ से किए गए पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
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सरकारी वाहनों के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस दौरान सर्किल के अलावा जनपद के कई थानेदार मौजूद रहे। लार एसओ अंशुमान यदुवंशी की तहरीर पर 68 नामजद और करीब 500 अज्ञात लोगों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ। सलेमपुर के प्रभारी कोतवाल अशोक यादव और खुखुंदू एसओ नीतिश कुमार को गवाह बनाया गया।
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पुलिस आनन-फानन में कानून भूल गई और सलेमपुर के प्रभारी कोतवाल अशोक यादव को मुकदमा के विवेचना की कमान दे दी, जो नियम खिलाफ है। लार कांड में पुलिस अपनी एक गलती छिपाने के लिए गलती पर गलती किए जा रही है, फिर दावा ये कि हमने सब कुछ संभाल लिया।
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