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मूर्ति विसर्जन में बवाल की जांच में आई तेजी
deoria
Updated Wed, 11 Oct 2017 11:14 PM IST
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पुलिस के जवान
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया।
लार में मूर्ति विसर्जन और नारियल फोड़ जुलूस के दौरान बवाल में दर्ज हुए मुकदमे की विवेचना की रफ्तार तेज हो गई है। ठंडे बस्ते में पड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने ऐसा निर्देश विवेचकों को दी है। इसमें लापरवाही बरतने वाले विवेचकों पर भी गाज गिर सकती है।
विधायक ने भी शासन में निर्देश पर लोगों का नाम मुकदमे से निकालने के लिए मांग की है। पिछले साल लार में नारियल फोड़ जुलूस में बवाल और मेहरौना में मूर्ति विसर्जन के दौरान दंगा हो गया था।
पुलिस इस मामले में तत्कालीन लार के एसओ अंशुमान यदुवंशी की तहरीर पर 13 अलग-अलग मुकदमा लूट, आगजनी, पुलिस पर जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा, असलहा लूटने सहित करीब 1700 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में दर्ज किया था।
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इसमें करीब 200 लोग नामजद है। घटना के दौरान पुलिस ने 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एक मुकदमे की विवेचना सलेमपुर कोतवाल और अन्य की लार थाने में तैनात दरोगा कर रहे हैं। इसमें अधिकांश ऐसे लोग आरोपी बनाए गए हैं, जो वर्तमान में भाजपा के सक्रिय नेता हैं। विवेचना में नाम निकलवाने के लिए भाजपा नेता पुलिस पर दबाव डाल रहे हैं। विधायक काली प्रसाद ने शासन में पत्र देकर निर्दोष लोगों का नाम मुकदमे से निकालने और दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। पत्र के आधार पर शासन ने पुलिस से जवाब मांगा है।
साक्ष्य और तथ्य के आधार पर मुकदमे से नाम किसी भी आरोपी का निकाला जाना असंभव बताते हुए रिपोर्ट भेजी है। एसपी राकेश शंकर ने बताया कि मुकदमा निस्तारण में तेजी लाने का निर्देश विवेचकों को दिया गया है। एक साल से अधिक समय से लार और मेहरौना कांड का मामला लंबित है। इसमें लापरवाही बरतने वाले विवेचकों पर कार्रवाई भी होगी।
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देवरिया।
लार में मूर्ति विसर्जन और नारियल फोड़ जुलूस के दौरान बवाल में दर्ज हुए मुकदमे की विवेचना की रफ्तार तेज हो गई है। ठंडे बस्ते में पड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने ऐसा निर्देश विवेचकों को दी है। इसमें लापरवाही बरतने वाले विवेचकों पर भी गाज गिर सकती है।
विधायक ने भी शासन में निर्देश पर लोगों का नाम मुकदमे से निकालने के लिए मांग की है। पिछले साल लार में नारियल फोड़ जुलूस में बवाल और मेहरौना में मूर्ति विसर्जन के दौरान दंगा हो गया था।
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पुलिस इस मामले में तत्कालीन लार के एसओ अंशुमान यदुवंशी की तहरीर पर 13 अलग-अलग मुकदमा लूट, आगजनी, पुलिस पर जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा, असलहा लूटने सहित करीब 1700 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में दर्ज किया था।
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इसमें करीब 200 लोग नामजद है। घटना के दौरान पुलिस ने 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एक मुकदमे की विवेचना सलेमपुर कोतवाल और अन्य की लार थाने में तैनात दरोगा कर रहे हैं। इसमें अधिकांश ऐसे लोग आरोपी बनाए गए हैं, जो वर्तमान में भाजपा के सक्रिय नेता हैं। विवेचना में नाम निकलवाने के लिए भाजपा नेता पुलिस पर दबाव डाल रहे हैं। विधायक काली प्रसाद ने शासन में पत्र देकर निर्दोष लोगों का नाम मुकदमे से निकालने और दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। पत्र के आधार पर शासन ने पुलिस से जवाब मांगा है।
साक्ष्य और तथ्य के आधार पर मुकदमे से नाम किसी भी आरोपी का निकाला जाना असंभव बताते हुए रिपोर्ट भेजी है। एसपी राकेश शंकर ने बताया कि मुकदमा निस्तारण में तेजी लाने का निर्देश विवेचकों को दिया गया है। एक साल से अधिक समय से लार और मेहरौना कांड का मामला लंबित है। इसमें लापरवाही बरतने वाले विवेचकों पर कार्रवाई भी होगी।