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खनन माफिया बेखौफ, अफसर बेखबर

Fri, 06 Jul 2018 10:41 PM IST
Updated Fri, 06 Jul 2018 10:41 PM IST
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खनन माफिया बेखौफ, अफसर बेखबर
छोटी गंडक से नाव के जरिए बालू निकालकर किनारे लाते लोग। - फोटो : amarujala
देवरिया। 30 जून के बाद से सरकारी रिकॉर्ड में खनन बंद हो चुका है। अफसर भी इसके दावे कर रहे हैं। मगर जमीनी हकीकत इससे अलग है। जिले में नदियों से बालू का खनन धड़ल्ले से हो रहा है। जाहिर है कि यह वैध नहीं है, बावजूद जिम्मेदार बेखबर हैं और खनन माफिया बेखौफ। दिन में खुलेआम बालू का खनन हो रहा है। इससे सरकारी राजस्व को चूना लग रहा है फिर भी अफसरों ने चुप्पी साध रखी है।
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वैसे तो सीबीआई जांच की जद में होने के कारण जिले के अधिकांश घाटों से बालू खनन पर रोक है। तमाम कोशिशों के बाद सिर्फ बरहज के गौरा खादर घाट से ही खनन का पट्टा हो पाया है। इस घाट से भी 30 जून के बाद खनन कार्य बंदकर दिया गया है। ताजा स्थिति यह है कि पूरे जिले में कहीं से भी खनन नहीं हो सकता। इससे इतर सरयू, घाघरा, राप्ती, गोर्रा, छोटी गंडक के तटों पर एक दर्जन से अधिक घाटों से बालू का अवैध खनन जोरों पर है। कहीं रात के अंधेरे में जेसीबी लगाकर बालू की निकासी हो रही है तो कहीं दिनदहाड़े नाव, रिक्शा-ट्रॉली और साइकिल जैसे साधनों से बालू ढोया जा रहा है। अवैध खनन से नदियां खोखली हो रही है। उनकी धारा बदल रही है। सरकारी राजस्व को भी चूना लग रहा है, बावजूद जिम्मेदार बेखबर हैं। पिछले माह गोंडा और फतेहपुर में अवैध खनन पर कार्रवाई के बाद भी यहां के अफसर चैन की नींद सो रहे हैं।
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खनन से खोखली हो रहीं नदियां
खनन माफिया की कारस्तानी से खोखली होती नदियां हर साल तबाही का पैगाम लिख रही है। बाढ़ के दिनों में नदी तटों के लोग इसकी विभिषिका झेल रहे हैं। बेतहाशा खनन के कारण बरहज का एक गांव घाघरा में विलीन हो चुका है। बरहज में ही सरयू नदी घाटों से दूर हो चुकी है। छोटी गंडक के किनारे बैकुंठपुर में अवैध खनन के कारण ही बाढ़ के दिनों में पानी मंदिर के किनारे तक पहुंच आता है। राप्ती और गोर्रा के दोआबा क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित किया जा चुका है। बावजूद यहां अवैध खनन बदस्तूर जारी है। नदी और बांध के बीच खनन से न सिर्फ बांध पर खतरा बढ़ रहा है, बल्कि आसपास के गांवों के लिए भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। गौरतलब है कि नदियों से अवैध खनन के कारण देवरिया पहले भी चर्चा में रहा है। यहां के घाटों पर सीबीआई की निगाह है। अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश के सरकारी निर्देशों के बावजूद जिले के जिम्मेदार उदासीन रुख अपनाए हुए हैं।
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इन क्षेत्रों में हो रहा अवैध खनन
छोटी गंडक के किनारे आमघाट, बैकुंठपुर, रुपई, सरौरा, सिसवां, जिरासो घाट, खैरात, राप्ती पर करकोल घाट, तरकोल, नगवा घाट, घाघरा व सरयू तट पर पिंडी, नदौली, खेमादेई, चनुकी, धरहरा, खैराघाट, नदावरघाट, भागलपुर, कौसड़ के पास अवैध खनन का खेल जारी है। आए दिन रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली से बालू की ढुलाई हो रही है।


जिले में सिर्फ बरहज के गौराखादर में ही खनन का पट्टा हुआ है। 30 जून के बाद से वैध घाटों पर भी खनन रोक दिया गया है। इसके बावजूद कहीं भी खनन हो रहा है तो गलत है। अवैध करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। एसडीएम के नेतृत्व में टीमें गठित कर छापामारी कर कार्रवाई की जाएगी।
-उमाकांत, जिला खान निरीक्षक, देवरिया।

01 घाट का हुआ है जिले में पट्टा।
04 बड़ी नदियां जिले से होकर गुजरती हैं।
30 जून के बाद से वैध खनन पर भी है रोक।
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