फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   भूमिगत हुए अतीक के करीबी, बंद किया मोबाइल

भूमिगत हुए अतीक के करीबी, बंद किया मोबाइल

Thu, 03 Jan 2019 10:22 PM IST
Harishankar Tiwari हरिशंकर तिवारी
Updated Thu, 03 Jan 2019 10:22 PM IST
विज्ञापन
भूमिगत हुए अतीक के करीबी, बंद किया मोबाइल
atiq ahmed
देवरिया। पौने दो साल तक जिला जेल में रहे अतीक अहमद के काले कारनामे उजागर होने के बाद शिकंजा कसता देख अब करीबी खुद को बचाने में जुट गए हैं। खुफिया विंग और सर्विलांस सेल के रडार पर आए कई चिह्नित भूमिगत हो गए हैं।
विज्ञापन

अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2018 तक जिला जेल में बंद रहे पूर्व सांसद अतीक ने इस अवधि में अपने लोकल नेटवर्क को मजबूत किया है। इसके लिए उसने गुर्गों की मदद ली तो जेल में निरुद्ध बंदियों-कैदियों को भी जरिया बनाया। वह उनकी हर तरह से मदद करता था। यही कारण रहा कि जेल से जाने के बाद जब डीएम के निर्देश पर चार सदस्यीय टीम और लखनऊ के सीओ जांच के लिए पहुंचे तो अतीक के एहसान तले दबे किसी भी बंदी या कैदी ने मुंह नहीं खोला। उनकी तरह ही जेल के बाहर भी अतीक के कई एहसानमंद हैं, जिनका इस्तेमाल अतीक अपने गैर कानूनी कार्यों को बढ़ावा देने में लेता था। कारोबारी मोहित जायसवाल का प्रकरण सामने आने के बाद जब शासन ने अतीक पर शिकंजा कसना शुरू किया तो करीबी भी निशाने पर आ गए। अतीक की सरपरस्ती में लंबे समय से धाक जमाने वाले अब पुलिस की निगाह में आने से बचने के लिए भूमिगत हो गए हैं। उनके मोबाइल नंबर भी बंद हैं। पुलिस की सर्विलांस सेल ने जेल में अक्सर अतीक से मिलने वालों के नामों के आधार पर छह नंबरों को चिह्नित किया है। यह नंबर दो दिनों से लगातार बंद आ रहे हैं। उनकी मौजूदगी भी जिले में नहीं है। इससे जांच टीमों को अधिक माथापच्ची करनी पड़ रही है। हालांकि पुलिस भी अब नए पैतरे से उन तक पहुंचने की जुगत लगा रही है।
विज्ञापन


बैरक में साथ रहे बंदियों पर भी टेढ़ी निगाह
जिला जेल की बैरक नंबर सात में अतीक के साथ रहने वाले बंदियों पर भी अफसरों की निगाह टेढ़ी हो चुकी है। मोहित की पिटाई करने वालों में इनका नाम सामने आ चुका है। यह माना जा रहा है कि लंबे समय से एक साथ बैरक में रहने के कारण वह अतीक के नाम पर अन्य तरह से भी लाभ उठाते रहे होंगे। लिहाजा वह भी अपने स्तर से अतीक की मदद में पीछे नहीं होंगे। पुलिस उनके दोस्त, परिवार और रिश्तेदारों के माध्यम से भी मामले की तक खंगालने की कोशिश में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed