{"_id":"5b6dc6394f1c1bed5e8b8379","slug":"171533920825-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवरिया-जांच में फुस्स होती जा रही देह व्यापार से जुड़ी पुलिसिया कहानी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
देवरिया-जांच में फुस्स होती जा रही देह व्यापार से जुड़ी पुलिसिया कहानी
Updated Fri, 10 Aug 2018 10:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जांच में निकलता जा रहा पुलिस के दावों का दम
या
जांच में बेदम होती जा रही पुलिस की ‘कहानी’
प्वाइंटर
सीसीटीवी कैमरों में भी नहीं दिख रही कोई संदिग्ध गतिविधि
कार्रवाई का आधार बनी बालिका के बयान भी संदिग्ध
जिन लड़कियों को लापता बताया जा रहा था, अपने घरों में मिलीं
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका कांड की जिस पुलिसिया कहानी पर देवरिया की पूरे देश में बदनामी हुई, वह जांच में धीरे-धीरे बेदम होती नजर आ रही है। एक-एक कर पुलिस के सभी दावों की हवा निकलती जा रही है। जिस लड़की के आरोपों की बुनियाद पर पुलिस ने कार्रवाई की, वह खुद संदेह के घेरे में है। बालगृह से लापता सभी लड़कियां अपने घरों में ही मिल रही हैं। सीसीटीवी फुटेज में भी कोई खास तथ्य हाथ नहीं लगा है और न ही मुक्त कराई गई लड़कियों के बयान में कोई अहम बात सामने आ सकी है। ले-देकर पुलिस के पास अपनी बात प्रमाणित करने का अब सिर्फ एक जरिया ही बचा है- मेडिकल रिपोर्ट। ये रिपोर्ट सील बंद होकर लखनऊ पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट में भी अधिकांश लड़कियों के साथ मारपीट की बात ही स्पष्ट हुई है।
पांच अगस्त की रात पुलिस ने स्टेशन रोड पर संचालित मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के बालगृह बालिका में छापामारी की थी। यहां से कुल 24 लड़कियों-बच्चों को मुक्त कराते हुए अफसर पुलिस लाइन पहुंचे। यहां प्रेसवार्ता में एसपी रोहन पी. कनय ने बालगृह से दिन में भागी एक 13 वर्षीय लड़की के बयान का हवाला देते हुए संस्था में रह रही लड़कियों के शारीरिक उत्पीड़न का दावा किया था। इसी आधार पर केस दर्ज करते हुए संचालिका गिरिजा त्रिपाठी व पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बालगृह से पहले 18 और फिर 25 लड़कियों के लापता होने की बात कही थी। अब पांच दिन की छानबीन में पुलिस की कहानी ही सवालों के घेरे में आ गई है। संस्था की मान्यता स्थगित होने के बाद भी लड़कियों को यहां रखे जाने से खुद पुलिस कठघरे में है। फिलहाल इस मामले में विभागीय जिम्मेदार कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। अफसर सीबीआई और एसआईटी के हाथों में जांच जाने का हवाला देकर चुप्पी साधे हुए हैं।
---------------------------------
पुलिस के दावे और उनकी हकीकत
1- दावा नंबर एक : बालगृह से भागी बालिका तीन वर्षों से वहां रह रही थी। मां की मौत के बाद नानी उसे रेलवे स्टेशन पर छोड़कर भाग गई थी, जहां से वह बालगृह पहुंची। वहां उसका शारीरिक उत्पीड़न होता था। इस लड़की ने ही बालगृह बालिका से लड़कियों के कार में जाने की बात कही थी।
विज्ञापन
मौजूदा हकीकत : बुधवार को सामने आए लड़की के माता-पिता ने बताया कि बेटी ढाई माह पहले ही घर से गायब हुई थी। मां जीवित है और पिता के दूसरी शादी की बात भी गलत है। जन्म के तीन माह बाद ही उसकी नानी की मौत हो चुकी है।
2- दावा नंबर दो : बालगृह बालिका से 43 में से 23 लड़कियां (बाद में 18) ही मौके पर मिलीं। शेष लड़कियां गायब हैं। मानव तस्करी का भी शक है।
मौजूदा हकीकत : एसपी ने बताया कि बालगृह में 43 लड़कियों की सूची एक माह पुरानी थी। इसमें 15 लड़कियों को पुलिस ने रखा था, जिन्हें कोर्ट के आदेश पर घर भेज दिया गया। अन्य सभी लड़कियों के बारे में तस्दीक कर ली गई है। सभी अपने घरों में मिली हैं। कोई लड़की अब गायब नहीं है।
3- दावा नंबर तीन : बालगृह बालिका से लड़कियां काले और सफेद रंग की कारों में गोरखपुर सहित अन्य जगहों पर जाती थीं और सुबह आती थीं।
मौजूदा हकीकत : पुलिस सूत्रों के मुताबिक बालगृह से भागी लड़की के अलावा एक अन्य ने ही यह बयान दिया है। उसका बयान भी दूसरी लड़कियों के लिए था। बयान देने वाली दूसरी लड़की आर्केस्ट्रा कंपनी से जुड़ी रही है। लिहाजा उसके बयान की प्रमाणिकता पर भी संशय है। आसपास के लोगों ने विशेष अवसरों पर ही पुलिस व प्रशासन के अफसरों की गाड़ी आने की बात कही। सामने स्थित भवन के सीसीटीवी फुटेज से भी इस संबंध में कोई ठोस तथ्य हाथ नहीं लगे हैं।
4- दावा नंबर चार : बालगृह बालिका में लड़कियों का उत्पीड़न होता था। उनके साथ दुष्कर्म की पुष्टि की जताई थी संभावना।
मौजूदा हकीकत : सूत्रों के मुताबिक मेडिकल रिपोर्ट में अधिकांश लड़कियों को शारीरिक दंड देने की बात सामने आई है। उन्होंने अपने बयान में भी इसे स्वीकार किया है। मेडिकल रिपोर्ट के साथ स्लाइड तैयार कर सील लिफाफे में शासन को भेजा गया है।
---------------------------------
बयान
बालगृह बालिका से लापता सभी लड़कियों को ट्रेस किया जा चुका है। कोई लड़की अब लापता नहीं है। जहां तक फरार बालिका के बयान का सवाल है तो उसके सत्यता की जांच हो रही है। मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य चीजें विवेचना का हिस्सा हैं। जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। - गणेश साहा, एएसपी उत्तरी।
विज्ञापन
या
जांच में बेदम होती जा रही पुलिस की ‘कहानी’
प्वाइंटर
सीसीटीवी कैमरों में भी नहीं दिख रही कोई संदिग्ध गतिविधि
कार्रवाई का आधार बनी बालिका के बयान भी संदिग्ध
जिन लड़कियों को लापता बताया जा रहा था, अपने घरों में मिलीं
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका कांड की जिस पुलिसिया कहानी पर देवरिया की पूरे देश में बदनामी हुई, वह जांच में धीरे-धीरे बेदम होती नजर आ रही है। एक-एक कर पुलिस के सभी दावों की हवा निकलती जा रही है। जिस लड़की के आरोपों की बुनियाद पर पुलिस ने कार्रवाई की, वह खुद संदेह के घेरे में है। बालगृह से लापता सभी लड़कियां अपने घरों में ही मिल रही हैं। सीसीटीवी फुटेज में भी कोई खास तथ्य हाथ नहीं लगा है और न ही मुक्त कराई गई लड़कियों के बयान में कोई अहम बात सामने आ सकी है। ले-देकर पुलिस के पास अपनी बात प्रमाणित करने का अब सिर्फ एक जरिया ही बचा है- मेडिकल रिपोर्ट। ये रिपोर्ट सील बंद होकर लखनऊ पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट में भी अधिकांश लड़कियों के साथ मारपीट की बात ही स्पष्ट हुई है।
पांच अगस्त की रात पुलिस ने स्टेशन रोड पर संचालित मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के बालगृह बालिका में छापामारी की थी। यहां से कुल 24 लड़कियों-बच्चों को मुक्त कराते हुए अफसर पुलिस लाइन पहुंचे। यहां प्रेसवार्ता में एसपी रोहन पी. कनय ने बालगृह से दिन में भागी एक 13 वर्षीय लड़की के बयान का हवाला देते हुए संस्था में रह रही लड़कियों के शारीरिक उत्पीड़न का दावा किया था। इसी आधार पर केस दर्ज करते हुए संचालिका गिरिजा त्रिपाठी व पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बालगृह से पहले 18 और फिर 25 लड़कियों के लापता होने की बात कही थी। अब पांच दिन की छानबीन में पुलिस की कहानी ही सवालों के घेरे में आ गई है। संस्था की मान्यता स्थगित होने के बाद भी लड़कियों को यहां रखे जाने से खुद पुलिस कठघरे में है। फिलहाल इस मामले में विभागीय जिम्मेदार कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। अफसर सीबीआई और एसआईटी के हाथों में जांच जाने का हवाला देकर चुप्पी साधे हुए हैं।
विज्ञापन
---------------------------------
पुलिस के दावे और उनकी हकीकत
1- दावा नंबर एक : बालगृह से भागी बालिका तीन वर्षों से वहां रह रही थी। मां की मौत के बाद नानी उसे रेलवे स्टेशन पर छोड़कर भाग गई थी, जहां से वह बालगृह पहुंची। वहां उसका शारीरिक उत्पीड़न होता था। इस लड़की ने ही बालगृह बालिका से लड़कियों के कार में जाने की बात कही थी।
विज्ञापन
मौजूदा हकीकत : बुधवार को सामने आए लड़की के माता-पिता ने बताया कि बेटी ढाई माह पहले ही घर से गायब हुई थी। मां जीवित है और पिता के दूसरी शादी की बात भी गलत है। जन्म के तीन माह बाद ही उसकी नानी की मौत हो चुकी है।
2- दावा नंबर दो : बालगृह बालिका से 43 में से 23 लड़कियां (बाद में 18) ही मौके पर मिलीं। शेष लड़कियां गायब हैं। मानव तस्करी का भी शक है।
मौजूदा हकीकत : एसपी ने बताया कि बालगृह में 43 लड़कियों की सूची एक माह पुरानी थी। इसमें 15 लड़कियों को पुलिस ने रखा था, जिन्हें कोर्ट के आदेश पर घर भेज दिया गया। अन्य सभी लड़कियों के बारे में तस्दीक कर ली गई है। सभी अपने घरों में मिली हैं। कोई लड़की अब गायब नहीं है।
3- दावा नंबर तीन : बालगृह बालिका से लड़कियां काले और सफेद रंग की कारों में गोरखपुर सहित अन्य जगहों पर जाती थीं और सुबह आती थीं।
मौजूदा हकीकत : पुलिस सूत्रों के मुताबिक बालगृह से भागी लड़की के अलावा एक अन्य ने ही यह बयान दिया है। उसका बयान भी दूसरी लड़कियों के लिए था। बयान देने वाली दूसरी लड़की आर्केस्ट्रा कंपनी से जुड़ी रही है। लिहाजा उसके बयान की प्रमाणिकता पर भी संशय है। आसपास के लोगों ने विशेष अवसरों पर ही पुलिस व प्रशासन के अफसरों की गाड़ी आने की बात कही। सामने स्थित भवन के सीसीटीवी फुटेज से भी इस संबंध में कोई ठोस तथ्य हाथ नहीं लगे हैं।
4- दावा नंबर चार : बालगृह बालिका में लड़कियों का उत्पीड़न होता था। उनके साथ दुष्कर्म की पुष्टि की जताई थी संभावना।
मौजूदा हकीकत : सूत्रों के मुताबिक मेडिकल रिपोर्ट में अधिकांश लड़कियों को शारीरिक दंड देने की बात सामने आई है। उन्होंने अपने बयान में भी इसे स्वीकार किया है। मेडिकल रिपोर्ट के साथ स्लाइड तैयार कर सील लिफाफे में शासन को भेजा गया है।
---------------------------------
बयान
बालगृह बालिका से लापता सभी लड़कियों को ट्रेस किया जा चुका है। कोई लड़की अब लापता नहीं है। जहां तक फरार बालिका के बयान का सवाल है तो उसके सत्यता की जांच हो रही है। मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य चीजें विवेचना का हिस्सा हैं। जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। - गणेश साहा, एएसपी उत्तरी।