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लार में करंट की चपेट में आने से युवक की मौत
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पति की मौत के बाद बदहवास बैठी नाजिया
- फोटो : अमर उजाला
लार। करंट की चपेट में आने से आरा मशीन संचालक के बेटे की मौत हो गई। रात को पंखा का प्लग लगाते वक्त देर रात को दुर्घटना हुई। घरवालों का चीख पुकार सुनकर लोगों की भीड़ जुट गई। घरवालों ने उसका शव दफना दिया। नगर के घारी वार्ड बाईपास रोड निवासी महबूब आलम लारी का आरा मशीन है और फर्नीचर की दुकान है। यहीं पर इनका परिवार रहता है। रविवार की रात भोजन करने के बाद परिवार के सदस्य सोने के लिए अपने कमरे में चले गए। दिलशाद आलम लारी (35) अधिक गर्मी महसूस होने पर कमरे में रखा पंखा चालू करने के लिए उठा। बोर्ड में प्लग लगाया तो करंट लगी और वह पीछे रखे आलमारी से उसका सिर टकरा गया और उसकी मौत हो गई। पत्नी के शोर मचाने पर घरवाले पहुंचे और उसे सीएचसी पर ले गए, डॉक्टर ने मृत्यु घोषित कर दिया। पति की मौत के बाद पत्नी नाजिया खातून बदहवास हो गई। जवान बेटे के खोने के गम में पिता महबूब आलम का काठ मार दिया। इकलौती बेटी माहिरा (3) रो रही थी। घरवालों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया।
छोटे भाई की बारात जाने से निकला जनाजा
लार। दो जवान बेटों की मौत से अभी परिवार उबरा नहीं था कि तीसरा बेटा भी काल के गाल में समा गया। शादी की तैयारियों में जुटे घरवालों में इसकी मौत से मातम छा गया। दरवाजे पर पहुंचे नगरवासी गमजदा परिवार को ढाढ़स बधाने में जुटे रहे। दिलशाद आलम लारी छह भाइयों में दूसरे नंबर का था। छोटे भाई मोहम्मद सिद्दीकी की बारात 25 जून को खूनीपुर (गोरखपुर) जानी थी। रिश्तेदारों के आने घर में कई दिनों से चहल-पहल थी, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। शादी की तैयारियों में जुटा था। देर रात तक महिलाएं और पुरुष आपस में मिलकर सामनों को सहेजने के बाद एक साथ बैठकर भोजन किए और सोने चले गए। कुछ देर बाद छत के कमरे से अचानक दिलशाद की पत्नी चीखने लगी। घरवाले पहुंचे तो वहां का नजारा कुछ और था। इसके पूर्व सड़क हादसे में दो भाइयों की जान जा चुकी है। भाई की शादी से पूर्व दिलशाद का जब जनाना उठा तो दरवाजे पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सभी भाई मिलकर पिता के कारोबार में हाथ बढ़ाते हैं।
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छोटे भाई की बारात जाने से निकला जनाजा
लार। दो जवान बेटों की मौत से अभी परिवार उबरा नहीं था कि तीसरा बेटा भी काल के गाल में समा गया। शादी की तैयारियों में जुटे घरवालों में इसकी मौत से मातम छा गया। दरवाजे पर पहुंचे नगरवासी गमजदा परिवार को ढाढ़स बधाने में जुटे रहे। दिलशाद आलम लारी छह भाइयों में दूसरे नंबर का था। छोटे भाई मोहम्मद सिद्दीकी की बारात 25 जून को खूनीपुर (गोरखपुर) जानी थी। रिश्तेदारों के आने घर में कई दिनों से चहल-पहल थी, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। शादी की तैयारियों में जुटा था। देर रात तक महिलाएं और पुरुष आपस में मिलकर सामनों को सहेजने के बाद एक साथ बैठकर भोजन किए और सोने चले गए। कुछ देर बाद छत के कमरे से अचानक दिलशाद की पत्नी चीखने लगी। घरवाले पहुंचे तो वहां का नजारा कुछ और था। इसके पूर्व सड़क हादसे में दो भाइयों की जान जा चुकी है। भाई की शादी से पूर्व दिलशाद का जब जनाना उठा तो दरवाजे पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सभी भाई मिलकर पिता के कारोबार में हाथ बढ़ाते हैं।
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