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Deoria News: भूमि विवाद में सिविल निगरानी खारिज निचली अदालत का आदेश बरकरार
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देवरिया। भूमि की सीमा और स्थिति को लेकर चल रहे पुराने विवाद में अपर जिला न्यायाधीश कक्ष संख्या एक अभय कृष्ण तिवारी की अदालत ने सिविल निगरानी खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि विवादित संपत्ति की सीमा और स्थिति को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है। ऐसे में सर्वे कमिश्नर की रिपोर्ट मुकदमे के निस्तारण में सहायक होगी। अदालत ने मूल वाद में 24 अप्रैल 2024 को पारित आदेश को बरकरार रखा।
मामला सिविल निगरानी संख्या 33/2024 बाल मुकुंद सिंह बनाम प्रमोद कुमार तिवारी व अन्य से संबंधित है। निगरानी मूल वाद संख्या 1102/2014 में सिविल जज जूनियर डिवीजन कक्ष संख्या 10 की ओर से 24 अप्रैल 2024 को पारित आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी। मूल विवाद आराजी संख्या 1467 के बंटवारे से जुड़ा है।
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विपक्षी की ओर से निचली अदालत में प्रार्थना पत्र देकर सर्वे कमिश्नर के माध्यम से विवादित भूमि की पहचान और मौके की स्थिति की रिपोर्ट कराने की मांग की गई थी। निचली अदालत ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए सर्वे कमिश्नर की कार्रवाई का आदेश दिया था। इसके खिलाफ निगरानीकर्ता ने अदालत का रुख किया। निगरानीकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि विवादित भूमि की पैमाइश और नक्शा तैयार कराने के संबंध में नौ सितंबर 2015 को पहले ही आदेश पारित हो चुका है।
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अदालत ने कहा कि विवादित संपत्ति की सीमा और स्थिति को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है। ऐसे में सर्वे कमिश्नर की रिपोर्ट मुकदमे के निस्तारण में सहायक होगी। अदालत ने मूल वाद में 24 अप्रैल 2024 को पारित आदेश को बरकरार रखा।
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मामला सिविल निगरानी संख्या 33/2024 बाल मुकुंद सिंह बनाम प्रमोद कुमार तिवारी व अन्य से संबंधित है। निगरानी मूल वाद संख्या 1102/2014 में सिविल जज जूनियर डिवीजन कक्ष संख्या 10 की ओर से 24 अप्रैल 2024 को पारित आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी। मूल विवाद आराजी संख्या 1467 के बंटवारे से जुड़ा है।
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विपक्षी की ओर से निचली अदालत में प्रार्थना पत्र देकर सर्वे कमिश्नर के माध्यम से विवादित भूमि की पहचान और मौके की स्थिति की रिपोर्ट कराने की मांग की गई थी। निचली अदालत ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए सर्वे कमिश्नर की कार्रवाई का आदेश दिया था। इसके खिलाफ निगरानीकर्ता ने अदालत का रुख किया। निगरानीकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि विवादित भूमि की पैमाइश और नक्शा तैयार कराने के संबंध में नौ सितंबर 2015 को पहले ही आदेश पारित हो चुका है।