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आग से मथुरा छापर गांव तबाह
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Sun, 10 Apr 2016 11:10 PM IST
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मथुरा छापर के हरिजन बस्ती में आग लगने के बाद जले मकान।
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मुर्गी फार्म के पास से निकली चिंगारी ने रामपुर कारखाना के मथुरा छापर गांव को तबाह कर दिया। करीब तीन सौ घर जल गए। जिसमें सौ घरों की सिर्फ जर्जर हाल छत बची है। गांव में एक महिला की मौत हो गई। आग बुझाने के चक्कर में दस झुलस गए। आग के तांडव से लोग लोग घरों से भाग निकले। बेेकाबू आग करीब चार घंटे तक तबाही मचाती रही। छोटी गंडक ने आग के वेग को कम किया।
हालात पर काबू पाने के लिए चार थानों की फोर्स, पीएसी और क्यूआरटी को मथुरा छापर गांव में तैनात किया गया। करीब पचास बाइक, सौ से अधिक मवेशी सहित करोड़ों की संपत्ति राख हो गई। इस दौरान पांच सौ एकड़ फसल, अरहर, बांस की सैकड़ों भी कोठी राख हो गई। तबाही का मंजर लोगों के रूह को कंपा देने वाला था। तरकुलवा के कवला मुंडेरा गांव में सदमे से किसान की मौत हो गई। एक महिला गंभीर रुप से जल गई। इसके अलावे गौरीबाजार, तरकुलवा,
भाटपारानी और भलुअनी थानाक्षेत्र में आग से साठ घर जल गए और सवा सौ एकड़ फसल जलकर राख हो गई।
रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के मथुरा छापर गांव में कई पोल्ट्री फार्म हैं। जहां बाहरी मजदूर काम करते हैं। फार्म के आसपास कई कंबाइन मशीन और भूसा मशीन खेतों में चल रही थीं। चर्चा है कि मुर्गी फार्म के पास से दोपहर बारह बजे के करीब एक चिंगारी निकली और सरेह में फैल गई। आग कोटवा के सरेह से फैलते हुए मथुरा छापर के हरिजन बस्ती तक पहुंच गई। देखते ही देखते आग ने करीब डेढ़ सौ घरों को अपने चपेट में ले लिया। आग बुझाने का लोगों ने प्रयास किया लेकिन तेज पछुआ हवाओं ने आग को मथुरा छापर के मुस्लिम बाहुल्य टोले को अपनी चपेट में ले लिया।
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गांव के लोग फायर सर्विस को फोन करते रहे लेकिन गाड़ी नहीं पहुंची। इलाके के सभी इंजन चालू कर हजारों लोग हाथों में बाल्टी और झांगा लेकर आग बुझाने दौड़ पड़े। लेकिन करीब सौ फीट ऊंची आग की लपटों के आग जनता बेबस हो गई। जिसने बहादुरी दिखाई अधिकांश जल गए लेकिन लोगों का संघर्ष जारी रहा। इसी बीच एक मकान के अंदर साठ वर्षी राधिक पत्नी महेश प्रसाद जिंदा जल गई। दो घंटे के बाद फायर सर्विस की दो छोटी गाड़ी पहुंची जो नाकाफी थी। एसपी प्रभाकर चौधरी की पहल पर गोरखपुर से फायर सर्विस को बुलाना पड़ा। दोनों टोले के करीब तीन सौ घर तबाह करने के बाद आग गड़क के तट पर जाकर शांत हुई। लोग सामान लेकर नदी के रास्ते नाव से दूसरे तरफ भागने लगे।
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हालात पर काबू पाने के लिए चार थानों की फोर्स, पीएसी और क्यूआरटी को मथुरा छापर गांव में तैनात किया गया। करीब पचास बाइक, सौ से अधिक मवेशी सहित करोड़ों की संपत्ति राख हो गई। इस दौरान पांच सौ एकड़ फसल, अरहर, बांस की सैकड़ों भी कोठी राख हो गई। तबाही का मंजर लोगों के रूह को कंपा देने वाला था। तरकुलवा के कवला मुंडेरा गांव में सदमे से किसान की मौत हो गई। एक महिला गंभीर रुप से जल गई। इसके अलावे गौरीबाजार, तरकुलवा,
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भाटपारानी और भलुअनी थानाक्षेत्र में आग से साठ घर जल गए और सवा सौ एकड़ फसल जलकर राख हो गई।
रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के मथुरा छापर गांव में कई पोल्ट्री फार्म हैं। जहां बाहरी मजदूर काम करते हैं। फार्म के आसपास कई कंबाइन मशीन और भूसा मशीन खेतों में चल रही थीं। चर्चा है कि मुर्गी फार्म के पास से दोपहर बारह बजे के करीब एक चिंगारी निकली और सरेह में फैल गई। आग कोटवा के सरेह से फैलते हुए मथुरा छापर के हरिजन बस्ती तक पहुंच गई। देखते ही देखते आग ने करीब डेढ़ सौ घरों को अपने चपेट में ले लिया। आग बुझाने का लोगों ने प्रयास किया लेकिन तेज पछुआ हवाओं ने आग को मथुरा छापर के मुस्लिम बाहुल्य टोले को अपनी चपेट में ले लिया।
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गांव के लोग फायर सर्विस को फोन करते रहे लेकिन गाड़ी नहीं पहुंची। इलाके के सभी इंजन चालू कर हजारों लोग हाथों में बाल्टी और झांगा लेकर आग बुझाने दौड़ पड़े। लेकिन करीब सौ फीट ऊंची आग की लपटों के आग जनता बेबस हो गई। जिसने बहादुरी दिखाई अधिकांश जल गए लेकिन लोगों का संघर्ष जारी रहा। इसी बीच एक मकान के अंदर साठ वर्षी राधिक पत्नी महेश प्रसाद जिंदा जल गई। दो घंटे के बाद फायर सर्विस की दो छोटी गाड़ी पहुंची जो नाकाफी थी। एसपी प्रभाकर चौधरी की पहल पर गोरखपुर से फायर सर्विस को बुलाना पड़ा। दोनों टोले के करीब तीन सौ घर तबाह करने के बाद आग गड़क के तट पर जाकर शांत हुई। लोग सामान लेकर नदी के रास्ते नाव से दूसरे तरफ भागने लगे।