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Deoria News: बदला ठिकाना...बलिया से लाने लगे मिलावटी पनीर
Sun, 30 Nov 2025 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 30 Nov 2025 12:31 AM IST
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सलेमपुर में एक दुकान पर रखी पनीर
देवरिया। जिले में सहालग के दौरान हर दिन 50 क्विंटल से ज्यादा पनीर की मांग है। ऊसरा में चल रहे राधिका जी डेयरी में सिंथेटिक दूध से नकली पनीर बनाने का भंडाफोड़ हुआ था।
इसके बाद से ही पनीर के धंधेबाज नए विकल्प की तलाश में थे। चर्चा है कि बलिया के मनियर दियारा को धंधेबाजों ने नया ठिकाना बना लिया है। यहां से सरयू नदी पार कराकर सलेमपुर क्षेत्र में पनीर की खेप आ रही है।
जिले में महज 40 हजार लीटर के आसपास ही दूध का उत्पादन होता है। दूध की मांग पूरी करने के लिए पैकेट व मिल्क पाउडर का सहारा लिया जाता है। ऐसे में पनीर की बढ़ती मांग ने धंधेबाजों को मौका दे दिया है। शादी की दावत तो बिना पनीर के अधूरा ही है।
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छोटी से बड़ी हर शादी में खाने के एक आइटम में पनीर जरूर रहता है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए धंधेबाज आजमगढ़, गाजीपुर और जौनपुर से भी यहां पनीर मंगा रहे हैं। इसके अलावा जिले में भी कई जगह अवैध धंधा फल फूल रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले सप्ताह ऊसरा में संचालित कारखाने को बंद करा दिया था। इसके बाद से देवरिया शहर व आसपास के इलाके में चोरी छिपे चलने वाले चार-पांच अन्य छोटे-छोटे केंद्र भी बंदकर धंधेबाज गायब हो गए। अब चर्चा है कि पनीर की डिमांड बलिया जिले से पूरी हो रही है। जिले में इसके लिए मेहरौना घाट के इलाके को सुरक्षित बताया जा रहा है।
नाव से माल नदी पार कराने की चर्चा : मनियर दियारा का इलाका सरयू और छोटी गंडक का संगम है। आज भी यह क्षेत्र दुर्गम माना जाता है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते, नदी की धारा में लगातार बदलाव और पहुंच का अभाव इसे तस्करी व अवैध गतिविधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना देता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इसी इलाके से सालों से गोवंशों और शराब की तस्करी होती रही है।
फिलहाल इस क्षेत्र से आवागमन का एकमात्र साधन नाव है। इसी नाव के सहारे पनीर की खेप देवरिया में पहुंचाई जा रही है।
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इसके बाद से ही पनीर के धंधेबाज नए विकल्प की तलाश में थे। चर्चा है कि बलिया के मनियर दियारा को धंधेबाजों ने नया ठिकाना बना लिया है। यहां से सरयू नदी पार कराकर सलेमपुर क्षेत्र में पनीर की खेप आ रही है।
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जिले में महज 40 हजार लीटर के आसपास ही दूध का उत्पादन होता है। दूध की मांग पूरी करने के लिए पैकेट व मिल्क पाउडर का सहारा लिया जाता है। ऐसे में पनीर की बढ़ती मांग ने धंधेबाजों को मौका दे दिया है। शादी की दावत तो बिना पनीर के अधूरा ही है।
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छोटी से बड़ी हर शादी में खाने के एक आइटम में पनीर जरूर रहता है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए धंधेबाज आजमगढ़, गाजीपुर और जौनपुर से भी यहां पनीर मंगा रहे हैं। इसके अलावा जिले में भी कई जगह अवैध धंधा फल फूल रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले सप्ताह ऊसरा में संचालित कारखाने को बंद करा दिया था। इसके बाद से देवरिया शहर व आसपास के इलाके में चोरी छिपे चलने वाले चार-पांच अन्य छोटे-छोटे केंद्र भी बंदकर धंधेबाज गायब हो गए। अब चर्चा है कि पनीर की डिमांड बलिया जिले से पूरी हो रही है। जिले में इसके लिए मेहरौना घाट के इलाके को सुरक्षित बताया जा रहा है।
नाव से माल नदी पार कराने की चर्चा : मनियर दियारा का इलाका सरयू और छोटी गंडक का संगम है। आज भी यह क्षेत्र दुर्गम माना जाता है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते, नदी की धारा में लगातार बदलाव और पहुंच का अभाव इसे तस्करी व अवैध गतिविधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना देता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इसी इलाके से सालों से गोवंशों और शराब की तस्करी होती रही है।
फिलहाल इस क्षेत्र से आवागमन का एकमात्र साधन नाव है। इसी नाव के सहारे पनीर की खेप देवरिया में पहुंचाई जा रही है।