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Deoria News: पाइपलाइन का काम पूरा, 90 दिन में चालू हो सकता है एलपीजी बाॅटलिंग प्लांट
Sun, 04 Feb 2024 01:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 04 Feb 2024 01:57 AM IST
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बैतालपुर स्थित भारत पेट्रोलियम एलपीजी बाटलिंग प्लांट।संवाद
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बैतालपुर में बाॅटलिंग प्लांट के अंदर तक पहुंच गई पाइपलाइन
रिसीविंग बैरल, मेजरिंग डिवाइस, स्टोरेज सहित कई उपकरण लगाए जाएंगे
गुजरात के कांगड़ा से गोरखपुर होते हुए बैतालपुर तक आई है पाइपलाइन
लक्ष्य से एक साल पीछे चल रही यह परियोजना
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गुजरात के कांगड़ा से गोरखपुर होते हुए बैतालपुर तक एलपीजी (लिक्विडफाइड पेट्रोलियम गैस) पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है। पाइपलाइन बैतालपुर के बाॅटलिंग प्लांट तक पहुंच गई है। अब यहां रिसीविंग बैरल, मेजरिंग डिवाइस, स्टोरेज सहित कई उपकरण लगाए जाएंगे।
आगामी 90 दिनों में यह कार्य पूरा होते ही बाॅटलिंग प्लांट से गैस की आपूर्ति शुरू हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके बन जाने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बचेगा। देवरिया सहित आस-पास के जनपदों में गैस सिलिंडर से गैस की आपूर्ति होगी। जबकि यहां से दूर-दराज स्थानों पर टैंकर से एलपीजी गैस की आपूर्ति हो सकेगी। गैस कनेक्शन के लिए लोगों से आवेदन भी लिए जा रहे हैं।
गुजरात के कांगड़ा से मध्य प्रदेश होते हुए गोरखपुर होते हुए बैतालपुर तक एलपीजी (लिक्विड फाइड पेट्रोलियम गैस) पाइपलाइन बिछाई जा रही थी। यह अब बैतालपुर बाॅटलिंग प्लांट तक पहुंच गई है। करीब 2800 किलोमीटर की लंबाई में बिछाई गई यह पाइपलाइन देश की सर्वाधिक लंबी पाइपलाइन परियोजनाओं में से है।
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इस परियोजना का शिलान्यास करीब साढ़े चार साल पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था। पाइपलाइन से आईओसीएल, भारत पेट्रोलियम व हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्लांट को रसोई गैस की आपूर्ति की जानी है।
यह परियोजना मार्च 2023 में ही पूरी हो जानी थी, लेकिन किसानों से जमीन के अधिग्रहण और अन्य कारणों से इसमें विलंब हो रहा था। बहरहाल, पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है। अब यहां छोटे-मोटे काम पूरे कराए जाने हैं। स्टेशन के अंदर पाइप का काम होना है। अब यहां रिसीविंग बैरल लगाया जाएगा, जिससे पाइप के अंदर के कचरे की सफाई हो सकेगी। मेजरिंग डिवाइस लगाया जाना है। उससे यह पता चल सकेगा कि कितनी गैस रिसीव हो रही है। इन दोनों यंत्रों को स्टोरेज से जोड़ा जाएगा। उसके बाद इन्हें सिलिंडर या टैंकर के जरिए डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुंचाया जाएगा। सालाना 2.5 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति करनी है। इस बाटलिंग प्लांट के चालू हो जाने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च में कमी आएगी। इससे जिले के करीब पांच लाख गैस कनेक्शनधारक तो लाभान्वित होंगे ही, पड़ोस के जनपदों और प्रांतों के लोग भी लाभान्वित होंगे।
गैस कनेक्शन के लिए खोला गया है कार्यालय
भारत पेट्रोलियम काॅरपोरेशन की तरफ से देवरिया में कार्यालय खोला गया है। इसका कनेक्शन लेने वाले लोग आवेदन कर सकते हैं। अब तक 21 हजार से अधिक लोग कनेक्शन के लिए आवेदन कर चुके हैं। बाॅटलिंग प्लांट के चालू होने के बाद कनेक्शनधारकों को गैस की आपूर्ति होगी। उसके लिए जिन लोगों ने आवेदन किया है, उनके मोहल्लों में पाइपलाइन बिछाकर उससे कनेक्शन देने की योजना है।
कोट
बैतालपुर के गैस बाॅटलिंग प्लांट तक पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। इसके अंदर पाइपलाइन का कुछ काम बाकी है। इसके अलावा यहां रिसीविंग बैरल, मेजरिंग डिवाइस, स्टोरेज सहित मशीनरी के काम होने हैं। इनमें करीब तीन महीने का समय लगेगा। उसके बाद इस प्लांट से रसोई गैस की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। 2.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष आपूर्ति देने की इसकी क्षमता है। इसके चालू हो जाने से ट्रांसपोर्टेशन पर आने वाला खर्च कम होगा।
-दिव्यांशु कुमार राय, परियोजना प्रबंधक
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बैतालपुर में बाॅटलिंग प्लांट के अंदर तक पहुंच गई पाइपलाइन
रिसीविंग बैरल, मेजरिंग डिवाइस, स्टोरेज सहित कई उपकरण लगाए जाएंगे
गुजरात के कांगड़ा से गोरखपुर होते हुए बैतालपुर तक आई है पाइपलाइन
लक्ष्य से एक साल पीछे चल रही यह परियोजना
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गुजरात के कांगड़ा से गोरखपुर होते हुए बैतालपुर तक एलपीजी (लिक्विडफाइड पेट्रोलियम गैस) पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है। पाइपलाइन बैतालपुर के बाॅटलिंग प्लांट तक पहुंच गई है। अब यहां रिसीविंग बैरल, मेजरिंग डिवाइस, स्टोरेज सहित कई उपकरण लगाए जाएंगे।
आगामी 90 दिनों में यह कार्य पूरा होते ही बाॅटलिंग प्लांट से गैस की आपूर्ति शुरू हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके बन जाने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बचेगा। देवरिया सहित आस-पास के जनपदों में गैस सिलिंडर से गैस की आपूर्ति होगी। जबकि यहां से दूर-दराज स्थानों पर टैंकर से एलपीजी गैस की आपूर्ति हो सकेगी। गैस कनेक्शन के लिए लोगों से आवेदन भी लिए जा रहे हैं।
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गुजरात के कांगड़ा से मध्य प्रदेश होते हुए गोरखपुर होते हुए बैतालपुर तक एलपीजी (लिक्विड फाइड पेट्रोलियम गैस) पाइपलाइन बिछाई जा रही थी। यह अब बैतालपुर बाॅटलिंग प्लांट तक पहुंच गई है। करीब 2800 किलोमीटर की लंबाई में बिछाई गई यह पाइपलाइन देश की सर्वाधिक लंबी पाइपलाइन परियोजनाओं में से है।
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इस परियोजना का शिलान्यास करीब साढ़े चार साल पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था। पाइपलाइन से आईओसीएल, भारत पेट्रोलियम व हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्लांट को रसोई गैस की आपूर्ति की जानी है।
यह परियोजना मार्च 2023 में ही पूरी हो जानी थी, लेकिन किसानों से जमीन के अधिग्रहण और अन्य कारणों से इसमें विलंब हो रहा था। बहरहाल, पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है। अब यहां छोटे-मोटे काम पूरे कराए जाने हैं। स्टेशन के अंदर पाइप का काम होना है। अब यहां रिसीविंग बैरल लगाया जाएगा, जिससे पाइप के अंदर के कचरे की सफाई हो सकेगी। मेजरिंग डिवाइस लगाया जाना है। उससे यह पता चल सकेगा कि कितनी गैस रिसीव हो रही है। इन दोनों यंत्रों को स्टोरेज से जोड़ा जाएगा। उसके बाद इन्हें सिलिंडर या टैंकर के जरिए डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुंचाया जाएगा। सालाना 2.5 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति करनी है। इस बाटलिंग प्लांट के चालू हो जाने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च में कमी आएगी। इससे जिले के करीब पांच लाख गैस कनेक्शनधारक तो लाभान्वित होंगे ही, पड़ोस के जनपदों और प्रांतों के लोग भी लाभान्वित होंगे।
गैस कनेक्शन के लिए खोला गया है कार्यालय
भारत पेट्रोलियम काॅरपोरेशन की तरफ से देवरिया में कार्यालय खोला गया है। इसका कनेक्शन लेने वाले लोग आवेदन कर सकते हैं। अब तक 21 हजार से अधिक लोग कनेक्शन के लिए आवेदन कर चुके हैं। बाॅटलिंग प्लांट के चालू होने के बाद कनेक्शनधारकों को गैस की आपूर्ति होगी। उसके लिए जिन लोगों ने आवेदन किया है, उनके मोहल्लों में पाइपलाइन बिछाकर उससे कनेक्शन देने की योजना है।
कोट
बैतालपुर के गैस बाॅटलिंग प्लांट तक पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। इसके अंदर पाइपलाइन का कुछ काम बाकी है। इसके अलावा यहां रिसीविंग बैरल, मेजरिंग डिवाइस, स्टोरेज सहित मशीनरी के काम होने हैं। इनमें करीब तीन महीने का समय लगेगा। उसके बाद इस प्लांट से रसोई गैस की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। 2.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष आपूर्ति देने की इसकी क्षमता है। इसके चालू हो जाने से ट्रांसपोर्टेशन पर आने वाला खर्च कम होगा।
-दिव्यांशु कुमार राय, परियोजना प्रबंधक