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बिहार बाॅर्डर : तस्करी पर तकनीक से लगाएंगे लगाम, हर मोड़ पर तीसरी आंख
Sat, 16 May 2026 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 16 May 2026 12:03 AM IST
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देवरिया। शराब और पशु तस्करी के लिए बदनाम हो चुके देवरिया से यह दाग मिटाने के लिए पुलिस अब तकनीकी का सहारा लेगी। इसके लिए बिहार बार्डर पर करीब 100 जगहों पर सोलर लाइट बेस्ड नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की मॉनीटरिंग स्वयं एसपी करेंगे। उनके ऑफिस में ही इसका कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इसके अलावा बार्डर इलाके के प्रमुख चौराहों पर पुलिस पिकेट लगेगी। वहां वाहनो को रोकने के लिए बैरियर भी लगाए जाएंगे।
जिले का पूर्वी छोर बिहार के गोपालगंज और सिवान जिले से जुड़ता है। सिवान का गुठनी इलाका पशु और शराब तस्करी के लिए पहले से कुख्यात है। देवरिया जिले का बार्डर किसी तरह से पार कराकर बिहार पहुंचते ही तस्करों को वहां के माफियाओं का संरक्षण मिल जाता है। इसीलिए बार्डर पर मेन रोड ही नहीं, हर रास्ते से तस्कर आते-जाते हैं। बार्डर के गांवों की भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि कोई व्यक्ति अपने खेत में जा रहा है या वह तस्करों का मुखबीर है, इसकी पहचान करना आसान नहीं है।
एसपी अभिजीत आर शंकर ने पिछले दिनों बार्डर के इस इलाके की पड़ताल कराई थी। इसके बाद उन्होंने इसे फूल प्रूफ बनाने की एक कार्ययोजना उच्चाधिकारियों को भेजी है। इसके अलावा बार्डर पर सोलर बेस्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे कि बिजली नहीं रहने या प्राकृतिक आपदा के दौरान भी कैमरे चालू रहें और आते-जाते लोगों की गतिविधियों की रिकार्डिंग होती रहे।
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जिले का पूर्वी छोर बिहार के गोपालगंज और सिवान जिले से जुड़ता है। सिवान का गुठनी इलाका पशु और शराब तस्करी के लिए पहले से कुख्यात है। देवरिया जिले का बार्डर किसी तरह से पार कराकर बिहार पहुंचते ही तस्करों को वहां के माफियाओं का संरक्षण मिल जाता है। इसीलिए बार्डर पर मेन रोड ही नहीं, हर रास्ते से तस्कर आते-जाते हैं। बार्डर के गांवों की भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि कोई व्यक्ति अपने खेत में जा रहा है या वह तस्करों का मुखबीर है, इसकी पहचान करना आसान नहीं है।
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एसपी अभिजीत आर शंकर ने पिछले दिनों बार्डर के इस इलाके की पड़ताल कराई थी। इसके बाद उन्होंने इसे फूल प्रूफ बनाने की एक कार्ययोजना उच्चाधिकारियों को भेजी है। इसके अलावा बार्डर पर सोलर बेस्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे कि बिजली नहीं रहने या प्राकृतिक आपदा के दौरान भी कैमरे चालू रहें और आते-जाते लोगों की गतिविधियों की रिकार्डिंग होती रहे।
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