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Deoria News: रामचंद्र विद्यार्थी के साथ बांके बाबू ने कलेक्ट्रेट में फहराया था तिरंगा

Wed, 21 Dec 2022 05:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 Dec 2022 05:00 AM IST
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banke babu death anniversary today
बरहज के भलुअनी निवासी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बांके बाबू का फाइल फोटो संवाद - फोटो : DEORIA
रामचंद्र विद्यार्थी के साथ बांके बाबू ने कलेक्ट्रेट में फहराया था तिरंगा
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बांके बाबू की पुण्यतिथि आज, गांधी जी से प्रेरित होक र देश सेवा की डगर पर निकल पड़े थे
संवाद न्यूज एजेंसी
भलुअनी। क्षेत्र के ठाकुर देवरिया गांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रमेश चंद्र उर्फ बांके बाबू पढ़ाई के दौरान महात्मा गांधी से प्रेरित होकर देश सेवा की राह पर निकल पड़े थे। उन्होंने 14 अगस्त 1942 को साथी रामचंद्र विद्यार्थी और भारी भीड़ के साथ देवरिया कलेक्ट्रेट में झंडा फहराया था। जहां साथी रामचंद्र अंग्रेजों की गोली लगने से शहीद हो गए थे। वहीं, बांके बाबू को गोरखपुर जेल में निरुद्ध किया गया था। आजादी में उनका योगदान आज भी क्षेत्र के युवाओं को देश प्रेम की प्रेरणा देता है। बांके बाबू की बुधवार को पुण्यतिथि मनाई जाएगी।
ठाकुर यमुना प्रसाद श्रीवास्तव और सुलग्ना देवी कीसात संतानों में रमेश चंद्र चौथे नंबर के थे। ग्रामीणों का कहना है कि 1940 में देवरिया के जूनियर हाईस्कूल में उनका दाखिला कराया गया था, लेकिन उनका मन पढ़ाई के बजाय देश को आजाद कराने में लग गया। देश की आजादी के लिए आयोजित कार्यक्रमों और जुलूसों में वह झंडा लेकर आगे-आगे चलते थे।
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क्रूर और जालिम ब्रिटिश शासक डीएसपी बिग्गी की मौजूदगी में कलेक्ट्रेट पर झंडा फहराने के दौरान अंग्रेजों द्वारा चलाई गई गोली में रामचंद्र शहीद हो गए थे। इसके बाद वहां भगदड़ मच गई, जिसमें बांके बाबू छत से बांस की कोठी पर गिर गए थे। उन्हें गंभीर चोटें आईं थीं। इलाज कराने की जगह कम आयु होने के बाद भी उन्हें जेल में ठूंस दिया था।
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बाबा राघवदास ने उनकी स्फूर्ति देख नाम रखा था बांके बाबू
भलुअनी। ठाकुर देवरिया गांव निवासी रमेश चंद्र श्रीवास्तव की स्फूर्ति देख बाबा राघवदास ने उनका नाम बांके बाबू रखा था। जो उपनाम के रूप में उनके नाम के साथ जुड़ गया। लोग बताते हैं कि स्कूल के सामने उनके गुरु पंडित कमलाकर त्रिपाठी का मकान था। जहां बाबा राघवदास का अक्सर आना-जाना रहता था। इसी बीच रमेश चंद्र से उनकी मुलाकात हुई थी। परिवार के लोग बताते हैं कि अंग्रेज देश को आजाद करने के साथ बांट कर चले गए। 15 अगस्त को रमेश चंद्र को एक बार फिर गिरफ्तार किया गया, लेकिन तुरंत छोड़ दिया गया था। देश आजाद होने के बाद बांके बाबू ने बस्ती स्थित सक्सेरिया इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की पढ़ाई कर देवरिया वापस आने के बाद बीआरडी इंटर कॉलेज से 11 की पढ़ाई की थी।
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