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Deoria News: बच्चों को विषाक्त भोजन कराने वाले संचालक की जमानत खारिज

Fri, 13 Sep 2024 11:56 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 13 Sep 2024 11:56 PM IST
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Bail rejected for operator who provides poisonous food to children
- मैसर्स कन्हैया इंटरप्राइजेज के संचालक राजेश गुप्ता को मिली थी भोजन की जिम्मेदारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। आश्रम पद्धति इंटर कॉलेज मेहरौना में बच्चों को विषाक्त भोजन कराने वाले मैसर्स कन्हैया इंटरप्राइजेज के संचालक राजेश गुप्त की जमानत शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश संजय सिंह की अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने आरोपी को लोक सेवक के आदेश की अवहेलना करने, विषाक्त भोजन कराकर विद्यार्थियों का जीवन संकट में डालने व उपेक्षा पूर्ण कार्य से नौनिहाल की हत्या करने के मामले में संलिप्त पाये जाने पर जमानत देने से इंकार कर दिया।

बरियारपुर थाना क्षेत्र के आश्रम पद्धति इंटर कॉलेज मेहरौना के छात्रों को नाश्ता व भोजन कराने की जिम्मेदारी मेसर्स कन्हैया इंटरप्राइजेज चौरी चौरा जनपद गोरखपुर के संचालक राजेश गुप्ता को दी गई थी, लेकिन राजेश गुप्ता ने उपेक्षा पूर्ण कार्य करते हुए बच्चों को 4 अगस्त 2024 को दोपहर में बना वासी भोजन रात में खिला दिया। इससे करीब 80 छात्रों की तबीयत खराब हो गई। अपर शासकीय अधिवक्ता आशुतोष सिंह ने बताया कि बच्चों की तबीयत खराब होने की सूचना पर तत्काल रामपुर कारखाना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों की टीम छात्रों का इलाज किया, लेकिन स्थिति नाजुक होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज देवरिया भेज दिया गया।
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एक छात्र की तबीयत काफी खराब होने के कारण उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। जिला समाज कल्याण अधिकारी देवरिया की सूचना पर फर्म के संचालक राजेश गुप्ता के विरुद्ध हत्या व लोक सेवक के आदेश की अवहेलना करने, उपेक्षा पूर्ण कार्य से दूसरों का जीवन संकटापन्न करके हत्या करने के मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपी राजेश गुप्ता की जमानत प्रार्थना पत्र पर बल देते हुए उनके अधिवक्ता ने तर्क दिया कि राजेश गुप्ता का इस घटना में कोई दोष नहीं है, क्योंकि भोजन जांच कमेटी की जांच के बाद ही बच्चों में वितरित किया जाता है। ऐसे में यदि जांच कमेटी ने अपने पदीय कर्तव्यों का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं किया तो इसके लिए जांच कमेटी दोषी है, लेकिन अदालत ने बच्चों में अविश्वास एवं भय का वातावरण उत्पन्न करने, शैक्षणिक माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव डालने व उपेक्षा पूर्ण कार्य से बच्चों के जीवन संकटापन्न करने व उनकी हत्या करने के मामले में संचालक की संलिप्तता पाए जाने तथा विवेचना को प्रभावित किए जाने में उसकी भूमिका को देखते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया ।
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