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विनियमितीकरण के लिए अनुदेशकों ने सौंपा ज्ञापन
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विनियमितीकरण के लिए अनुदेशकों ने सौंपा ज्ञापन
देवरिया। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों ने शुक्रवार को विनियमितीकरण की मांग उठाई। कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। शासन की ओर से दो हजार रुपये मानदेय वृद्धि के निर्णय के विरोध में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा।
पूर्व माध्यमिक अनुदेशक कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष जय सिंह यादव के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सत्र 2013-14 से अल्प मानदेय में अनुदेशकों को रखा गया। सत्र 2016 में अनुदेशकों का मानदेय बढ़कर 8470 रुपये हो गया, जो विगत वर्षों तक प्राप्त होता रहा। सत्र 2017 में 17 हजार रुपये मानदेय स्वीकृत हुआ, लेकिन इसका भुगतान नहीं किया गया। अनुदेशकों को 8470 रुपये ही दिए जाते रहे। उसमें भी वर्ष 2018 में 1470 रुपये की कटौती कर ली गई और पूरे साल रिकवरी की गई। जबकि उच्च न्यायालय ने मार्च 2017 से 17 हजार रुपये मानदेय देने का आदेश दिया था। वर्तमान में भारत सरकार के सातवें वेतनमान आयोग ने न्यूनतम जीविकोपार्जन के लिए 18 हजार रुपये निर्धारित किया है। जबकि अनुदेशकों को मात्र सात हजार रुपये देकर सहायक अध्यापकों की भांति पूरे समय विद्यालयों में रहकर अध्यापन का कार्य कराया जा रहा है। 29 दिसंबर को प्रदेश सरकार की ओर से दो हजार रुपये मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई है। संगठन इसका विरोध करता है और पिछले नौ साल की सेवा को देखते हुए हमें नियमित करने की मांग कर रहा है। ज्ञापन देने वालों में जिला मंत्री रविंद्र मणि त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष राजेंद्र गोंड, प्रमोद कुमार, बृजेश कुमार यादव, मनोज भाटिया, अरविंद पासवान, सुरेंद्र प्रसाद, रजनीश, हरिश्चंद्र, संदीप गौतम आदि शामिल रहे।
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देवरिया। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों ने शुक्रवार को विनियमितीकरण की मांग उठाई। कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। शासन की ओर से दो हजार रुपये मानदेय वृद्धि के निर्णय के विरोध में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा।
पूर्व माध्यमिक अनुदेशक कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष जय सिंह यादव के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सत्र 2013-14 से अल्प मानदेय में अनुदेशकों को रखा गया। सत्र 2016 में अनुदेशकों का मानदेय बढ़कर 8470 रुपये हो गया, जो विगत वर्षों तक प्राप्त होता रहा। सत्र 2017 में 17 हजार रुपये मानदेय स्वीकृत हुआ, लेकिन इसका भुगतान नहीं किया गया। अनुदेशकों को 8470 रुपये ही दिए जाते रहे। उसमें भी वर्ष 2018 में 1470 रुपये की कटौती कर ली गई और पूरे साल रिकवरी की गई। जबकि उच्च न्यायालय ने मार्च 2017 से 17 हजार रुपये मानदेय देने का आदेश दिया था। वर्तमान में भारत सरकार के सातवें वेतनमान आयोग ने न्यूनतम जीविकोपार्जन के लिए 18 हजार रुपये निर्धारित किया है। जबकि अनुदेशकों को मात्र सात हजार रुपये देकर सहायक अध्यापकों की भांति पूरे समय विद्यालयों में रहकर अध्यापन का कार्य कराया जा रहा है। 29 दिसंबर को प्रदेश सरकार की ओर से दो हजार रुपये मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई है। संगठन इसका विरोध करता है और पिछले नौ साल की सेवा को देखते हुए हमें नियमित करने की मांग कर रहा है। ज्ञापन देने वालों में जिला मंत्री रविंद्र मणि त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष राजेंद्र गोंड, प्रमोद कुमार, बृजेश कुमार यादव, मनोज भाटिया, अरविंद पासवान, सुरेंद्र प्रसाद, रजनीश, हरिश्चंद्र, संदीप गौतम आदि शामिल रहे।
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