{"_id":"64c02363a0524ddf1f041f17","slug":"anshs-life-was-lost-due-to-the-negligence-of-the-school-management-deoria-news-c-208-1-sgkp1009-2332-2023-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही से चली गई अंश की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही से चली गई अंश की जान
Wed, 26 Jul 2023 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 26 Jul 2023 01:02 AM IST
विज्ञापन
देवरिया। शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में झूले से गिरकर 10 वर्ष के अंश की मौत के मामले में विद्यालय प्रबंधन की भी लापरवाही सामने आई है।बच्चों-अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए विद्यालय में काफी ऊंचे झूले और स्लाइड लगाए गए हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा गया है। झूले के नीच न ही मैट लगा है, और नही नरम मिट्टी है। इस कारण ही गिरने से अंश को गंभीर चोट आ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जिला क्रीड़ाधिकारी राजनारायण प्रसाद ने बताया कि बड़े झूलों या स्लाइड के नीचे मैट और नरम मिट्टी डाली जानी चाहिए। जिससे किसी के गिरने पर उसे गंभीर चोट न लगे। वहीं जिस स्कूल में यह घटना हुई, वहां झूले के नीचे मैट या नरम मिट्टी के स्थान पर ईंटों से खड़ंजा बिछाया गया है। इस कारण ही अंश को गंभीर चोट लग गई। वहीं घटना के समय मौके पर बच्चों को देखने वाला भी कोई मौजूद नहीं था। अंश के स्कूल के कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि मंगलवार को सभी भोजनावकाश में खेल रहे थे। इसी बीच अंश झूले से गिरकर घायल हो गया।
घटना जिस स्कूल में हुई है, उसके अलावा शहर के कई निजी विद्यालयों एवं जिले के कई मॉडल परिषदीय स्कूलों में भी ऐसे ही झूले लगे हैं, जहां सुरक्षा के उपाय नहीं हैं। कुछ जगहों पर तो जंग खा रहे झूले भी हैं। बच्चों व अभिभावकों को इस तरह के तमाम तामझाम दिखाकर अधिकांश प्राइवेट स्कूल अपने यहां नामांकन तो बढ़वा ले रहे हैं। सवाल यह है कि भोजनावकाश या छुट्टी के वक्त जब बच्चे अपने अभिभावक के आने के इंतजार में झूलों पर दोस्तों के साथ खेल रहे थे तब कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति वहां मौजूद क्यों नहीं था। संबंधित विद्यालय में तो परिसर में लगे झूलों में कुछ ऐसे हैं जो ऊंचाई पर होने से खतरनाक भी हैं। अधिकांश निजी स्कूलों एवं प्लेवे की भी यही स्थिति है जहां मनोरंजन के कई उपकरण तो लगा दिए गए हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के प्रति प्रबंधन लापरवाही ही बना रहता है। शहर से लेकर देहात तक के नामी समझे जाने वाले स्कूलों में यही आलम दिखता है।
विज्ञापन
स्कूल में झूले से गिरकर छात्र की मौत की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। बेसिक शिक्षा परिषद की मान्यता वाले निजी एवं परिषदीय स्कूलों में जहां भी झूले हैं, वहां ऐसी घटना न हो, इसके लिए प्रधानाचार्यों को सजग किया जाएगा।
- शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए
रक्षाबंधन के एक माह पहले छोड़ गया भाई, घर आई तो हुई जानकारी
देवरिया। जिस स्कूल में अंश प्रताप पढ़ता था। उसी में उसकी छोटी बहन अंशिक भी पढ़ती है। पर उसे भाई की मौत की जानकारी स्कूल में नहीं हो पाई। जब उसे परिजन घर लेकर पहुंचे तो दरवाजे पर भीड़ देखकर अचंभित हो गई। घर के बरामदे में इकलौते भाई का शव देखकर वह दहाड़े मार कर रोने लगी। उसे क्या पता था कि जिस भाई महज एक माह बाद रक्षाबंधन के दिन कलाई पर राखी बांधना था, वह हमेशा के लिए चला गया है।
मां पूनम सिंह से बेटे की मौत के बाद अचेत होकर गिर जा रहीं थीं। मां और बेटी शव से लिपटकर रो पड़ रहे थे। बाबा निर्भय नरायाण सिंह और दादी चंद्रावती देवी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह जिस लाड़ले के साथ हर शाम गुजारते थे। गोद में बैठ कर अंश प्रताप बाबा के साथ खूब खेलता था। वह मंगलवार की शाम गोद को सूनी कर चला जाएगा। यह सोचकर बाबा और दादी रो पड़ रहे थे। बड़े पिता शक्ति सिंह का भी रो रो कर बुरा हाल हो गया था। संवाद
पिता गए थे बाबा धाम, लौटे तो बेटे का शव देखकर गिर पड़े
देवरिया। पिता राजू सिंह बाबा धाम पूजा अर्चन के लिए बड़े उल्लास के साथ गए थे। पूरे परिवार में हंसी खुशी का माहौल भी था। बेटे को पापा के आने का इंतजार रहा होगा। पर क्या पता था कि पापा जब घर के दरवाजे पर कदम रखेंगे तो उनके कदम लड़खड़ा जाएंगे। जिदंगी भर के लिए बड़ा दर्द मिल जाएगा। बेटे का शव देखते ही वह गिर गए। मौजूद अन्य परिजनों ने ढांढस बंधाया। संवाद
विज्ञापन
जिला क्रीड़ाधिकारी राजनारायण प्रसाद ने बताया कि बड़े झूलों या स्लाइड के नीचे मैट और नरम मिट्टी डाली जानी चाहिए। जिससे किसी के गिरने पर उसे गंभीर चोट न लगे। वहीं जिस स्कूल में यह घटना हुई, वहां झूले के नीचे मैट या नरम मिट्टी के स्थान पर ईंटों से खड़ंजा बिछाया गया है। इस कारण ही अंश को गंभीर चोट लग गई। वहीं घटना के समय मौके पर बच्चों को देखने वाला भी कोई मौजूद नहीं था। अंश के स्कूल के कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि मंगलवार को सभी भोजनावकाश में खेल रहे थे। इसी बीच अंश झूले से गिरकर घायल हो गया।
विज्ञापन
घटना जिस स्कूल में हुई है, उसके अलावा शहर के कई निजी विद्यालयों एवं जिले के कई मॉडल परिषदीय स्कूलों में भी ऐसे ही झूले लगे हैं, जहां सुरक्षा के उपाय नहीं हैं। कुछ जगहों पर तो जंग खा रहे झूले भी हैं। बच्चों व अभिभावकों को इस तरह के तमाम तामझाम दिखाकर अधिकांश प्राइवेट स्कूल अपने यहां नामांकन तो बढ़वा ले रहे हैं। सवाल यह है कि भोजनावकाश या छुट्टी के वक्त जब बच्चे अपने अभिभावक के आने के इंतजार में झूलों पर दोस्तों के साथ खेल रहे थे तब कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति वहां मौजूद क्यों नहीं था। संबंधित विद्यालय में तो परिसर में लगे झूलों में कुछ ऐसे हैं जो ऊंचाई पर होने से खतरनाक भी हैं। अधिकांश निजी स्कूलों एवं प्लेवे की भी यही स्थिति है जहां मनोरंजन के कई उपकरण तो लगा दिए गए हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के प्रति प्रबंधन लापरवाही ही बना रहता है। शहर से लेकर देहात तक के नामी समझे जाने वाले स्कूलों में यही आलम दिखता है।
विज्ञापन
स्कूल में झूले से गिरकर छात्र की मौत की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। बेसिक शिक्षा परिषद की मान्यता वाले निजी एवं परिषदीय स्कूलों में जहां भी झूले हैं, वहां ऐसी घटना न हो, इसके लिए प्रधानाचार्यों को सजग किया जाएगा।
- शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए
रक्षाबंधन के एक माह पहले छोड़ गया भाई, घर आई तो हुई जानकारी
देवरिया। जिस स्कूल में अंश प्रताप पढ़ता था। उसी में उसकी छोटी बहन अंशिक भी पढ़ती है। पर उसे भाई की मौत की जानकारी स्कूल में नहीं हो पाई। जब उसे परिजन घर लेकर पहुंचे तो दरवाजे पर भीड़ देखकर अचंभित हो गई। घर के बरामदे में इकलौते भाई का शव देखकर वह दहाड़े मार कर रोने लगी। उसे क्या पता था कि जिस भाई महज एक माह बाद रक्षाबंधन के दिन कलाई पर राखी बांधना था, वह हमेशा के लिए चला गया है।
मां पूनम सिंह से बेटे की मौत के बाद अचेत होकर गिर जा रहीं थीं। मां और बेटी शव से लिपटकर रो पड़ रहे थे। बाबा निर्भय नरायाण सिंह और दादी चंद्रावती देवी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह जिस लाड़ले के साथ हर शाम गुजारते थे। गोद में बैठ कर अंश प्रताप बाबा के साथ खूब खेलता था। वह मंगलवार की शाम गोद को सूनी कर चला जाएगा। यह सोचकर बाबा और दादी रो पड़ रहे थे। बड़े पिता शक्ति सिंह का भी रो रो कर बुरा हाल हो गया था। संवाद
पिता गए थे बाबा धाम, लौटे तो बेटे का शव देखकर गिर पड़े
देवरिया। पिता राजू सिंह बाबा धाम पूजा अर्चन के लिए बड़े उल्लास के साथ गए थे। पूरे परिवार में हंसी खुशी का माहौल भी था। बेटे को पापा के आने का इंतजार रहा होगा। पर क्या पता था कि पापा जब घर के दरवाजे पर कदम रखेंगे तो उनके कदम लड़खड़ा जाएंगे। जिदंगी भर के लिए बड़ा दर्द मिल जाएगा। बेटे का शव देखते ही वह गिर गए। मौजूद अन्य परिजनों ने ढांढस बंधाया। संवाद