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जमीन दी, अपने खर्चे से बनवा रहे गांव में रास्ता
Updated Tue, 24 Jul 2018 11:46 PM IST
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देवरिया के लार ब्लॉक के अजना गांव में अपनी जमीन पर अपने ही खर्च से सड़क बनवा रहे हैं गांव के ही रहने वाले राजेश सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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लार। ‘अजीब दर्द का रिश्ता है सारे जमाने से, कहीं हो जलता मकां अपना घर लगे है मुझे...।’ ऐसे दौर में जब कि लोग जमीन के एक टुकड़े के लिए अपनों का खून बहाने से भी गुरेज नहीं कर रहे, अजना गांव के राजेश सिंह दूसरों के लिए नजीर हैं। उन्हें हर जलता मकान अपना घर लगता है इसीलिए उन्होंने लोगों की तकलीफ दूर करने की ठानी। राजेश सिंह ने न सिर्फ आम रास्ते के लिए अपने हिस्से की जमीन दी, बल्कि अपने खर्च से उस पर इंटरलॉकिंग का निर्माण भी करा रहे हैं। इस रास्ते को बनाने में करीब चार लाख रुपये खर्च होंगे। यह रास्ता कुछ लोगों के आपसी विवाद की वजह से वर्षों से नहीं बन पा रहा था। अब पूरे गांव के लोगों को राहत मिलेगी।
अजना गांव में जाने के लिए मुख्य मार्ग संकरा और खड़ंजायुक्त है। करीब दो दशक पहले बना यह मार्ग खस्ताहाल हो चुका है। ग्रामीणों ने कई बार इसे दुरुस्त कराने की मांग की, लेकिन कुछ लोगों के विरोध के चलते निर्माण नहीं हो सका। विवश होकर लोग संकरे ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गांव में आते-जाते हैं। इससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। ग्रामीणों की इस पीड़ा को गांव के ही राजेश सिंह ने महसूस किया। उन्होंने किसी भी सूरत में इस समस्या का स्थायी निदान करने की ठान ली। पहले आस-पास के लोगों से वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन जब कोई राजी नहीं हुआ तो सड़क किनारे स्थित अपनी निजी जमीन से लोगों के लिए रास्ता देने का फैसला लिया। सोमवार से इस पर काम भी शुरू कराया।
इंटरलॉकिंग मार्ग 75 मीटर लंबा व साढ़े तीन मीटर चौड़ा है जिसकी कुल लागत करीब चार लाख है। ग्रामीण और आसपास के लोग उनकी इस पहल की सराहना करते नहीं थक रहे। ग्राम प्रधान डैजी सिंह ने बताया कि गांव में प्रवेश के लिए संकरे रास्ते को चौड़ा करने का प्रयास किया गया, लेकिन आरंभिक छोर पर ही कुछ लोग अपनी जमीन बताते हुए रास्ता देने को तैयार नहीं हुए। काफी प्रयास किया गया, लेकिन वे नहीं माने। विवाद के कारण ही निर्माण नहीं करा पा रहे थे। राजेश सिंह ने अपनी जमीन देकर पूरे गांव की समस्या हल कर दी है।
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कीचड़ में गिरा बुजुर्ग तो मिली प्रेरणा
राजेश सिंह गांव में ही मुर्गी दाना का काम करते हैं। उनका मेडिकल स्टोर भी है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को पगडंडीनुमा रास्तों से आते-जाते देख उन्हें काफी दुख होता था। एक बार वह अपनी दुकान पर जा रहे थे। तभी बरसात के समय गांव के एक बुजुर्ग व्यक्ति कीचड़ में गिर गए। यह देख उन्होंने तय कर लिया कि यहां वे अपनी जमीन और पैसे देकर रास्ता जरूर बनवाएंगे। ताकि ग्रामीणों को आने-जाने में दिक्कत ना हो।
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रास्ता बनने से ग्रामीणों में खुशी
गांव निवासी हरिहर कुशवाहा कहते हैं कि दशकों पुराना खड़ंजा उखड़ने के बाद से आवागमन दुष्कर हो गया था। बारिश में काफी दिक्कतें थी। अब पक्की सड़क पर गांव के लोग चलेंगे। ऋषिकेश प्रसाद कहते हैं कि जब से होश संभाला था, तब से पगडंडी से घर जाना पड़ता था। अब चौड़ा इंटरलॉकिंग मार्ग बन रहा है। पंकज भारती, धीरेंद्र सिंह का कहना है कि पहले कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता था। अब यह परेशानी नहीं होगी। 75 मीटर की इंटरलॉकिंग सड़क पूरे गांव को जोड़ेगी।
अजना गांव में जाने के लिए मुख्य मार्ग संकरा और खड़ंजायुक्त है। करीब दो दशक पहले बना यह मार्ग खस्ताहाल हो चुका है। ग्रामीणों ने कई बार इसे दुरुस्त कराने की मांग की, लेकिन कुछ लोगों के विरोध के चलते निर्माण नहीं हो सका। विवश होकर लोग संकरे ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गांव में आते-जाते हैं। इससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। ग्रामीणों की इस पीड़ा को गांव के ही राजेश सिंह ने महसूस किया। उन्होंने किसी भी सूरत में इस समस्या का स्थायी निदान करने की ठान ली। पहले आस-पास के लोगों से वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन जब कोई राजी नहीं हुआ तो सड़क किनारे स्थित अपनी निजी जमीन से लोगों के लिए रास्ता देने का फैसला लिया। सोमवार से इस पर काम भी शुरू कराया।
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इंटरलॉकिंग मार्ग 75 मीटर लंबा व साढ़े तीन मीटर चौड़ा है जिसकी कुल लागत करीब चार लाख है। ग्रामीण और आसपास के लोग उनकी इस पहल की सराहना करते नहीं थक रहे। ग्राम प्रधान डैजी सिंह ने बताया कि गांव में प्रवेश के लिए संकरे रास्ते को चौड़ा करने का प्रयास किया गया, लेकिन आरंभिक छोर पर ही कुछ लोग अपनी जमीन बताते हुए रास्ता देने को तैयार नहीं हुए। काफी प्रयास किया गया, लेकिन वे नहीं माने। विवाद के कारण ही निर्माण नहीं करा पा रहे थे। राजेश सिंह ने अपनी जमीन देकर पूरे गांव की समस्या हल कर दी है।
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कीचड़ में गिरा बुजुर्ग तो मिली प्रेरणा
राजेश सिंह गांव में ही मुर्गी दाना का काम करते हैं। उनका मेडिकल स्टोर भी है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को पगडंडीनुमा रास्तों से आते-जाते देख उन्हें काफी दुख होता था। एक बार वह अपनी दुकान पर जा रहे थे। तभी बरसात के समय गांव के एक बुजुर्ग व्यक्ति कीचड़ में गिर गए। यह देख उन्होंने तय कर लिया कि यहां वे अपनी जमीन और पैसे देकर रास्ता जरूर बनवाएंगे। ताकि ग्रामीणों को आने-जाने में दिक्कत ना हो।
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रास्ता बनने से ग्रामीणों में खुशी
गांव निवासी हरिहर कुशवाहा कहते हैं कि दशकों पुराना खड़ंजा उखड़ने के बाद से आवागमन दुष्कर हो गया था। बारिश में काफी दिक्कतें थी। अब पक्की सड़क पर गांव के लोग चलेंगे। ऋषिकेश प्रसाद कहते हैं कि जब से होश संभाला था, तब से पगडंडी से घर जाना पड़ता था। अब चौड़ा इंटरलॉकिंग मार्ग बन रहा है। पंकज भारती, धीरेंद्र सिंह का कहना है कि पहले कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता था। अब यह परेशानी नहीं होगी। 75 मीटर की इंटरलॉकिंग सड़क पूरे गांव को जोड़ेगी।