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‘संस्कृत हमारी सनातनी परंपरा की संवाहक’
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बैकुंठपुर में आयोजित ज्योती वास्तु कर्मकांड कार्यशाला को सर्म्पूणानंद विश्व विद्यालय के कुलपती ने संबोधित किया।
- फोटो : अमर उजाला
देवरिया। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि शास्त्र का प्रतिपादन सरल और हृदयंगम होना चाहिए। ज्योतिष-वास्तु और कर्मकांड मानव मूल्यों के उत्थान के लिए आज भी प्रासंगिक है। इनका ज्ञान पवित्र आचरण करने में सहयोग प्रदान करता है। हम सभी को इस विषय के बारे में सामान्य ज्ञान को रखना ही चाहिए।
वह गुरुवार को श्री बैकुंठनाथ पवहारी संस्कृत महाविद्यालय, बैकुंठपुर में ऋषि भारद्वाज ज्योतिषानुसंधान व जनकल्याण केंद्र देवरिया की ओर से आयोजित 15 दिवसीय ज्योतिष-वास्तु-कर्मकांड विषयक कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेदांत विभाग के आचार्य प्रो. सुधाकर मिश्र ने कहा कि ज्योतिष छह वेदांगों में नेत्र स्थान रखता है और नेत्रों से ही दृष्टि प्राप्त होती है। ज्योतिष और वास्तु दोनों मिलकर कभी-कभी कर्मकांड का प्रतिपादन करते हैं। बीएचयू के ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय ने कहा कि ज्योतिष-वास्तु और कर्मकांड सीधे-सीधे शास्त्र और जनमानस को जोड़ने का सशक्त माध्यम है, इसका बाजारीकरण कभी भी नहीं करना चाहिए। शरद त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत हमारी सनातनी परंपरा का संवाहक है। संस्कृत हमारी भाषा है तो संस्कृति आचरण है। ज्योतिष और वास्तु के आगे पूरी दुनिया नतमस्तक है। इसका उदाहरण गणना के रूप में सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण हमारे सामने उपस्थित होता है। वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र सीधे-सीधे सामान्य जनमानस से जुड़ा है। ज्योतिषियों को चाहिए कि वह आज के एक कुशल डॉक्टर की तरह परामर्श लेने गए मनुष्य को सरल और सहज परामर्श दें, उसे डराएं नहीं। वरिष्ठ पत्रकार आशीष त्रिपाठी ने कहा कि हमारे जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत तक इन तीन शास्त्रों का जीवन में सीधे जुड़ाव होता है। उत्पन्न होने वाले प्राणी का गर्भाधान संस्कार ज्योतिष के माध्यम से जबकि अंत्येष्टि क्रिया कर्मकांड से पूर्ण होती है। हम सभी सीधे ज्योतिष-वास्तु और कर्मकांड से जुड़े हैं। विषय प्रवर्तन संयोजक विवेक उपाध्याय व संचालन डॉ. अजय शुक्ला ने किया। इस दौरान पैकौली संस्था के प्रबंधक अंगद तिवारी, प्राचार्य डॉ. योगेश चतुर्वेदी, सुरेंद्र तिवारी, डॉ. अखिलेश पांडेय, डॉ. रामकेश्वर तिवारी, शचिंद्र शाही, गणेश प्रधान, मान्धाता शाही आदि मौजूद रहे।
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वह गुरुवार को श्री बैकुंठनाथ पवहारी संस्कृत महाविद्यालय, बैकुंठपुर में ऋषि भारद्वाज ज्योतिषानुसंधान व जनकल्याण केंद्र देवरिया की ओर से आयोजित 15 दिवसीय ज्योतिष-वास्तु-कर्मकांड विषयक कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेदांत विभाग के आचार्य प्रो. सुधाकर मिश्र ने कहा कि ज्योतिष छह वेदांगों में नेत्र स्थान रखता है और नेत्रों से ही दृष्टि प्राप्त होती है। ज्योतिष और वास्तु दोनों मिलकर कभी-कभी कर्मकांड का प्रतिपादन करते हैं। बीएचयू के ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय ने कहा कि ज्योतिष-वास्तु और कर्मकांड सीधे-सीधे शास्त्र और जनमानस को जोड़ने का सशक्त माध्यम है, इसका बाजारीकरण कभी भी नहीं करना चाहिए। शरद त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत हमारी सनातनी परंपरा का संवाहक है। संस्कृत हमारी भाषा है तो संस्कृति आचरण है। ज्योतिष और वास्तु के आगे पूरी दुनिया नतमस्तक है। इसका उदाहरण गणना के रूप में सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण हमारे सामने उपस्थित होता है। वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र सीधे-सीधे सामान्य जनमानस से जुड़ा है। ज्योतिषियों को चाहिए कि वह आज के एक कुशल डॉक्टर की तरह परामर्श लेने गए मनुष्य को सरल और सहज परामर्श दें, उसे डराएं नहीं। वरिष्ठ पत्रकार आशीष त्रिपाठी ने कहा कि हमारे जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत तक इन तीन शास्त्रों का जीवन में सीधे जुड़ाव होता है। उत्पन्न होने वाले प्राणी का गर्भाधान संस्कार ज्योतिष के माध्यम से जबकि अंत्येष्टि क्रिया कर्मकांड से पूर्ण होती है। हम सभी सीधे ज्योतिष-वास्तु और कर्मकांड से जुड़े हैं। विषय प्रवर्तन संयोजक विवेक उपाध्याय व संचालन डॉ. अजय शुक्ला ने किया। इस दौरान पैकौली संस्था के प्रबंधक अंगद तिवारी, प्राचार्य डॉ. योगेश चतुर्वेदी, सुरेंद्र तिवारी, डॉ. अखिलेश पांडेय, डॉ. रामकेश्वर तिवारी, शचिंद्र शाही, गणेश प्रधान, मान्धाता शाही आदि मौजूद रहे।
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