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बाढ़ पीड़ितों के लिए आसमान से बरस रही आफत
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:56 PM IST
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रुद्रपुर/एकौना। दस दिन से बाढ़ का दर्द झेल रहे दोआबा के लोगों के लिए आसमान से आफत बरसने लगी है। गुरुवार की रात शुरू हुई बरसात से बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। बंधों पर शरण लिए लोगों को खुले में भीगते हुए रात काटनी पड़ी। दाने-दाने को मोहताज बाढ़ पीड़ितों को जिंदगी बचाना एक चुनौती बन गई है।
बेलवा जमींदारी बांध कटने से दोआबा में आई प्रलयंकारी बाढ़ से 52 गांव के लोगों की हालत बिगड़ती जा रही है। बंधे पर शरण लिए पीड़ितों पर दोहरी मार बारिश से पड़ी है। क्षेत्र में गुरुवार की रात से ही बारिश शुरू है। अब तक प्रशासन की ओर से पीड़ितों को एक मीटर प्लास्टिक भी नही मिली है। खुले में खाने-पीने का सामान रखे बाढ़ पीड़ितों का सामान बारिश में भीग गया। लकड़ी भीगने से शुक्रवार को चूल्हा नहीं जल पाया। पीड़ित भूखे पेट आफत झेलने को मजबूूर हैं। बंधों पर बारिश से कीचड़ होने के कारण लोग मदद करने को नहीं पहुंच पा रहे। पचलडी गांव की रामदेई देवी, काली चरन प्रसाद ने कहा कि रात से बारिश हो रही है, प्रशासन की ओर राहत देने का कोई इंतजाम नहीं है। बारिश में भीगने से बुजुर्ग राम देई की तबीयत खराब हो गई। बसंत, हट्ठू प्रसाद ने कहा कि पहले बाढ़ और अब बारिश से हालत गंभीर होती जा रही है। पलिया छपरा, तिघरा मराछी, पचलड़ी ईश्वरपुरा, पचलड़ी बेलवा, एकौना, भेड़ी बंधों पर शरण लिए बाढ़ प्रभावितों की बरसात से दुर्दशा बढ़ गई है।
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बेलवा जमींदारी बांध कटने से दोआबा में आई प्रलयंकारी बाढ़ से 52 गांव के लोगों की हालत बिगड़ती जा रही है। बंधे पर शरण लिए पीड़ितों पर दोहरी मार बारिश से पड़ी है। क्षेत्र में गुरुवार की रात से ही बारिश शुरू है। अब तक प्रशासन की ओर से पीड़ितों को एक मीटर प्लास्टिक भी नही मिली है। खुले में खाने-पीने का सामान रखे बाढ़ पीड़ितों का सामान बारिश में भीग गया। लकड़ी भीगने से शुक्रवार को चूल्हा नहीं जल पाया। पीड़ित भूखे पेट आफत झेलने को मजबूूर हैं। बंधों पर बारिश से कीचड़ होने के कारण लोग मदद करने को नहीं पहुंच पा रहे। पचलडी गांव की रामदेई देवी, काली चरन प्रसाद ने कहा कि रात से बारिश हो रही है, प्रशासन की ओर राहत देने का कोई इंतजाम नहीं है। बारिश में भीगने से बुजुर्ग राम देई की तबीयत खराब हो गई। बसंत, हट्ठू प्रसाद ने कहा कि पहले बाढ़ और अब बारिश से हालत गंभीर होती जा रही है। पलिया छपरा, तिघरा मराछी, पचलड़ी ईश्वरपुरा, पचलड़ी बेलवा, एकौना, भेड़ी बंधों पर शरण लिए बाढ़ प्रभावितों की बरसात से दुर्दशा बढ़ गई है।
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