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Deoria News: शहीदी दिवस पर गुरुद्वारे में वीर रस की बहती रही धारा
Tue, 25 Nov 2025 11:32 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 25 Nov 2025 11:32 PM IST
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गुरुद्वारा
देवरिया। सिखों के नौंवे गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस मंगलवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। नई कॉलोनी गुरुद्वारा में विविध आयोजन किए गए। देर शाम आयोजित शबद कीर्तन से वीर रस की धारा बहती रही। सभी ने गुरु के बताए रास्ते पर चलते रहने का संकल्प लिया।
गुरुद्वारा में भोर से नित्य नेम वाणियों, श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ हुआ। सांध्य बेला में रहिराज साहिब का पाठ हुआ। इसके बाद वीर रस से भरपूर शबद कीर्तन का गायन हुआ। गुरुमत कथा विचार में सिख समाज ने अपने गुरु शहीद तेग बहादुर के माध्यम से शहीद सिंह और सिंहनियों को याद किया गया।
ग्रंथी दामोदर सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर, भाई दया लाल जी, भाई सतीदास जी, भाई मतिदास जी, जिनको गरम पानी उबाला देकर और आरा से चीर कर रुई में लपेट कर आग लगाकर करके औरंगजेब ने शहीद कर दिया। इस प्रताड़ना के बावजूद गुरु तेग बहादुर साहेब समेत किसी ने भी इस्लाम स्वीकार नहीं किया। हिन्दू धर्म की रक्षा की लिए शहीद हो गए।
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भाई जीवन सिंह, गुरु जी का सिर का लेकर आनंदपुर साहिब गुरुद्वारा में नौ वर्ष की आयु वाले गुरु गोविंद सिंह के पास जाते हैं। धड़ को लक्खीशाह बंजारा नामक सिख अपने साथ गुरु जी का धड़ लेकर जाते हैं। अपने मकान में रखकर मकान को आग लगाते हैं।
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गुरुद्वारा में भोर से नित्य नेम वाणियों, श्री सुखमनी साहिब जी का पाठ हुआ। सांध्य बेला में रहिराज साहिब का पाठ हुआ। इसके बाद वीर रस से भरपूर शबद कीर्तन का गायन हुआ। गुरुमत कथा विचार में सिख समाज ने अपने गुरु शहीद तेग बहादुर के माध्यम से शहीद सिंह और सिंहनियों को याद किया गया।
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ग्रंथी दामोदर सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर, भाई दया लाल जी, भाई सतीदास जी, भाई मतिदास जी, जिनको गरम पानी उबाला देकर और आरा से चीर कर रुई में लपेट कर आग लगाकर करके औरंगजेब ने शहीद कर दिया। इस प्रताड़ना के बावजूद गुरु तेग बहादुर साहेब समेत किसी ने भी इस्लाम स्वीकार नहीं किया। हिन्दू धर्म की रक्षा की लिए शहीद हो गए।
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भाई जीवन सिंह, गुरु जी का सिर का लेकर आनंदपुर साहिब गुरुद्वारा में नौ वर्ष की आयु वाले गुरु गोविंद सिंह के पास जाते हैं। धड़ को लक्खीशाह बंजारा नामक सिख अपने साथ गुरु जी का धड़ लेकर जाते हैं। अपने मकान में रखकर मकान को आग लगाते हैं।